अंतरतम पीड़ा जागी
हिंदी कविताअंतरतम पीड़ा जागी खोया स्वत्व दिवा ने अपनाअंतरतम पीड़ा जागीघूँघट हैं छुपाये तब तब हीधडकन में व्रीडा जागी । अधर कपोल अबीर भरे सेसस्मित हास् लुटाती सीसतरंगी सी चुनर ओढ़ेद्वन्द विरोध मिटाती सीथाम हाथ साजन के कर मेंसकुचाती अलबेली सीसिहर ठिठक जब पॉव बढ़ातो ठाड़ी रही नवेली सी आई मन मे छायी तन मेंसकुच ठिठक […]
