चित चोर राम पर कविता / रश्मि
नारी जीवन और संवेदनाचित चोर राम पर कविता / रश्मि चित चोर कहो , न कुछ और कहो। मर्यादा पूरूषोत्तम है । हे सखी !सभी जो मन भायेवो मनभावन अवध किशोर कहो। चित चोर…….. है हाथ धनुष मुखचंद्र छटा, लेने आये सिय हाथ यहां। तारा अहिल्या को जिसने हे सखि उन चरणों कोमुक्ति का अंतिम छोर कहो। चित चोर…… बाधें न बधें वो बंधन है। देखो वो […]
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