कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मन पर कविता -शशिकला कठोलिया

हिंदी कविता

मन पर कविता रे मेरे मन ,ये तू क्या कर रहा है ,जो तेरा नहीं उसके लिए तू क्यों रो रहा है? दफन कर दे अपने सीने में, अरमानों को ,जो सागर की लहरों की तरह, हिलोरे ले रहा है ,यादों को आंखों में संजोकर रख, जो नदी की धारा की तरह ,बहे जा रहा है ,रे मेरे मन,मत पाल अरमान दिल […]

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मैं नन्हा दीपक हूँ -डाँ. आदेश कुमार

हिंदी कविता

मैं नन्हा दीपक हूँ मैं जग का नन्हा दीपक हूँ ।। मैं निर्भय होकर जलता हूँ ।। निपट अकेला कोई होता ।चिंताओ में जब है खोता ।।रक्षक बन जाता हूँ उसका ,मैं अपलक जगता रहता हूँ ।।मैं जग का नन्हा दीपक हूँ ।।मैं निर्भय होकर जलता हूँ ।। होता दो दिल का बंधन जब ।जुड़ना

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स्नेह का दीप पर कविता -डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

स्नेह का दीप पर कविता जगमग हो जाए हर कोनाहरेक चीज लगे अब सोनाहर दुख का हो जाय शमनभर जाए खुशियों से दामनअंधियारा जग से मिट जाएएक स्नेह का दीप जलाए।।          ???विश्व में शांति का प्रसार होप्रेम और सद्भाव अपार होघर घर दीप करे उजियाराबढ जायआपसी भाईचाराचहुँ और चेतना फैल जाएएक

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त्यौहार पर कविता-तेरस कैवर्त्य ‘आंसू’

हिंदी कविता

त्यौहार पर कविता आया कार्तिक मास अब, साफ करें घर द्वार।रंग बिरंगे लग रहे, आया है त्यौहार।।१।। गली गली में धूम है , जलती दीप कतार।सभी मनाये साथ में, दीवाली त्यौहार।।२।। श्रद्धा सुमन चढ़ा करें, पूजे लक्ष्मी मान।मेवा घर घर बांटते , नया पहन परिधान।।३।। सुमत सहज ही बांध के, आये जब त्यौहार।महक दहक बहती

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इस दिवाली कुछ ऐसा कर देना -शैलेन्द्र चेलक

हिंदी कविता

इस दिवाली कुछ ऐसा कर देना हे ऐश्वर्य की देवी ! कल्याणकारिणी तुझे प्रणाम !एक निवेदन मेरी सुन लो ,लाया हूं विकट पैगाम , तुझसे कोई अछूता नहीं ,फिर गरीबो को क्यूं छूता नही ,तेरी महिमा अपरंपार ,तेरी चरणों मे समृद्धि भंडार , अमीरों के घरों में बिन बुलाए आती ,गरीबो को भूल जाती ? ध्यान धरा

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दीपक हो उदास-माधवी गणवीर

हिंदी कविता

दीपक हो उदास गर दीपक हो उदास तो दीप कैसे जलाऊ……उन्यासी बरस की आजादी काक्या हाल हुआ उनकी बर्बादी का,सत्ता के लुटेरे देखे,बेरोजगारी की बार झेलेभष्ट्राचारी, लाचारी,भुखमरी का,क्या अब राग सुनाऊ…..दीप कैसे जलाऊ।अपने ही करते आएअपनो पर आहत,लाख करू जतन मिलती नही राहतकैसे बचेगा देश विभीषणों की चाल से,बच जायेंगे दुश्मनों से,पर क्या बचेंगे जयचंदो की चाल से।कपटी, बेईमानो,धोखेबाजो

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jai laxmi maata

माँ लक्ष्मी वंदना- डॉ.सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”

हिंदी कविता

माँ लक्ष्मी वंदना चाँदी जैसी चमके काया, रूप निराला सोने सा।धन की देवी माँ लक्ष्मी का, ताज चमकता हीरे सा। जिस प्राणी पर कृपा बरसती, वैभव जीवन में पाये।तर जाते जो भजते माँ को, सुख समृद्धि घर पर आये। पावन यह उत्सव दीपों का,करते ध्यान सदा तेरा।धनतेरस से पूजा करके, सब चाहे तेरा डेरा। जगमग

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धनतेरस पर कविता-सुकमोती चौहान रुची

हिंदी कविता

धनतेरस पर कविता सजा धजा बाजार, चहल पहल मची भारीधनतेरस का वार,करें सब खरीद दारी।जगमग होती शाम,दीप दर दर है जलते।लिए पटाखे हाथ,सभी बच्चे खुश लगते।खुशियाँ भर लें जिंदगी,सबको है शुभकामना।रुचि अंतस का तम मिटे,जगे हृदय सद्भावना। ✍ सुकमोती चौहान “रुचि”

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धनतेरस -रामनाथ साहू ” ननकी “

हिंदी कविता

                * धनतेरस * धनतेरस पर कीजिए ,                   धन लक्ष्मी का मान ।पूजित हैं इस दिवस पर ,                     धन्वंतरि भगवान ।।धन्वंतरि भगवान ,         शल्य के जनक चिकित्सक ।महा

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धनतेरस त्यौहार पर कविता-संतोष नेमा “संतोष”

हिंदी कविता

धनतेरस त्यौहार पर कविता धन की वर्षा हो सदा,हो मन में उल्लास तन स्वथ्य हो आपका,खुशियों का हो वास जीवन में लाये सदा,नित नव खुशी अपारधनतेरस के पर्व पर,धन की हो बौछार सुख समृद्धि शांति मिले,फैले कारोबाररोशनी से रहे भरा,धनतेरस त्यौहार झालर दीप प्रज्ज्वलित,रोशन हैं घर द्वारपरिवार में सबके लिए,आये नए उपहार माटी के दीपक

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दीप से दीप जले-श्याम कुँवर भारती

समाज और यथार्थ

दीप से दीप जले  दिल से दिल मिले ,दीप से दीप जले |दिवाली मे हर मुख मुस्कान खिले |हर घर हो रोशनी से जगमग |घर गरीबो हो खुशिया दीप से दीप जले |मिट्टी घर ही नहीं झोपड़ी उजाला रहे |बच्चे जवान रहे मगन दीप से दीप जले |दुश्मनी दुर्दिन दुर्भिक्ष जल खाक हो |सुख शांति

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मिट्टी के दीया पर कविता -कुमार जितेन्द्र

हिंदी कविता

मिट्टी के दीया पर कविता एक दीया मिट्टी का जलाएँ l                                                               दूसरा दीया मन का जलाएँ ll अन्धकार से प्रकाशित करे l       

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