कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

साहब कांसीराम पर कविता

हिंदी कविता

साहब कांसीराम पर कविता वो साईकिल चलाने वालासाहब कांसीराम था। वंचित को हक दिलाने वालासाहब कांसीराम था। बामसेफ को बनाने वालासाहब कांसीराम था। नीला झंडा उठाने वालासाहब कांसीराम था। खून में उबाल लाने वालासाहब कांसीराम था। शुद्र मन पर छाने वालासाहब कांसीराम था। भीम की याद दिलाने वालासाहब कांसीराम था। हमें हुक्मरान बनाने वालासाहब कांसीराम […]

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मित्रता पर कविता

हिंदी कविता

मित्रता पर कविता मित्रो के विवाद में संवाद करना चाहिए।मित्रो की मित्रता में अमृत रस बना चाहिए। मित्र ज्ञानी हो ना हो, सचा होना चाहिए।मित्रो में कपट ना हो, प्रेम होना चाहिए। समस्या में मित्रो का आसरा लेना चाहिए।भूख में मित्र भोजन बनना चाहिए। बुद्धि हो ना हो मित्र में परन्तु छल नहीं होना चाहिए।कृष्ण,

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घर मंदिर पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

घर मंदिर पर कविता त्याग और सहयोग जहाँ होघर वो ही कहलाता है।इक दूजे में प्यार बहुत होघर मंदिर बन जाता है।।1।। आँगन में किलकारी गूँजेघर बच्चों से भरा रहे।नारी का सम्मान जहाँ होप्रेम और सहयोग रहे।।2।। बड़े दिखाए स्वयं बड़प्पनछोटे आज्ञाकारी हो।आपस में सहयोग भाव होजहाँ नही लाचारी हो।।3।। संस्कारो का मान जहाँ होमिलजुलकर

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संस्कृति पर कविता

हिंदी कविता

संस्कृति पर कविता अपनी संस्कृति अपनाओ,अपना अभिवादन अपनाओ!जब भी मिले दूसरो से ,हाथ जोड़ मुस्कुराओ !!हाथ जोड़ मुस्कुराओ,कोरोना दूर भगाओ!हाथ धोये साबुन सेथोड़ा न घबराओ !!कहे दूजराम पुकार के ,सावधानी अपनाओ!खांसते मास्क लगाओकोरोना दूर भगाओ !! दूजराम साहूनिवास -भरदाकलातहसील -खैरागढ़जिला- राजनांदगाँव (छ.ग. )

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दादाजी पर कविता (एक अद्भुत मित्र)

हिंदी कविता

दादाजी पर कविता आज सुनाता हूँ मैं मेरे जीवन का वो प्रसंगजो है मेरे जीवन का एक अद्भुत अमिट अंग॥हुई कृपा उस ईश्वर की जो मुझे यहाँ पर भेजा हैसौंप दिया उस शख्श को मुझे जिसका मृदुल कलेजा है॥ईश्वर दे सभी को ऐसा जैसा मेरे भाग्य में सौंप दियाना डरता था मैं उनसे ऐसे बस

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कैसे जाल बिछाया है कोरोना

हिंदी कविता

कैसे जाल बिछाया है कोरोना कैसे जाल बिछाया है ?तूने रे कोरोना!हाहाकार मचा दिया है,हो रही है रोना !!कोरोना बोला सुन रे मानव,छोड़ दिया तूने अपनी संस्कृति,संस्कार भी भुला दिया !हाय हलो कर हाथ मिलाकर,रोगो को फैला दिया !!खान पान सादगी भुला ,माँसाहार अपना लिया !सत्य अहिंसा दयाभाव,दिलो से दफना दिया !!इसी कारण सून रे

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डॉग लवर पर पत्रकारिता

हिंदी कविता

डॉग लवर पर पत्रकारिता ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ किया करते थे।

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ख़यालों पर कविता

हिंदी कविता

ख़यालों पर कविता तुम मेरे ख़यालों में होते होमैं ख़ुशनसीब होता हूँबात चलती है तुम्हारी जहाँमैं ज़िक्र में होता हूँ . पलकें बंद होती नहीं रातों कोयादों को तुम्हारी आदत हैरातों की सियाही कटती नहींमैं फ़िक़्र में होता हूँ. क़तरा – क़तरा सुकूँ ज़िन्दगी मेंजमा होता है, यक-ब-यक नहींलुट जाता है ये सब अचानकमैं हिज़्र

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mera bharat mahan

शृंगार छंद विधान

हिंदी कविता

शृंगार छंद विधान श्रेष्ठ हो मेरा हिन्दुस्तान आरती चाह रही है मात।भारती अंक मोद विज्ञात।सैनिको करो प्रतिज्ञा आज।शस्त्र लो संग युद्ध के साज। विश्व मानवता हित में कर्म।सत्य है यही हमारा धर्म।आज आतंक मिटाना मीत।विश्व की सबसे भारी जीत। पाक को पाठ पढाओ वीर।धारणा में बस रखना धीर।भावना देश हितैषी पाल।कूदना बन दुश्मन का काल।

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साजन पर कविता

हिंदी कविता

साजन पर कविता मंद हवा तरु पात हिले,नचि लागत फागुन में सजनी।लाल महावर हाथ हिना,पद पायल साजत है बजनी।आय समीर बजे पतरा,झट पाँव बढ़े सजनी धरनी।बात कहूँ सजनी सपने,नित आवत साजन हैं रजनी। फूल खिले भँवरा भ्रमरे,तब आय बसे सजना चित में।तीतर मोर पपीह सबै,जब बोलत बोल पिया हित में।फागुन आवन की कहते,पिव बाट निहार

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सौ प्यास कैसे बुझे पर कविता

हिंदी कविता

सौ प्यास कैसे बुझे पर कविता मुझे कुछ ना सुझेभला एक बूंद मेंसौ प्यास कैसे बुझे ?तू मेरी ना सोच ,जा किसी चोंचअमृत बन .मेरी यही नियति हैकि तड़प मरूँअति महत्वाकांक्षा में.अब जान पाया हूंकि उचित हैसफर करना शून्य से शिखर तक.जीवन की ढलानहोती है भयानकऔर उससे भी कटुमेरी ये अकड़जो झुके तो भी ना

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ख्वाहिश पर कविता

हिंदी कविता

ख्वाहिश पर कविता मिट्टी से बना हूं मैं , मिट्टी में मिल जाऊंगा।जब तक हूँ अस्तित्व में ,रौशनी कर जाऊंगा।। तम छाया है हर तरफ,सात्विकता बढ़ाऊंगा।विवेक को जगा कर मैं,रोशनी कर जाऊंगा।। विनय रूपी भरूँ तेल ,धैर्य की बाती बनाऊंगा।सतत ज्ञान बढ़ाकर मैं ,रौशनी कर जाऊंगा।। उत्साह है मेरे अंदर, सभी में भर जाऊंगा।ख्वाहिश बस

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