कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता

हिंदी कविता

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता तो मैं क्या करूँ ? आज आसमाँ भी रोया मेरे हाल परऔर अश्कों से दामन भिगोता रहा,वो तो पहलू से दिल मेरा लेकर गयेऔर मुड़कर न देखा तो मैं क्या करूँ ? उनकी यादें छमाछम बरसती रहींमन के आंगन को मेरे भिगोती रहींखून बनकर गिरे अश्क रुख़सार पर,कोई पोंछे न

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता Read More »

स्वच्छता पर कुंडलिया

समाज और यथार्थ

स्वच्छता पर कुंडलिया घर घर में अब देश के, मने स्वच्छता पर्व।दूर करें सब गंदगी, खुद पर तब हो गर्व।खुद पर तब हो गर्व, न कोई कोना छोड़ें।बदलें आदत सर्व, समय का अब रुख मोड़ें।नद नालें हो साफ, बहे जल उनमें निर्झर।नया स्वच्छता भाव, पले भारत के हर घर।।1 साफ-सफाई के लिये, चलें नये अभियान।सर्व

स्वच्छता पर कुंडलिया Read More »

प्लास्टिक मिटा देंगे हम

समाज और यथार्थ

प्लास्टिक मिटा देंगे हम दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम. हम तुम सनम चलो खाले कसम |दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम | ये गलता नही मिट्टी मे मिलता नही |खाती गाये पेट उनके पचता नहीं | मरती गायों को मिल बचाएंगे हम |हम तुम सनम चलो खाले कसम | इसके बर्तन बोतल इस्तेमाल न करो

प्लास्टिक मिटा देंगे हम Read More »

मदारी-दिलीप कुमार पाठक “सरस”

हिंदी कविता

“मदारी” बँदरिया प्यारी,        एक मदारी,           लेकर आया|तन लटा,      कपड़े फटे,          पेट धँसा,             फिर भी,            जबर्दस्ती मुस्कराया||जेठ का महीना,         भरी दोपहरी,              चूता पसीना, डमरू बजाकर,         बँदरिया नचाकर,  

मदारी-दिलीप कुमार पाठक “सरस” Read More »

गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

विरह और दर्द, हिंदी कविता

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना

गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी Read More »

हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी

नारी जीवन और संवेदना

हिमा नजर आ रही है हिम्मत तेरे हौसले मेंहिमा नजर आ रही हैदेश के तिरंगे का क्या खूब मान बढ़ा रही है उड़नपरी बन कर क्या खूब दौड़ लगाईचटा के धूल सबकोगोल्ड तू ले आई तेरा कद भी हिमा हिमालय से बडा हैदेश सारा तेरे लियपलके बिछाय खड़ा है बेटियों की हिम्मतनारी का तू मान है देश की उभरती

हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी Read More »

तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है -बाँके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है समझो इस जीवन को ये तो बहती धारा है। प्यार इजहार के लिए वक्त यूँ जाया न कर वक्त के साथ ये तो डूबता किनारा है।। ये जो रंगीन लम्हे लेके जी रहे हो तुमये तो क्षण भर की

तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है -बाँके बिहारी बरबीगहीया Read More »

रास नहीं क्यों आता है-राजकिशोर धिरही

हिंदी कविता

रास नहीं क्यों आता है शौचालय का अभियान चला,वंचित घर रह जाता है।बाहर जाते बच्चे उनके,रास नहीं क्यों आता है जाति भेद को करते रहते,जलते रहते बढ़ने सेटाँग अड़ाते फिरते रहते,रोका करते पढ़ने से चाँद पर जा रही है दुनिया,बैरी के मन काले हैंखुले में शौच करने से ही,हत्या कर डाले हैं रंजिश रखते हैं

रास नहीं क्यों आता है-राजकिशोर धिरही Read More »

आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”

प्रकृति और पर्यावरण

आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे ब्रह्मपुत्र की गोद में,बसा हुआ आसाम। प्रथम किरण रवि की पड़े,वो कामाख्या धाम।।  हरे-हरे बागान से,उन्नति करे प्रदेश। खिला प्रकृति सौंदर्य से,आसामी परिवेश।। धरती शंकरदेव की,लाचित का ये देश। कनकलता की वीरता,ऐसा असम प्रदेश।। ऐरी मूंगा पाट का,होता है उद्योग। सबसे उत्तम चाय का,बना हुआ संयोग।। हरित घने बागान में,कोमल-कोमल

आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप” Read More »

प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र*

हिंदी कविता

प्रीत के रंग में गुनगुनाती हैं हवाएँमहमहाती हैं फ़िजाएँझूम उठता है गगन फिरखुश हुई हैं हर दिशाएँ                  प्रीत के रंग में                  मीत के संग में, रुत बदलती है यहाँ फिरफूल खिल उठते अचानकगीत बसते हैं लबों परमीत मिल जाते

प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र* Read More »

क्या होती है निराशा – धनेश्वर पटेल

हिंदी कविता

क्या होती है निराशा लेती जो छीन जीने की आशापेंचीदा है ,इसकी परिभाषासवालों से घिरे बयां करते चेहरे,बता रहे क्या होती है निराशा।।     खो गई मुस्कान कहीं दूर    किस्मत में नहीं, वो भी मंजूर    आंखो में छाई, काली घटा    आंसू भी बरसने को मजबूर।। टूटे सपनों को फिर जोड़ना चाहूंजो

क्या होती है निराशा – धनेश्वर पटेल Read More »

हाँ ये मेरा आँचल-वर्षा जैन “प्रखर

हिंदी कविता

हाँ ये मेरा आँचल आँचल, हाँ ये मेरा आँचलजब ये घूंघट बन जाता सिर परआदर और सम्मान बड़ों काघर की मर्यादा बन जाता है जब साजन खींचें आँचल मेराप्यार, मनुहार और रिश्तों मेंयही सरलता लाता हैप्यार से जब शर्माती हूँ मैंये मेरा गहना बन जाता है मेरा बच्चा जब लड़ियायेआँचल से मेरे उलझा जाएममता का

हाँ ये मेरा आँचल-वर्षा जैन “प्रखर Read More »

Scroll to Top