कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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लोकतंत्र का पर्व / आशीष कुमार

हिंदी कविता

लोकतंत्र का पर्व / आशीष कुमार लोकतंत्र का पर्व पावन परम हैमतदान हमारा पुनीत करम हैबज चुका है चुनावी बिगुलपक्ष-विपक्ष सबका मामला गरम है कोई कट्टरपंथी चरम हैकोई दिखाता खुद को नरम हैटर्र टरा रहे चुनावी मेंढकहर जगह मामला गरम है किसी का सब कुछ सिर्फ धरम हैकोई बूझे सिर्फ जात-पात का मरम हैसब कुछ […]

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mahatma gandhi

गांँधीजी का ज्ञान

हिंदी कविता,

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।

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beti

बिटिया के मुखड़े पर धवल मुस्कान

हिंदी कविता

बिटिया के मुखड़े पर धवल मुस्कान मनुजता शूचिता शुभता,खुशियों की पहचान होती है।जहाँ बिटिया के मुखड़े पर,धवल मुस्कान होती है।इसी बिटिया से ही खुशियाँ,सतत उत्थान होती है।जहाँ बिटिया के मुखड़े,पर धवल मुस्कान होती है। सदन में हर्ष था उस दिन,सुता जिस दिन पधारी थी।दिया जिसने पिता का नाम,यह बिटिया दुलारी थी।महा लक्ष्मी यही बेटी,यही वात्सल्य

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beti

आज बेटी किसी की बहू

हिंदी कविता

आज बेटी किसी की बहू गीत – उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट दर्द को जो समझते नहीं हैं कभी, बेटियों से किसी की करें हाय छल।क्यों बहू को यहाँ नौकरानी समझ, जुल्म ढाने लगे लोग हैं आजकल।। आज बेटी किसी की बने जब बहू, क्यों समझते नहीं लोग मजबूरियाँ।बढ़ रही खूब हिंसा घरेलू यहाँ, प्यार के नाम

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mother their kids

माँ पर कविता हिंदी में

समाज और यथार्थ

यहाँ माँ पर कविता हिंदी में लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ मुझको गर्भ में ले ले हे ! माँ मुझको गर्भ में ले ले,बाहर मुझको डर लागे।देह-लुटेरे ,

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विश्व पृथ्वी दिवस / देवेन्द्र चरन खरे आलोक

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

विश्व पृथ्वी दिवस / देवेन्द्र चरन खरे आलोक पृथ्वी हमें पैदा करती है।भूख उदर की भी हरती है।।जो कुछ भी उत्पन्न हुआ है।सब इसकी ही रही दुआ है।। गोदी में हम सब खेले हैं।खुशियों के लगते मेले हैं।।जल जंगल पर्वत मालाएँ।गीत इसी के मधुरिम गाएँ।। सबको शिक्षा भी देती है। यह परिवर्तन की  प्रेरक भी।पुण्य पाप

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dr bhimrao ambedkar

महान जननायक / अकिल खान.

समाज और यथार्थ

महान जननायक / अकिल खान 14 अप्रैल सन1891में जन्म लिए,जननायक.नाम था भीमराव,कर्म से कह लाए महानायक।बचपन में,विद्यालय के बाहर अर्जित किए ज्ञान, मजलूमो का जब विलुप्त हो चुका था,पहचान। बालपन से मन में यह महान कार्य,ठान लिए,समाज सुधार कार्य को,अपने संज्ञान में लिए। न पूछो कैसे थे दिन? कैसी थी उनकी कहानी, भेदभाव के चलते,मुश्किल

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श्रीरामनवमी पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

श्रीरामनवमी पर कविता: चैत्र मास के शुल्क पक्ष की नवमी तिथि के दिन ही सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने धरती पर श्री राम के रूप में जन्म लिया था। राम लला के जन्म की पवित्र बेला को ही राम नवमी के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु अयोध्या के राजा दशरथ

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13 अप्रैल जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस पर हिंदी कविता

13 अप्रैल जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस पर हिंदी कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

13 अप्रैल जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस पर हिंदी कविता यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते,काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से,वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग सा बना पड़ा है,हा! यह प्यारा बाग खून से सना पड़ा है। ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु

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बस कर भगवन / शिवराज सिंह चौहान

हिंदी कविता

बस कर भगवन / शिवराज सिंह चौहान *लापरवाही इक बड़ी,*                           *बनकर आई काल।**पल में प्रलय हो गई,*                          *छीने बाल गोपाल।।* लाड प्यार तैयार कर,                               देकर बस्ता, भोज। दादा दादी मात पिता,                                 करते टाटा रोज।।किसको क्या ये था पता,                          है आज कोई जंजाल … ड्राइवर ने था किया नशा,                          या थी गति

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विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर एक कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

इस कविता के माध्यम से हम सभी विश्व रंगमंच दिवस के महत्व को समझते हैं और इस उत्सव के महत्व को मनाते हैं, जो संस्कृति, कला, और समाज को एकसाथ लाता है। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर यहाँ एक कविता प्रस्तुत की जा रही है: विश्व रंगमंच के दीप सजाएं,गीत नृत्य से दिल बहलाएं।प्रतिभाओं

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holi

होली में धूम मचायेंगे /डॉ रामबली मिश्र

हिंदी कविता

होली में धूम मचायेंगे /डॉ0 रामबली मिश्र  होली में धूम मचायेंगे,होली में। नित रंग डाल नहलायेंगे,होली में।। स्वागत होगा पिचकारी से। हँसी ठिठोली दिलदारी से।। मुँह में सबके रंग लगेगा। सबका मुखड़ा खूब खिलेगा।। होली में रस बरसायेंगेगे,होली में। भय भूत बने डरवायेंगे,होली में।। द्वार द्वार पर रंग गिरेगा। लाल गुलाबी सकल दिखेगा।। हर कोई

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