कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

पर्यावरण को नुकसान पर कविता

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार

हिंदी कविता

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार ईश्वर की दी हुई धरोहर हम जला रहे हैंलगा के आग पर्यावरण दूषित कर रहे हैंकाटे जा रहे हैं पेड़ जंगलों के,सुखा के इन्सान खुश हो रहा हैआते – जाते मौसम बिगाड़ रहा है हरी- भरी भूमि में निरंतर रसायन मिला रहा हैअपने ही उपजाऊ भूमि […]

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JALATI DHARATI

विश्व प्रदूषित हो रहा /प्रेमचन्द साव “प्रेम”,बसना

हिंदी कविता

विश्व प्रदूषित हो रहा / प्रेमचन्द साव “प्रेम”,बसना विश्व प्रदूषित हो रहा,फैल रहा है रोग।मानव सारे व्यस्त है,करने निज सुख भोग।। प्राणवायु दूषित हुआ,दूषित हर जल बूँद।मानव को चिंता कहाँ ?,बैठा अँखियन मूँद।। ताल तलैया कूप को,मनुज रहे अब पाट।निज स्वारथ के फेर में,वृक्ष रहे हैं काट।। धूल-धुआँ कूड़ा बढ़ा,बढ़ा मनुज का लोभ।फिर जीवन संघर्ष

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shiv God

शिवरात्रि पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

शिवरात्रि पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र अद्वितीय शिव भोले काशी।अदा निराली प्रिय अविनाशी।।रहते सबके अंतर्मन में।बैठे खुश हो नित सज्जन में।। जगह जगह वे घूमा करते।तीन लोक को चूमा करते।।भस्म लगाये वे चलते हैं।शुभ वाचन करते बढ़ते हैं।। परम दिव्य तत्व रघुवर सा।कोई नहीं जगत में ऐसा।।रामेश्वर शंकर का धामा।विश्व प्रसिद्ध स्वयं निज नामा।। बहुत

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woman-day

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना/सुशी सक्सेना

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना/सुशी सक्सेना नारी की गौरव गाथा/सुशी सक्सेना प्रसिद्ध बड़ी है जग में, नारी की गौरव गाथा है। हर रूप में प्यार हमें देती है, ये हमारी माता है। अपनी भारत माता पर, मुझे है अभिमान बहुत शहीदों ने दिए हैं, इसकी रक्षा में बलिदान बहुत माता के पावन चरणों में शीश

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जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

जलती धरती/पूनम त्रिपाठी

हिंदी कविता

जलती धरती/पूनम त्रिपाठी धरती करे पुकार मानव सेमुझे न छेड़ो तुम इंसानबढ़ता जाता ताप हमाराक्यों काटते पेड़ हमारापेड़ काट रहा तू इंसानजलती धरती सूखे नलकूपसूरज भी आग बरसाएबादल भी न पानी लायेमत उजाड़ो मेरा संसारधरती का बस यही पुकारमै रूठी तो जग रूठेंगामेरे सब्र का बांध टूटेगाभूकंप बाढ़ क़ो सहना पड़ेगासुंदर बाग बगीचे मेरेहे मानव

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woman-day

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना / डॉ0 रामबली मिश्र वाराणसी।

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना / डॉ0 रामबली मिश्र वाराणसी नारी को जो शक्ति समझता।उसको सबसे ऊपर रखता।।इक नारी में सकल नारियां।भले विवाहित या कुमारियां।। प्रबल दिव्य भाव का सूचक।सारी जगती का संपोषक।।नारी श्रद्धा भव्य स्रोत है।मूल्यवान गतिमान पोत है।। नारी में प्रिय मधुर भावना।अनुपम श्रेष्ठा सभ्य कामना।।सदा काम्य रस शीतल छाया।परम विराट देव सम

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JALATI DHARATI

जलती धरती/श्रीमती शशि मित्तल “अमर”

हिंदी कविता

जलती धरती/श्रीमती शशि मित्तल “अमर” आओ कुछ कर लें प्रयासधरती माँ को बचाना है,दूसरों से नहीं रखें आसस्वयं कदम बढ़ाना है,देख नेक कार्य सब आएं पाससबमें चेतना जगाना है। ईंट कंक्रीट का बिछा कर जालवनों को कर दिया हलालअपनी धरा को बहुत रुलाया है,हजारों पंछियों का था जो बसेराकाट नीड़ उनका उजाड़ा है। कहां से

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जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

प्रकृति और पर्यावरण

जलती धरती /डॉ0 रामबली मिश्र सूर्य उगलता है अंगारा।जलता सारा जग नित न्यारा।।तपिश बहुत बढ़ गयी आज है।प्रकृति दुखी अतिशय नराज है।। मानव हुआ आज अन्यायी।नहीं रहा अब वह है न्यायी।।जंगल का हत्यारा मानव।शोषणकारी अब है दानव।। नदियों के प्रवाह को रोका।पर्वत की गरिमा को टोका।।विकृत किया प्रकृति की रचना।नित असंतुलित अधिसंरचना।। ओजोन परत फटा

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वेतन पर कविता / स्वपन बोस “बेगाना”

हिंदी कविता

वेतन पर कविता कर्म करों फल मिलेगा मेहनत तो महिना भर हों गया, फिर वेतन कब मिलेगा ।सूनों सहाब डालोगे वेतन,समय पर तभी तो फिर कर्म का सुंदर फूल खिलेगा। सूनों सहाब हम कर्मचारियों की कहानी, हमें बस एक तारीख अच्छा लगता है। क्यों की लगभग इसी दिन तक वेतन डलता है, फिर दो पांच

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पतझड़ और बहार/ राजकुमार 'मसखरे'

पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’

हिंदी कविता

पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’ ये  घुप अंधेरी  रातों मेंधरा को  जगमग करने दीवाली आती जो जगमगाती ! सूखते,झरते पतझड़ मेंशुष्क  जीवन  को रंगनेवो होली में राग बसंती गाती  ! झंझावत, सैलाब लिएजब  पावस दे दस्तक,तब फुहारें मंद-मंद मुस्काती ! कुदरत हमें सिखाता हैबिना कसक व टीस केवो ख़ुशी समझ नही आता है ! जो

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Hindi Poem Collection on Kavita Bahar

जलती धरती /रितु झा वत्स

प्रकृति और पर्यावरण

“जलती धरती” नामक कविता, जिसे रितु झा वत्स द्वारा रचा गया है, एक व्यक्तिगत अनुभव को अभिव्यक्ति देती है। इस कविता में, रचनाकार ने जलती धरती के माध्यम से मानव जीवन के अनेक पहलुओं को व्यक्त किया है। धरती की गर्मी, उसकी आत्मा को दहला देती है, जो हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती

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पर्यावरण की रक्षा

जलती धरती/ आशा बैजल

प्रकृति और पर्यावरण

आशा बैजल की जलती धरती नामक हिंदी कविता में विभिन्न भावनाओं और संवेदनाओं को समाहित है। “जलती धरती” एक कविता है जो धरती की संताप और विपदाओं को बयान करती है। “जलती धरती” में, कविताकार धरती के विभिन्न प्राकृतिक विपदाओं की चर्चा करते हैं, जैसे कि वन जलन, भूकंप, बाढ़, और वायु प्रदूषण। यह कविता

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