कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

Jai Sri Ram kavitabahar

चित चोर राम पर कविता / रश्मि

नारी जीवन और संवेदना

चित चोर राम पर कविता / रश्मि चित चोर कहो , न कुछ और कहो। मर्यादा पूरूषोत्तम है । हे सखी !सभी जो मन भायेवो मनभावन अवध किशोर कहो। चित चोर…….. है हाथ धनुष मुखचंद्र छटा, लेने आये सिय हाथ यहां। तारा अहिल्या  को जिसने हे सखि उन चरणों कोमुक्ति का अंतिम छोर कहो। चित चोर…… बाधें न बधें वो बंधन है। देखो वो […]

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आत्महंता का अधिकार -आर आर साहू

हिंदी कविता

आत्महंता का अधिकार जहाँ सत्य भाषण से पड़ जाता संकट में जीवन।वहाँ कठिन है कह पाना कवि की कविता का दर्शन।। गुरु सत्ता पे शासन की सत्ता जब होती हावी।वहाँ जीत जाता अधर्म,धर्म की हानि अवश्यंभावी।। जो दरिद्र है,वही द्रोण की समझ सकेगा पीड़ा।मजबूरी पर क्रूर नियति की व्यंग्यबाण की क्रीड़ा।। राजा हो धृतराष्ट्र,चेतना गांधारी

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आर आर साहू-भावभरे दोहे

नारी जीवन और संवेदना

भावभरे दोहे प्रकृति प्रदत्त शरीर में,नर-नारी का द्वैत।प्रेमावस्था में सदा,है अस्तित्व अद्वैत।। पावन व्रत करते नहीं,कभी किसी को बाध्य।व्रत में आराधक वही, और वही आराध्य ।। परम्पराएँ भी वहाँ,हो जाती निष्प्राण।जहाँ कैद बाजार में,हैं रिश्तों के प्राण।। एक हृदय से साँस ले, प्रियतम-प्रिया पवित्र।श्रद्धा से विश्वास का,दिव्य सुगंधित इत्र।। भाव सोच अवधारणा,होते शब्द प्रतीक।देश काल

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मानवता पर कविता -भुवन बिष्ट

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      मानवता पर कविता पावन मानवता का संगम,           हो नव आशाओं का संचार। नई सोच व नई उमंग से,             मानवता की हो जयकार।।  प्रभु नित नित वंदन करूँ जयकार।।……   प्रेम भाव का दीप जले,              हो हर मन में उजियारा। सारे जग

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मेरा जीवन बना गुल्ली डंडा की परिभाषा-बाँके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

मेरा जीवन बना गुल्ली डंडा की परिभाषा सुबह सवेरे घर से भाग जाना पेड़ की टहनी से गुल्ली डंडा बनाना अमीरी -गरीबी ना छूत अछूत सबके निश्छल हृदय मिल के रहना खाना कितना सुख चैन था ना थी कोई निराशा मेरा जीवन बना गुल्ली डंडा की परिभाषा ।। छोटी सी गुल्ली से घूची बनाना गुल्ली डंडा के खेल में चूक जाना टाँड़

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न आंसू न आहें न कोई गिला है-नीतू ठाकुर

हिंदी कविता

न आंसू न आहें न कोई गिला है न आंसू ,न आहें,न कोई गिला है,लिखा भाग्य में जो वही तो मिला है,पुकारूँ किसे पूछती है हथेली,कभी जो दिया था उसी का सिला है। उजाड़ा गया बाग ऐसे हमारा,कभी जो बना था सभी का सहारा,सता के मुझे मुस्कुराए जमाना,कभी जो खिला ना वही तो खिला है।

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गंगा की गरिमा रखे – मदन सिंह शेखावत

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गंगा की गरिमा रखे गंगा की गरिमा रखे,                  रखना इसका मान।यही पावन पवित्र है,                  विश्व  करे  सम्मान। गंगा  है  भागीरथी,                   करती   है  उद्धार ।मत इसको गन्दा करे,         

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हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी

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हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी हे मितवा मनमीत मेरेहर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगीशब्दों में जो बंध ना पायेऐसे कुछ अरमान लिखूंगी प्रीत के पथ के हम दो राही तेरा नेह बनाकर स्याही अपने अनुरागी जीवन में तुझको अपनी जान लिखूंगी  खुद को खोकर तुझको पायाईश मेरे मै तेरी छायाअपना सबकुछ अर्पण करकेतुझको ही पहचान लिखूंगी जन्मों जनम तुम्हीं

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मैं हूँ पहाड़-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

मैं हूँ पहाड़ मैं हूँ पहाड़तुम्हारे आकर्षण काहूँ केन्द्रशक्ति काविशालता काहूँ परिचायकनदियाँ हैंमेरी सुताजो हैं पराया धनहो जाती हैंमुझसे जुदाहोती हैं बेताब समुद्र से मिलने कोसमुद्र में विलीन होने कोहोती हैंमुझसे जुदानई दुनिया बसाने को -विनोद सिल्ला©कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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जिंदगी पर कविता -सरोज कंवर शेखावत

हिंदी कविता

जिंदगी पर कविता -सरोज कंवर शेखावत जिंदगी ने जिंदगी से ऐसा भी क्या कह दिया,लब तो खामोश थे फिर क्या उसने सुन लिया। वक़्त की बेइमानियां सह ग‌ए हम  चुप खड़े,तूने जब मूंह मोड़ा हमसे हमने जहर है पिया। इस जहां की बंदिशों में हमने जीना सीखा है,दिल फंसा तेरे इश्क में बिन तेरे न

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रत्न चतुर्दश-डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

रत्न चतुर्दश मंदराचल  को  बना  मथनी, रस्सी शेष को।देवदनुज सबने मिल करके,मथा नदीश को।।किया  अथक  प्रयास  सभी ने,रहे वहां डटे।करलिया प्राप्त मधुरामृत जब,सभी तभी हटे।।                     रत्न  चतुर्दश निकले  उससे, जो परिणाम था।सर्वप्रथम था  विष हलाहल, जो ना आम था।।तब पान किया शिव ने उसका,तारा सृष्टि

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अंकिता जैन की कविता

हिंदी कविता

अंकिता जैन की कविता विचित्र दुनिया      ये बड़ी विचित्र दुनिया है,यहाँ, विचित्र राग गाया जाता हैं।अपने घाव रो रो कर दिखाते,और दूसरे के घावो पर,नमक लगाया जाता हैं।ये बड़ी विचित्र दुनिया हैं,यहां विचित्र राग गाया जाता हैं।कभी मजहब पर झगड़े होते,तो कभी जात को मुद्दा बनाया जाता हैं,ये बड़ी विचित्र दुनिया है,यहां विचित्र

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