कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

रोशनी पर कविता -रूपेश कुमार

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

रोशनी पर कविता प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे मे ,रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे मे ,दिलो का मिलना दिवाली का ये पैगाम ,दुरिया दिल का मीटाओ इस अंधेरे मे ! अजननी है भटक न ज़ाए कही मंजिल ,रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे मे ,ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए ,कोई हमसफर हमदम बनाओ […]

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प्रकाश पर कविता-वर्षा जैन “प्रखर”

हिंदी कविता

प्रकाश पर कविता मन के अंध तिमिर में क्याप्रकाश को उद्दीपन की आवश्यकता है? नहीं!! क्योंकि आत्म ज्योति काप्रकाश ही सारे अंधकार को हर लेगाआवश्यकता है, तो बस अंधकार को जन्म देने वाले कारक को हटाने कीउस मानसिक विकृत कालेपन को हटाने कीजो अंधकार का जनक हैयदि अंधकार ही नहीं होगा तो मन स्वतः ही प्रकाशित रहेगामन प्रकाशित होगा तो वातावरण

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doha sangrah

धनतेरस के दोहे (Dhanteras Dohe)

हिंदी कविता

धनतेरस के दोहे (Dhanteras Dohe) धनतेरस का पुण्य दिन, जग में बड़ा अनूप।रत्न चतुर्दश थे मिले, वैभव के प्रतिरूप।। आज दिवस धनवंतरी, लाए अमृत साथ।रोग विपद को टालते, सर पे जिसके हाथ।। देव दनुज सागर मथे, बना वासुकी डोर।मँदराचल थामे प्रभू, कच्छप बन अति घोर।। प्रगटी माता लक्षमी, सागर मन्थन बाद।धन दौलत की दायनी, करे

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खुशियों के दीप-एल आर सेजु थोब ‘प्रिंस’

हिंदी कविता

खुशियों के दीप असंभावनाओ में संभावना की तलाश करआओ एक नया आयाम स्थापित करें।मिलाकर एक दूसरे के कदम से कदमआओ हम मिलकर खुशियों के दीप जलाये।। निराशाओं के भवंर में डूबी कश्ती में फिर से उमंग व आशा की रोशनी करे ।हताश होकर बैठ गये जो घोर तम मेंउनकी उम्मीदों के दीप प्रज्वलित करें । रूठ

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कविता का बाजार- आर आर साहू

हिंदी कविता

कविता का बाजार अब लगता है लग रहा,कविता का  बाजार।और कदाचित हो रहा,इसका भी व्यापार।। मानव में गुण-दोष का,स्वाभाविक है धर्म।लिखने-पढ़ने से अधिक,खुलता है यह मर्म।। हमको करना चाहिए,सच का नित सम्मान।दोष बताकर हित करें,परिमार्जित हो ज्ञान।। कोई भी ऐसा नहीं,नहीं करे जो भूल।किन्तु सुधारे भूल जो,उसका पथ अनुकूल ।। परिभाषित करना कठिन,कविता का संसार।कथ्य,शिल्प

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जिंदगी के सफर पर कविता- हरीश पटेल

हिंदी कविता

जिंदगी के सफर पर कविता ज़िंदगी का सफ़र है मृत्यु तक।तुम साथ दो तो हर शै मयख़ाना हो ! हर रोज.. है एक नया पन्ना।हर पन्ने में, तेरा फ़साना हो !! यहाँ हर पल बदलते किस्से हैं हर किस्से का अलग आधार है ।अपने दायरे में सब सच्चे हैं उनका बदलता बस किरदार है । लगता कोई

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स्त्री एक दीप-डॉ. पुष्पा सिंह’प्रेरणा’

समाज और यथार्थ

स्त्री एक दीप स्त्री बदलती रहीससुराल के लिएसमाज के लिएनए परिवेश मेंरीति-रिवाजों मेंढलती रही……स्त्री बदलती रही! सास-श्वसुर के लिए,देवर-ननद के लिए,नाते-रिश्तेदारों के लिएपति की आदतों को न बदल सकीखुद को बदलती रही! इतनी बदल गयी किखुद को भूल गयी!फिरभी किन्तु परंतुचलता ही रहा,समझाइश भी मिलती-दूसरों को नहीं खुद को बदल लो! शायद थोड़ी सी बच

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save nature

पर्यावरण पर कविता-बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

हिंदी कविता

पर्यावरण पर कविता पर्यावरण खराब हुआ, यह नहिं संयोग।मानव का खुद का ही है, निर्मित ये रोग।। अंधाधुंध विकास नहीं, आया है रास।शुद्ध हवा, जल का इससे, होय रहा ह्रास।। यंत्र-धूम्र विकराल हुआ, छाया चहुँ ओर।बढ़ते जाते वाहन का, फैल रहा शोर।। जनसंख्या विस्फोटक अब, धर ली है रूप।मानव खुद गिरने खातिर, खोद रहा कूप।।

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सूरज पर कविता- आर आर साहू

मन और भावनाएँ

सूरज पर कविता लो हुआ अवतरित सूरज फिर क्षितिज मुस्का रहा।गीत जीवन का हृदय से विश्व मानो गा रहा।। खोल ली हैं खिड़कियाँ,मन की जिन्होंने जागकर, नव-किरण-उपहार उनके पास स्वर्णिम आ रहा। खिल रहे हैं फूल शुभ,सद्भावना के बाग में,और जिसने द्वेष पाला वो चमन मुरझा रहा। चल मुसाफिर तू समय के साथ आलस छोड़ दे,देख

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तन पर कविता-रजनी श्री बेदी

हिंदी कविता

तन पर कविता हर मशीन का कलपुर्जा,मिल जाए तुम्हे बाजार में।नहीं मिलते हैं तन के पुर्जे,हो  चाहे उच्च व्यापार में। नकारात्मक सोचे इंसा तो, सिर भारी हो जाएगा।उपकरणों की किरणों से  , चश्माधारी  हो जाएगा।जीभ के स्वादों के चक्कर में,न डालो पेनक्रियाज को मझधार में।नहीं मिलते हैं तन के पुर्जे,हो चाहे उच्च व्यापार में। तला हुआ जब

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शांतिदूत पर कविता -शांति के दीप जलाते हैं

हिंदी कविता

शांतिदूत पर कविता -शांति के दीप जलाते हैं विश्व पटल पर मानवता के फूल खिलाते हैं,हम हैं शांतिदूत, शांति के दीप जलाते हैं। भेद भाव के भवसागर में,दया भाव भरली गागर में,त्रस्त हृदय को दया कलश से सुधा पिलाते हैं। मानव बन मानव की खातिर, दूर करें अज्ञान का तिमिर,इस वसुधा पर ज्ञान पताका हम फहराते

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हाइकु

हाइकु मंजूषा -पद्ममुख पंडा स्वार्थी

हिंदी कविता

हाइकु मंजूषा 1चल रही हैचुनावी हलचलप्रजा से छल 2 भरोसा टूटाकिसे करें भरोसासबने लूटा 3 शासन तंत्रबदलेगी जनताहक बनता 4 धन लोलूपनेता हो गए सबअब विद्रूप 5 मंडरा रहाभविष्य का खतराचुनौती भरा 6 खल चरित्रजीवन रंगमंचन रहे मित्र 7 प्यासी वसुधाजो शान्त करती हैसबकी क्षुधा 8 नदी बनाओजल संरक्षण कावादा निभाओ 9 गरीब लोगनिहारते गगननोट

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