कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

रूढ़ीवाद पर कविता

हिंदी कविता

रूढ़ीवाद पर कविता उन्होंने डाली जयमालाएक-दूसरे के गले मेंहो गए एक-दूसरे केसदा के लिएप्रगतिशील लोगों नेबजाई तालियांहो गए शामिलउनकी खुशी मेंरूढ़ीवादियों नेमुंह बिचकाएनाक चढ़ाईकरते रहे कानाफूसीकरते रहे निंदाअन्तर्जातीय प्रेम-विवाह कीदेते रहे दुहाईपरम्पराओं कीदेखते ही देखतेढह गया किलासड़ी-गलीव्यवस्था का

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कदम-कदम पर कविता

हिंदी कविता

कदम-कदम पर कविता यहां हैप्रतिस्पर्धाइंसानों मेंएक-दूसरे से।आगे निकलने कीचाहे किसी केसिर पर या गले पररखना पड़े पैर,कोई परहेज़-गुरेज नहीं ।किसी को कुचलने मेंनहीं चाहता कोईसबको साथ लेकरआगे बढ़ना।होती है टांग-खिंचाईरोका जाता हैै।आगे बढ़ने सेडाले जाते हैं अवरोध।लगाया जाता है,एड़ी-चोटी का जोर।एक-दूसरे के खिलाफकदम-कदम पर।।

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विरह पर कविता

हिंदी कविता

विरह पर कविता प्रेम में पागल चाँद से चकोर प्यार करे ।उम्र भर देखे शशि को उसका हीं दीदार करे । हिज्र एक पल का भी सहा जाये ना उनसे ।आंसुओं के मोती से इश्क का इजहार करे। हर घड़ी हर पल आँखों में चंदा की चंद्रकला ।चाँद को मन में बसाकर बेशुमार प्यार करे।।

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बहरूपिया पर कविता

हिंदी कविता

बहरूपिया पर कविता ये क्या ! अचानक इतने सारेअब गाँव- गाँव पधारे ,लगता है सफेद पंखधारीहंस है सारे !सावधान रहना रे प्यारे !भेष बदलने वाले है सारे !! पहले पता नहीं थाइसमें क्या – क्या गुण है,ये हमारे शुभ चिंतक हैया अब मजबूर है !बड़े सहज लग रहे हैंअब सारे के सारे !सावधान रहना रे

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हंसवाहिनी माँ पर कविता

हिंदी कविता

हंसवाहिनी माँ पर कविता हंसवाहिनी मात शारदेहमको राह दिखा देना।वीणापाणि पद्मासना माँतम अज्ञान हटा देना।।???विद्यादायिनी तारिणी माँकरु प्रार्थना मैं तेरी।पुस्तकधारिणी माँ भारतीहरो अज्ञानता मेरी।।???हम सब अज्ञानी है माताहम पर तुम उपकार करो।तुम दुर्बुद्धि दुर्गुण मिटाकरशुचि ज्ञान का दान करो।।???हे धवलवस्त्रधारिणी मातहम भक्ति करें तुम्हारी।दिव्यालंकारों से भूषितक्षमा करो भूल हमारी।।???शिवा अम्बा वागीश्वरी माँहम सब मानव अज्ञानी।रूपसौभाग्यदायिनी

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रोटी पर कविता

हिंदी कविता

रोटी पर कविता सांसरिक सत्य तोयह है किरोटी होती हैअनाज कीलेकिन भारत में रोटीनहीं होती अनाज कीयहाँ होती हैअगड़ों की रोटीपिछड़ों की रोटीअछूतों की रोटीफलां की रोटीफलां की रोटीऔर हांयहाँ परनहीं खाई जातीएक-दूसरे की रोटी -विनोद सिल्ला

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नमक पर व्यंग्य

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

नमक पर व्यंग्य होटल में खाने के मेज पर छोटे छोटे छिद्रों वाले डिब्बे पड़े ही रहते हैं।कार्टून बने डिब्बे में नमक मिर्च भरे होते हैं, दाल सब्जी में नमक कम हो तो मन मर्जी डाल लो।लेकिन सब्जी में नमक ज्यादा होने पर सारा जायका बिगड़ जाता है।नमक को सब्जी का जान कह सकते हैं,पानी

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निषादराज के दोहे

हिंदी कविता

निषादराज के दोहे (1) पाषाणमत बनना पाषाण तू,मन में रखना धीर।दया धर्म औ प्यार से,बोलो ज्यों हो खीर।। (2) क्षितिजदूर क्षितिज पर आसमां,नीला रंग निखार।जैसे श्यामल गात हो,सुन्दर कृष्ण मुरार।। (3) वत्सलमाँ का वत्सल है बड़ा,ममता का भण्डार।सारे जग में हैं नहीं,इनके जैसा प्यार।। (4) शुभ्रशुभ्र ज्योत्सना चाँदनी,धवल निखार प्रकाश।रजनी में प्यारा लगे,शीतलता आभास।। (5)

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बेबश नारी पर कविता- लाचार ममता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

बेबश नारी पर कविता सायं ठल गई अंधेरों में कब तक यूं ही सोओगे , ममता की दुलारी चिडियाँ कब तक यूं ही खोओगे। ममता का जमीर बेच दिया-इंसानियत के गद्दरो ने,बहना का सब धीर सेज दिया-चिडियाँ के हत्यारों ने।चोर,उच्चके चौराहों पर ध्यान लगाए बैठे है, इज्जत की पौडी पर अपना- ईम्मान लगाए बैठे है।

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जात-पात पर दोहे

हिंदी कविता

जात-पात पर दोहे जात-पात के रोग से, ग्रस्त है सारा देश|भेद-भाव ने है दला, यहाँ पर वर्ग विशेष|| जात-पात के जहर से, करके बंटा-धार|मरघट-पनघट अलग हैं, करते नहीं विचार|| जात-पात के भेद में, नित के नए प्रपंच|जात मुताबिक संगठन, जात मुताबिक मंच|| जात-पात है भयावह, जात भयानक रोग|करें नहीं उपचार क्यों, झेल रहे हैं लोग||

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आदमी का प्रतिरूप पर कविता

हिंदी कविता

आदमी का प्रतिरूप पर कविता-विनोद सिल्ला आदमीनहीं रहा आदमीहो गया यन्त्र सा जिसका नियन्त्रण हैकिसी न किसीनेता के हाथकिसी मठाधीश के हाथया फिर किसीधार्मिक संस्था के हाथजिसका आचरण है नियंत्रितउपरोक्त द्वाराआदमी होने काआभास सा होता हैबस आदमी काप्रतिरूप सा लगता है आज का आदमीनहीं रहाआदमी साजाने कहां खो गईआदमीयत

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mother their kids

मां की आंचल पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। मां की आंचल पर कविता मां तुने अपने आंचल में सृष्टि को समेटा है,खुद दर्द सहके हमें जीवन दिया

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