कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कोई आता जाता नहीं – रामनाथ साहू ननकी

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कोई आता जाता नहीं – रामनाथ साहू ननकी रिक्त हुआ मन का मदिरालय ,कोई आता जाता नहीं ।सभी शराबी बने पुजारी ,प्याला दिल बहलाता नहीं ।। आज मौन मन होकर बैठा ,उसी नदी के किनारे पर ।जिसे देख होती थी बातें ,इतराते थे सहारे पर ।।शब्द भाव सब हैं मुरझाए ,क्यों कोई सहलाता नहीं ।रिक्त […]

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हिन्दी कुंडलिया: घायल विषय

हिंदी कविता

हिन्दी कुंडलिया: घायल विषय घायल रिपु रण में मिले , शरणार्थी है जान ।प्राण बचाने शत्रु का, नीर कराओ पान।नीर कराओ पान, सीख मानवता लेकर।भेदभाव को त्याग, प्रेम का परिचय देकर।कहे पर्वणी दीन, शत्रु फिर होंगे कायल ।समर भूमि में देख , करें सब सेवा घायल।। घायल करते कटु वचन, हृदय बढ़ाते पीर ।शब्द बाण

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mahatma gandhi

हिन्दी दोहा मुक्तक : अहिंसा विषय

हिंदी कविता

हिन्दी दोहा मुक्तक : अहिंसा विषय देख देश की दुर्दशा,गाँधी छेड़े युद्ध ।सत्य अहिंसा मार्ग से, बनकर योगी बुद्ध।आंदोलन की राह में, सत्य बना आधार।मार खदेड़े शत्रु को, होकर भारी क्रुद्ध।। छोड़ें हिंसा राह को, चलें अहिंसा राह ।खून खराबा कृत्य से, हो जाएं आगाह।हमें बचाना देश हैं, वार्ता करके संधि ।हम रखवाले हैं वतन

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हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय

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हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय सरगम है जानो सदा, सप्तसुरों का साज।पाकर स्वर संगीत को , मिले नयी परवाज ।मिले नयी परवाज, साधना सप्त सुरों में।करें शारदा वास, हमारे ही अधरों में ।कहे पर्वणी दीन, बने स्वर नाद विहंगम ।अद्भुत संगम गीत, सजे मधुरिम है सरगम।। सरगम के जब सुर छिड़े, जीवन मधुबन मान।अंतः उर

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धरती तुझे प्रणाम

हिंदी कविता

धरती तुझे प्रणाम माथ नवाकर नित करूँ , धरती तुझे प्रणाम ।जीव जंतु का भूमि ही , होता पावन धाम ।। खेले कूदे गोद में , सबकी माँ हो आप ।दुष्ट मनुज को भी सदा , देती ममता थाप ।। धरती माँ जैसी नहीं , कोई पालन हार ।सबका सहती भार ये , महिमा अपरंपार

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दीवारे खिंचने लगी भाई भाई बीच

हिंदी कविता

दीवारे खिंचने लगी भाई भाई बीच दीवारे खिंचने लगी,भाई भाई बीच।रहा प्रेम अब है कहाॅ,काम करे सब नीच।। खींचो मत दीवार अब,रहने दो कुछ प्यार।सभी यही रह जायगा,खुशियाँ मिले अपार।। भित्ति गिरा दो घृणा की,बांट सभी को प्यार ।दो दिन की है जिन्दगी,हिल मिल रहना यार।। प्रभु ने भेजा जगत में,सुन्दर करने काम।चुने सखा दीवार

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हम भारत के वासी

हिंदी कविता

हम भारत के वासी जन्म लिए जिस पुण्य धरा पर,इस जग में जो न्यारा है।हम भारत के वासी हम तो,कण -कण इसका प्यारा है। देश वासियों चलो देश का,हमको मान बढ़ाना हैं।दया-धरम सदभाव प्रेम से,सबको गले लगाना हैं।द्वेष-कपट को त्याग हृदय से,सुरभित सुख के हेम रहे।हिन्दू मुस्लिम,सिख-ईसाई,सब में अनुपम प्रेम रहे।मुनियों के पावन विधान ने,जग

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सावन पर दोहे

हिंदी कविता

सावन पर दोहे ★★★★★★★★सावन में पड़ने लगी,रिमझिम सरस फुहार।हरित चुनर ओढ़ी धरा,सुरभित है संसार।। कोयल कूके बाग में , दादुर करते शोर।सौंधी माटी की महक,फैल रही चहुँ ओर।। कल कल कर बहने लगी,धरती में जल धार।पावस का वरदान पा,आलोकित संसार।। तरु लता सब झूमकर , देते है संदेश।प्रेम रहे सब जीव में,छोड़ो कपट कलेश।। पावस

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चरित्र विषय पर दोहे : राधा तिवारी

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चरित्र विषय पर दोहे : राधा तिवारी चिंतन और चरित्र से ,हो जाता उद्धार।नीच कर्म करके मनुज ,कैसे हो व्यापार।। राधे नेक विचार से ,उत्तम बने चरित्र।सदा सत्य को ही रखो ,साथ बनाकर मित्र।। कर चरित्र निर्माण भी ,और काम के साथ।मात-पिता का हो सदा , सबके सिर पर हाथ।। सतयुग के तो बाद में

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बेटी कली है फूल है बहार है

हिंदी कविता

बेटी कली है फूल है बहार है बेटी, बेटी कली है, फूल है, बहार है,बेटी, बेटी गीत है, संगीत है, सुरों की तार है,बेटी, बेटी धन है, ताकत है, साहस का भंडार है,बेटी, बेटी घर की जन्नत, स्वर्ग का द्वार है। बेटी, बेटी पिता की लाडली, माँ की ममता अपार है,बेटी, बेटी प्यारी – प्यारी

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तुम लेखक नहीं नर पिचास हो

हिंदी कविता

तुम लेखक नहीं नर पिचास हो सिर्फ तुम ही नहींतुम से पूर्व भी थीपूरी जमात भांडों की।जो करते रहे ताथाथैयादरबारों की धुन पर।चाटते रहे पत्तलसियासी दस्तरखान पर।हिलाते रहे दुमसियासी इशारों पर।चंद रियायतों के लिएचंद सम्मान-पत्रों के लिए।करते रहे कत्लजनभावनाओं का।करते रहे अनसुनाकरुण चीखों को।करते रहे नजर अंदाजअंतिम पायदान केव्यक्ति की पीड़ा।तुम लेखक नहींनर पिचास हो।

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Happy Republic day

भारत गर्वित आज पर्व गणतंत्र हमारा

प्रकृति और पर्यावरण

भारत गर्वित आज पर्व गणतंत्र हमारा धरा हरित नभ श्वेत, सूर्य केसरिया बाना।सज्जित शुभ परिवेश,लगे है सुभग सुहाना।।धरे तिरंगा वेश, प्रकृति सुख स्वर्ग लजाती।पावन भारत देश, सुखद संस्कृति जन भाती।। भारत गर्वित आज,पर्व गणतंत्र हमारा।फहरा ध्वज आकाश,तिरंगा सबसे प्यारा।।केसरिया है उच्च,त्याग की याद दिलाता।आजादी का मूल्य,सदा सबको समझाता।। सिर केसरिया पाग,वीर की शोभा होती।सब कुछ

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