ऋतुराज बसंत- शची श्रीवास्तव
प्रकृति और पर्यावरणबसंत पंचमी विशेष रचना ऋतुराज बसंत- शची श्रीवास्तव
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बसंत पंचमी विशेष रचना ऋतुराज बसंत- शची श्रीवास्तव
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लौट आओ बसंत न खिले फूल न मंडराई तितलियाँन बौराए आम न मंडराए भौंरेन दिखे सरसों पर पीले फूलआख़िर बसंत आया कब..? पूछने पर कहते हैं–आकर चला गया बसंत !मेरे मन में रह जाते हैं कुछ सवालकब आया और कब चला गया बसंत ?कितने दिन तक रहा बसंत ?दिखने में कैसा था वह बसंत ?
श्री रामचंद्र भगवान पर आधारित उपमेंद्र सक्सेना
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राम नाम ही सत्य रहेगा / उपमेंद्र सक्सेना एड० Read More »
भीष्म महाराजा शान्तनु के पुत्र थे महाराज शांतनु की पटरानी और नदी गंगा की कोख से उत्पन्न हुए थे | उनका मूल नाम देवव्रत था। |हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को भीष्म पितामाह की जयंती मनाई जाती है भीष्म की विवशता कौरव और पांडव के पितामह,सत्य न्याय के पारखी !चिरकुमार भीष्म
भीष्म पितामह जयन्ती पर हिंदी कविता Read More »
गुरूपूर्णिमा विशेष दोहे करूँ नमन गुरुदेव को,जिनसे मिलता ज्ञान।सिर पर आशीर्वाद का,सदा दीजिए दान।।१।।*****हरि गुरु भेद न मानिए,दोनों एक समान।कुछ गुरु हैं घंटाल भी,कर लेना पहचान।।२।।*****प्रथम गुरू माता सुनो,दूजे जो दें ज्ञान।तीजे दीक्षा देत जो,जग गुरु सीख सुजान।।३।।*****ज्ञान गुरू देकर करें,शिष्यों का कल्याण।गुरु सेवा से शिष्य भी,होते ब्रम्ह समान।।४।।*****गुरू परीक्षा लेत हैं,शिष्य न जो घबराय।श्रद्धा
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पृथ्वी दिवस: धरती हमारी माँ हमको दुलारती हैधरती हमारी माँ।आँचल पसारती हैधरती हमारी माँ। बचपन मे मिट्टी खायीफिर हम बड़े हुए।जब पाँव इसने थामातब हम खड़े हुए।ममता ही वारती हैधरती हमारी माँ।हमको दुलारती हैधरती हमारी माँ। तितली के पीछे भागेकलियाँ चुने भी हम।गोदी में इसकी खेले,दौड़े,गिरे भी हम।भूलें सुधारती हैधरती हमारी माँ।हमको दुलारती हैधरती हमारी
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युवा वर्ग आगे बढ़ें छन्द – मनहरण घनाक्षरी युवा वर्ग आगे बढ़ें,उन्नति की सीढ़ी चढ़ें,नूतन समाज गढ़ें,एकता बनाइये। नूतन विचार लिए,कर्तव्यों का भार लिए,श्रम अंगीकार किए,कदम बढ़ाइए। आँधियाँ हैं सीमा पार,काँधे पे है देश भार,राष्ट्र का करें उद्धार,वक्त पहचानिए। बहकावे में न आयें,शिक्षा श्रम अपनायें,राष्ट्र संपत्ति बचायें,आग न लगाइए। ✍सुश्री गीता उपाध्याय रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
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छतीसगढ़ दाई चंदन समान माटीनदिया पहाड़ घाटीछतीसगढ़ दाई। लहर- लहर खेतीहरियर हीरा मोतीजिहाँ बाजे रांपा-गैंतीगावै गीत भौजाई। भोजली सुआ के गीतपांयरी चूरी संगीतसरस हे मनमीतसबो ल हे सुहाई। नांगमोरी,कंठा, ढारकरधन, कलदारपैंरी,बहुँटा श्रृंगारपहिरे बूढ़ीदाई । हरेली हे, तीजा ,पोराठेठरी खुरमी बरानांगपुरी रे लुगरापहिरें दाई-माई। नांगर के होवै बेराखाये अंगाकर मुर्राखेते माँ डारि के डेराअर तत कहाई।
हिन्दी कुण्डलियाँ: ऊर्जा संरक्षण (1)ऊर्जा सदा बचाइये,सीमित यह भंडार।धरती का वरदान है,जग विकासआधार। जग विकास आधार ,समझ कर इसे खरचना।बढ़े नहीं यह और ,सोचकर सभी बरतना। गीता सुन यह बात,चले सब दिन कल-पुर्जा।होगा संभव तभी,रहे जब रक्षित ऊर्जा।। (2)सूरज ऊर्जा पुंज है,इसका हो उपभोग।ऊर्जा संरक्षण करें,ले इसका सहयोग।। ले इसका सहयोग,चलायें सब कल पुर्जे।बचें गैस
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ऐसे में तू जरा हमसे नजर तो मिला आसमां है खुला, समां भी है खिला। ऐसे में तू जरा, हमसे नजर तो मिला।। चाहत से मेरे ये, शाम हुई है रंगीला। ऐसे में तू जरा, हमसे नजर तो मिला ।। मदहोशी छाई है , तनहाई गाई है ।मैं खो गया था, अब तुमने पाई है।अब
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अधखिली कली सी तुम अनारकलीअधखिली कली सी तुम अनारकली।तुम्हें देख कर मन में हो खलबलीबुरा हाल है मेरा जब से तुम्हें देखा ।तुम्हें अपना बना लेने की मैंने सोच रखा।जानूं ना तेरी अदाओं को क्या है असली नकली ।ख्वाबों में मैंने तेरी तस्वीर ही बनाया।तू ही तू हर लम्हा मेरे ख्यालों में आया ।तुम ही
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बेकरार दिल तुझे हुआ क्या बेकरार दिल …तुझे हुआ क्या ?तुझे देख कर ही जिंदगी हुई रंगीन।दीदार हुआ चांद का, चेहरा तेरा आफरीन ।आफरीन तेरी अदा ।ऑफरीन सबसे जुदाआफ़रीन माशा अल्लाह।आफरीन मेरे खुदा ।बेकरार दिल …तेरी खूबसूरती अब तलक थी मस्तूरी ।तू ना जाने हिरणी कहां तेरी कस्तूरी ।बन गई तू मेरे लिए कलमा,मेरा सजदा
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