शब्दो पर दोहे
हिंदी कविताशब्दो पर दोहे १सागर मंथन जब हुआ, चौदह निकले रत्न।*अन्वेषण* नित कर रहे, सतत समस्त प्रयत्न।।२*सम्प्रेषण* होता रहे, भव भाषा भू ज्ञान।विश्व राष्ट्र परिकल्पना, हो साकार सुजान।।३अपनी रही विशेषता, सब जन के परि त्राण।बना *विशेषण* हिन्द यह, सागर हिन्द प्रमाण।४*अन्वेषण* करिए सतत, *सम्प्रेषण* कर ज्ञान।बने *विशेषण* मानवी, विश्व राज्य सम्मान।।५खिलते फूल बसंत जब, करते *अलि* […]

