कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

शहीदों पर कविता-माधवी गणवीर

हिंदी कविता

 शहीदों पर कविता  वतन के लिए कुर्बान होने की बात हैबस अपना फर्ज निभाने की बात है। कोई हमसे पूछे दिलो का जज्बा,हसीन कायनात सजाने की बात है। वतन पे जान लुटाने वालो,देश भक्ति का जज्बा जगाने की बात है। अमन और शान्ति से देश रहेगाहरमो करम खुदा की होने की बात है। हसीन सौगाते […]

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मदन मोहन शर्मा सजल की रचना

हिंदी कविता

मदन मोहन शर्मा सजल द्वारा रचित रचनाएँ अभी बाकी है धीरे चल जिंदगी ज्वलंत सवालों के जवाब अभी बाकी है, जिसने भी तोड़े दिल ऐसे चेहरों से हिसाब अभी बाकी है, अंधियारी गहन रातों में ही बेहिचक संजोए हसीन पल, पूनम की रात और चांद चांदनी का शबाब अभी बाकी है, पीता रहा अश्कों के जाम सूनी

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मां अमृता की कुर्बानी-अरुणा डोगरा शर्मा

हिंदी कविता

मां अमृता की कुर्बानी  याद करो वो कहानी, मां अमृता की कुर्बानी ,काला था वो मंगल ,रोया घना जंगल ।  खेजराली हरियाली, पर्यावरण निराली, सुंदर वृक्षों का घर , रेतीली धरा पर।  वारी हूं मैं बलिहारी, हार गए अहंकारी ,प्राण आहूति देकर ,शिक्षा दी है  न्यारी।। ।।  अरुणा डोगरा शर्मायह घनाक्षरी माता अमृता देवी जी की याद में लिख रही

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बस्तर धाम पर कविता-शशिकला कठोलिया

प्रकृति और पर्यावरण

बस्तर धाम पर कविता उच्च गिरि कानन आच्छादित,    छत्तीसगढ़ का यह भाग, प्रकृति की गोद में बसा ,सुंदर पावन बस्तर धाम । नदियों का कल कल प्रवाह ,कर रही सुंदर दृश्यों की सर्जना,गिराते हराते जलप्रपात ,करते जैसे वारिद गर्जना । सघन विशाल शैल श्रृंखलाएं ,कह रही वनों की व्यथा ,             

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रावण दहन करो

नारी जीवन और संवेदना

रावण दहन करो भीतर के रावण का दमन करो,फिर तुम रावण का दहन करो।पहले राम राज्य का गठन करोफिर तुम रावण का दहन करो। चला लेना तुम बाण को बेशक़,जला देना निष्प्राण को बेशक़।बचा लेना तू विधान को बेशक़,पहले राम का अनुशरण करो।फिर तुम….. पहले राम बनकर दिखलाओ,सबको तुम इंसाफ़ दिलवाओ।पुरुषों में तुम उत्तम कहलाओ,राम

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दर्द के जज़्बात

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के जज़्बात अवाम दिखाती दर्द के जज़्बात, पर हुकूमत क्या समझे ? कही अनकही बात, लोगों का पैसा तो नहीं खैरात! आखिर इन गै़रकानूनी से कब मिलेगी निजात? ग़ुरूर करवा देगीएक दिन इंकलाब से मुलाक़ात, जब करे हुकूमत ही जारी करेगीमनचाहे मनचले फरमान। आम आदमी काना हो नुकसान। ग़लत फैसलों से ना करे परेशान,हुक्मरान न लें सब्र का इम्तिहान ।। -राजशेखरकविता बहार से जुड़ने

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ग़ज़ल – रात भर बैठ कर

हिंदी कविता

ग़ज़ल – रात भर बैठ कर घात काटी गई रात भर बैठ कर ।याद काटी गई रात भर बैठ कर ।। इश्क पर बंदिशें साल दर साल की। म्यांद काटी गई रात भर बैठ कर ।। हिज्र की रात में, आपकी याद में। रात काटी गई रात भर बैठ कर ।। बोलना था हमें बोलना था तुम्हें। बात

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तुम नहीं होती तब – नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

तुम नहीं होती तब चादर के सलवटों मेंबेतरतीब बिखरे कपड़ों मेंउलटे पड़े जूतों मेंकेले और मूंगफली के छिलकों मेंलिखे,अधलिखे और अलिखे मुड़े-तुड़े कागज़ के टुकडों में खुद बिखरा-बिखरा-सा पड़ा होता हूँ मेरे सिरहाने के इर्द-गिर्दएक के बाद एक डायरी,दैनिक अख़बारों,पत्रिकाओं,कविताओं, गजलोंऔर कहानियों की कई पुस्तकेंइकट्ठी हो होकरढेर बन जाती हैं अनगिनत भाव और विचारएक साथ उपजते रहते हैंचिंतन की

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दशहरा पर कविता-शैलेन्द्र कुमार चेलक

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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Jai Sri Ram kavitabahar

रावण दहन पर कविता

हिंदी कविता

दशहरा (विजयादशमी व आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है  रावण दहन पर कविता हम रावण को आज जलाने

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doha sangrah

आर आर साहू के दोहे

हिंदी कविता

आर आर साहू के दोहे कहाँ ढूँढता बावरे,तू ईश्वर को रोज।करनी पहले चाहिए,तुमको अपनी   खोज।। शब्द मात्र संकेत हैं,समझ,सत्य की ओर।सूर्य- चित्र से कब कहाँ,देखा होता भोर।। बस प्रतीक को मानकर,हुई साधना बंद।माया से मिलता रहा,सपने का आनंद।। किसका दर्शन,किसलिए,चला भीड़ के संग।चाह-राह बेमेल है,ये कैसा है ढंग।। मंदिर में घंटी बजे,मन के छिड़े न

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अमित की कुण्डलियाँ

हिंदी कविता

अमित की कुण्डलियाँ माता भव भयहारिणी, करिये हिय भयहीन।*जगजननी जगदंबिका, जीवन कृपा अधीन।जीवन कृपा अधीन, मातु सुत तुम्हीं सम्हारो।विनती बारंबार, व्यथा से हमें उबारो।कहे ‘अमित’ कविराज, आप ही सुख-दुख दाता।सुनिये करुण पुकार, आज ओ मेरी माता। भव्य भवानी भाविनी, भवपाली हैं आप।संकट विकट उबारिए, हरिए मन अभिताप।हरिए मन अभिताप, अगोचर अज अविनाशी।दें वैभव वरदान, सिद्धि

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