कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मोर मया के माटी-राजेश पान्डेय वत्स

हिंदी कविता

मोर मया के माटी छत्तीसगढ़ के माटीअऊ ओकर धुर्रा। तीन करोड़ मनखेसब्बौ ओकर टुरी टुरा।।  धान के बटकी कहाय,छत्तीसगढ़ महतारी। अड़बड़ भाग हमर संगीजन्में येकरेच दुआरी।।  एकर तरपांव धोवय बरआइन पैरी अरपा। महानदी गंगा जईसनखेत म भरथे करपा।।  मया के बोली सुनबे सुघ्घरछत्तीसगढ़ म जब आबे। अही म जनमबे वत्स तैं, मनखे तन जब पाबे।।  —-राजेश […]

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प्रेम का मर जाना

हिंदी कविता

प्रेम का मर जाना डॉ सुशील शर्मा प्रेम का मरना ही आदमी का मरना हैजब प्रेम मरा था तोबलि प्रथा सती प्रथा उगी थींप्रेम के मरने पर हीधरती की सीमायें सिमट जातीं है।महाद्वीप ,देश ,प्रदेश ,भाषाओंजाति समुदाय ,मनुष्य ,जानवर का भेद होता है। प्रेम मरता है तोहिटलर ,मुसोलिनी ,औरंगजेबबगदादी ,ओसामा पैदा होते हैं।प्रेम मरता है

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता चलो नवा सुरुज परघाना हे छत्तीसगढ़ राज्य पायेहनचलो नवा सुरुज परघाना हे !भारत माता के टिकली सहिक….छत्तीसगढ़ ल चमकाना हे !! जेन सपना ले के राज बने हेसाकार हमला करना हे!दिन -दुगनी ,रात -चौगुनीआगे -आगे बढ़ना हे !सरग असन ये भुईया ल….चक- चक ले चमकाना हे!! मिसरी असन भाखा

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हरि का देश छत्तीसगढ़-बाँके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

हरि का देश छत्तीसगढ़ आर्यावर्त के हृदय स्थल परछत्तीसगढ़ एक नगर महान।कर्मभूमि रही श्रीराम प्रभु कीसंत गाहीरा,घासीदास बड़े विद्वान।संस्कृति यहाँ की युगों पुरानीअदृतीय धरा यह पावन धाम ।यहाँ धर्म की गंगा अविरल बहतीकहता है सब वेद पुराण ।नित दिन बरसे यहाँ हरि कृपालोग प्रेम सुधा का करें रसपान।जीवन धन्य हो जाता उनकाइस पावन प्रदेश में

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छत्तीसगढ़ का वैभव -शशिकला कठोलिया

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ का वैभव  कहलाता धान का कटोरा ,है प्रान्त वनाच्छादित ,महानदी ,इंद्रावती, हसदो, शिवनाथ करती सिंचित, छत्तीसगढ़ की गौरवशाली, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजीवन पर दिखता, सामाजिकता व इंसानियत,हुए हैं छत्तीसगढ़ में,बड़े बड़े साहित्यकार,लोचन ,मुकुटधर ,माधव ,गजानन नारायण ,परमार ,प्राचीन काल से है यहां ,धार्मिक गतिविधियों का केंद्र सिरपुर ,डोंगरगढ़ शिवरीनारायण ,है आस्था का केंद्र रतनपुर ,बस्तर में है दर्शनीय स्थल

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जब भी सुनता हूँ नाम तेरा- निमाई प्रधान’क्षितिज

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जब भी सुनता हूँ नाम तेरा तेरे आने की आहटें… बढ़ा देती हैं धड़कनें मेरी !मैं ठिठक-सा जाता हूँ-जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!! तेरे इश्क़ के जादूओं का असर..यूँ रहामेरी रूह बाहर रही,मैं ही तो अंदर रहा ख़ुद से मिलने को अक्सर…मैं बहक-सा जाता हूँ-जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!! मरु-थल में भी गुलों की बारिश तेरे

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हाइकु

निर्मल नीर के हाइकु

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निर्मल नीर के हाइकु नूतन वर्ष~चारों तरफ़ छायाहर्ष ही हर्ष काम न दूजा~सबसे पहले होगायों की पूजा है अन्नकूट~कोई न रहे भूखाजाये न छूट भाई की दूज~पवित्र है ये रिश्ताइसको पूज दिवाली आई~घर-घर में देखोखुशियाँ छाई निर्मल ‘नीर’

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नई राह पर कविता- बांकेबिहारी बरबीगहीया

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नई राह पर कविता धन को धर्म से अर्जित करनातुम परम आनंद को पाओगे।सुख, समृद्धि ,ऐश्वर्य मिलेगी तुम धर्म ध्वजा फहराओगे।जीवन खुशियों से भरा रहेगायश के भागी बन जाओगे ।अपने धन के शेष भाग कोदान- पुण्य कर देना तुम ।दीन दुखियों की सेवा करकेनिज जीवन धन्य कर लेना तुम। सत्य,धर्म,तप,त्याग तुम करनाहर सुख जीवन भर पाओगे

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मातर तिहार पर कविता-गोकुल राम साहू

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            मातर तिहार पर कविता चलना दीदी चलना भईया,मातर तिहार ला मनाबोन।बड़े फजर ले सुत उठ के,देवी देवता ला जगाबोन।। हुँगूर धूप अगर जलाके,देवी देवता ला मनाबोन।रिक्छिन दाई कंदइल मड़ई संग,मातर भाँठा मा जुरियाबोन।। मोहरी बाजा अउ रऊत संग,नाचत गावत सब जाबोन।मखना कोचई अउ दार चउँर,घरो-घर मा जोहारबोन।। कारी लक्ष्मी

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कैसी दीवाली / विनोद सिल्ला

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कैसी दीवाली / विनोद सिल्ला कैसी दीवाली किसकी दीवालीजेब भी खाली बैंक भी खाली हर तरफ हुआ है धूंआ-धूंआपर्यावरण भी दूषित है हुआ जीव-जन्तु और पशु-पखेरआतिशी दहशत में हुए ढेर कितनों के ही घर बार जलेनिकला दीवाला हाथ मले अस्थमा रोगी तड़प रहे हैंउन्मादी अमन हड़प रहे हैं नकली मावा, नकली पनीरखाई मिठाई हो कर

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मिल कर दिवाली को मनाएँ हम- प्रवीण त्रिपाठी

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मिल कर दिवाली को मनाएँ हम चलो इस बार फिर मिल कर, दिवाली को मनाएँ हम।* *हमारा देश हो रोशन, दिये घर-घर जलाएँ हम।* *मिटायें सर्व तम जो भी, दिलों में है भरा कब से।* *करें उज्ज्वल विचारों को, खुरच कर कालिमा मन से।* *भरें नव तेल नव बाती, जगे उत्साह तन मन में।* *जतन

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कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा

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आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा दीपावली की पावन बेलामहकी जूही, खिल गई बेलाधनवंतरि की रहे छायानिरोगी रहे हमारी कायारूप चतुर्दशी में निखरे ऐसेतन हो सुंदर मन भी सुधरे महालक्ष्मी की कृपा परस्परहम सब पर हरदम ही बरसेमाँ लक्ष्मी के वरद हस्त नेइतना सक्षम हमें किया हैदिल में सबके प्यार जगाएंअपनी खुशियाँ चलो बाँट

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