कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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आत्म निर्भर भारत/हरि प्रकाश गुप्ता, सरल 

हिंदी कविता

आत्म निर्भर भारत/हरि प्रकाश गुप्ता, सरल  आओ मिलकर एक साथ सब ये सौगंध खायें। अपने भारत को हम आत्म निर्भर बनायें।। किसी चीज की कमी न हो हर चीज भारत में बनायें। खेती, वैज्ञानिक, औद्योगिक क्षेत्र, हर क्षेत्र में आगे आयें।। चीन से भी सबक सीख  हम सबसे आगे आयें। सुई से लेकर हवाई जहाज, […]

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विश्व कविता दिवस

विश्व कविता दिवस/मंजूषा दुग्गल

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

आओ विश्व कविता दिवस मनाएँ/मंजूषा दुग्गल मन के कोमल भावों कोकोरे काग़ज़ पर सजाएँप्रेम, इंतज़ार,ग़म के पलों कोचला लेखनी लफ़्ज़ों में व्यक्त कर जाएँनमन करें सभी काव्य साधकों कोश्रद्धा में उनकी मस्तक झुकाएँमहादेवी सी सहनशीलता ले आएँनिराला के प्रकृति प्रेम में खो जाएँदिनकर की राष्ट्र भक्ति से ओजपूर्ण होजयशंकर की स्पष्टवादिता अपनाएँराहे कदम पर इनके

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विश्व कविता दिवस

कवि और कविता/सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

कवि और कविता/ सुशी सक्सेना कवि देह है तो उसके प्रान है, कविता।कवियों के सपनों की जान है, कविता। भोर की पहली किरण सा कवि,तो उसका उजाला है, कविता,मस्त मतवाला मयनशीं कवि,उसकी मधुशाला है कविता।कवि धरा गगन सा तो,दोनों के मिलन का स्थान है, कविता। चंचल चपल हिरन सा कवि,कविता उसकी कस्तूरी है,एक दूसरे के

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विश्व कविता दिवस

विश्व कविता दिवस/डॉ0 रामबली मिश्र

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

विश्व कविता दिवस/डॉ0 रामबली मिश्र प्रति पल कविता दिवस मनाता।हिन्दी में लिखना सिखलाता।।मन मन्दिर में ध्यान लगाता।सबको उत्तम राह दिखाता।। अंतर्मन के भाव गमकते।शब्दों के आह्लाद चहकते।।अर्थ बताते सत्य पंथ गह।स्नेह परस्पर का मतलब कह।। कविता लिख कर मन बहलाता।जीवन को खुशहाल बनाता।।लेखन ही सत्कर्म धर्म है।जीवन का य़ह शिष्ट मर्म है।। हिन्दी में जो

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पर्यावरण दिवस पर कविता

पर्यावरण दिवस पर कविता /मंजूषा दुग्गल

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

पर्यावरण दिवस पर कविता/मंजूषा दुग्गल जलाकर पेड़-पौधे वीरान धरती को बना रहे हैं  इतनी सुंदर सृष्टि का भयावह मंजर बना रहे हैं  काटकर जंगल पशु-पक्षियों को बेघर बना रहे हैं  कर बेइंतहा अत्याचार हम दिवस पर्यावरण मना रहे हैं । वैज्ञानिक उन्नति की राह पर हम कदम बढ़ा रहे हैं चाँद पर भी अब देखो

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पर्यावरण की रक्षा

पर्यावरण की रक्षा/कामरान

हिंदी कविता

पर्यावरण की रक्षा/कामरान दूषित है पूरा संसारआया मन में है विचारप्लास्टिक का करें बहिष्कारदेखेगा अब पूरा संसारपेट्रोलियम का करे कम उपयोगबंद करें सारे उद्योगअपने नाम से एक पेड़ लगाओजीवन में कुछ अच्छा कर जाओहम करें पर्यावरण की रक्षावह करेगा हमारी सुरक्षाआओ मिलकर पर्यावरण बचाएंजीवन को खुशहाल बनाएं।

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दौलत पर कविता

दौलत पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

दौलत पर कविता /रामबली मिश्र दौलत जिसके पास है, उसे चाहिए और।और और की चाह में,कभी न पाता ठौर ।। दौलत ऐसी भूख है,भरे न जिससे पेट।दौलत करे मनुष्य का,रातोदिन आखेट।। दौलत के पीछे सदा,भाग रहा इंसान।मृग मरीचिका सी बनी,मार रही है जान।। यदि दौलत संतोष की, जीवन है आसान।थोड़े में भी पूर्ण हों,जीवन के

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नन्हा मुन्ना राही हूँ देश का सिपाही हूँ बाल गीत

देशभक्ति, हिंदी कविता

“नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ” यह एक प्रसिद्ध हिंदी बाल गीत है जो बच्चों के बीच प्रसिद्ध है। यह गीत देशभक्ति की भावना को उत्तेजित करता है और बच्चों को अपने देश के प्रति प्रेरित करता है। नन्हा मुन्ना इस गीत में एक बच्चे को संदेश देता है कि वह अपने देश

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tree

वृक्ष लगाएं धरती बचाएं/ नीलम त्यागी ‘नील’

प्रकृति और पर्यावरण

“वृक्ष लगाएं, धरती बचाएं” एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि हमें पर्यावरण की संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का समर्थन करना चाहिए। वृक्ष लगाना हमारे पर्यावरण के सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि वृक्ष प्राकृतिक रूप से हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वायु में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, और पर्यावरण के साथ हमारे

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struggle

प्रेरक कविता/ डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

“बिना संघर्ष कुछ नहीं मिलता” हमें बताती है कि हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास करना और संघर्ष करना होता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उन्हें पार करने के लिए हमें मेहनत, संघर्ष, और साहस की आवश्यकता होती है।

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पर्यावरण को नुकसान पर कविता

पर्यावरण को नुकसान पर कविता /एस के कपूर श्री हंस

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण को नुकसान पर कविता /एस के कपूर श्री हंस 1 नदी ताल में कम हो  रहा जल  हम पानी यूँ ही बहा रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहेऔर समुन्द्र तल यूँ बढ़ते ही जा रहे हैं।। काट    सारे वन कंक्रीट के कई जंगल बसा दिये विकास ने। अनायस विनाश की ओर कदम दुनिया के

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सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र

नारी जीवन और संवेदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र दिव्य मधुर रस देनेवाली।कष्ट क्लेश को हरनेवाली।।चेतन सत्ता ज्ञानामृत हो।बनी लेखिका सत शुभ कृत हो।। अंतर्दृष्टि सहज देती हो।मिथ्या भ्रम को हर लेती हो।।सत्कर्मों की शिक्षा देती।प्रेम पंथ की दीक्षा देती।। क्षिति जल पावक गगन समीरा।सबमें रहती बनी सुधीरा।।परम विज्ञ ब्रह्माणी तुम हो।कला प्रवीण भव्य प्रिय तुम हो।। वरप्रदा नित कामरूप

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