मेरी पलकें नमाज़ी हुई
हिंदी कवितामेरी पलकें नमाज़ी हुई मेरी पलकें नमाज़ी हुई तेरे दीदार सेनूर बरसता है यूँ पाक़ तेरे रुख़सार से ।मुजस्सिम ग़ज़ल हो मेरी, उम्र की ताजमहल काबेयक़ीन हुआ नहीं मैं इश्क़ में ऐतबार से ।गोया कि तुम मेरे हाथ की लकीर हो या रबहाथ होता नहीं तो क्या होता जाँ निसार से ।मसरूफ़ियत में भी हमने
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