कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

JALATI DHARATI

जलती धरती/ रितु झा वत्स

प्रकृति और पर्यावरण

जलती धरती/ रितु झा वत्स विशुद्ध वातावारण हर ओरमची त्रास जलती धरती धूमिल आकाश पेड़ पौधे की क्षति होरही दिन रात धरती की तपिश कर रही पुकार ना जानेकब बरसेगी शीतल बयार प्लास्टिक की उपयोग हो रही लगातार दूषित हो रही हर कोना बदहाल जलती धरती सह रही प्रहारसूख रही कुंवा पोखर तालाब बूंद भर पानी […]

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ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार

हिंदी कविता

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार ईश्वर की दी हुई धरोहर हम जला रहे हैंलगा के आग पर्यावरण दूषित कर रहे हैंकाटे जा रहे हैं पेड़ जंगलों के,सुखा के इन्सान खुश हो रहा हैआते – जाते मौसम बिगाड़ रहा है हरी- भरी भूमि में निरंतर रसायन मिला रहा हैअपने ही उपजाऊ भूमि

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जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

दिवस पर्यावरण मना रहे हैं/मंजूषा दुग्गल

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

दिवस पर्यावरण मना रहे हैं/मंजूषा दुग्गल जलाकर पेड़-पौधे वीरान धरती को बना रहे हैंइतनी सुंदर सृष्टि का भयावह मंजर बना रहे हैंकाटकर जंगल पशु-पक्षियों को बेघर बना रहे हैंकर बेइंतहा अत्याचार हम दिवस पर्यावरण मना रहे हैं । वैज्ञानिक उन्नति की राह पर हम कदम बढ़ा रहे हैंचाँद पर भी अब देखो वर्चस्व अपना जमा

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धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे

प्रकृति और पर्यावरण

धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे जलती धरती तपन ज्वलनक्रोधाग्नि सा ज्वाला।नशा पान में चुर हो बनते पाखंडी है मतवाला।। काट वृक्ष धरा किन्ह नगनधरती जलती , तु हो मगनवाह रे मानव,खो मानवताक्या सृष्टि का है यही लगन।। जरा सोचो,कुछ कर रहमना कीजिए प्रकृति दमनतेरा प्राण बसा है वहींधरती पवन और गगन।। कैसा मानव

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kavita bahar

एक आईएसबीएन नंबर प्राप्त करें

हिंदी कविता

एक आईएसबीएन नंबर प्राप्त करें यदि आप कोई किताब लिखने की योजना बना रहे हैं या पहले ही लिख चुके हैं, तो आपको उसके लिए आईएसबीएन की आवश्यकता होगी। दो परिदृश्य हैं- यदि आप चाहते हैं कि आपका प्रकाशन कविता बहार से करे, तो हम इसे उचित कीमत पर करवा सकते है, लेकिन यदि आप

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19 फरवरी छत्रपति शिवाजी जयन्ती पर कविता

हिंदी कविता

शिवाजी महाराज ने 16वीं शताब्दी में डक्कन राज्यों को एक स्वतंत्र मराठा राज्य बनाया था। उन्होंने पहले हिंदू साम्राज्य की स्थापना की थी। शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को हुआ था. पुष्पों की सुंदर मालाएँ o आचार्य मायाराम ‘पतंग’ पुष्पों की सुंदर मालाएँ,बेशक मंचों पर पहनाएँ, बिना तपस्या, त्याग, समर्पण।वीरों का सम्मान न होगा ।

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प्रलय / रमेश कुमार सोनी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

प्रलय / रमेश कुमार सोनी दिख ही जाता है प्रलय ज़िंदगी मेंदुर्घटना में पूरे परिवार के उजड़ जाने से,बाढ़,सूनामी,चक्रवात से औरकिसी सदस्य के घर नहीं लौटने सेप्रलय की आँखों में ऑंखें डालकरकौन कहेगा कि नहीं डरता तुझसे। आख़िरी क्षण होगा जब हम नहीं होंगेचिंता,फिक्र और तमाम सोच केउस पार होगी तो सिर्फ चिरनिद्राना भूख होगी

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रोटी / विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

रोटी सांसरिक सत्य तोयह है किरोटी होती हैअनाज कीलेकिन भारत में रोटीनहीं होती अनाज कीयहाँ होती हैअगड़ों की रोटीपिछड़ों की रोटीअछूतों की रोटीफलां की रोटीफलां की रोटीऔर हांयहाँ परनहीं खाई जातीएक-दूसरे की रोटी। -विनोद सिल्ला

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दिल एक मंदिर / पद्म मुख पंडा

हिंदी कविता

दिल एक मंदिर मंदिरों में, अगर, भगवान रहा होताहर कोई भक्त, बहुत धनवान, रहा होता! गरीबी में, जिंदगी, यूँ नहीं गुजरती,मजे में, हर कोई इन्सान ,रहा होता! सच्चाई की, न उड़ती ,यूँ धज्जियां,झूठ से, न कोई भी, परेशान रहा होता! न्याय, न गिडगिडाता ,कभी न्यायालय में,शिकंजे में, हर कोई, बेईमान रहा होता! सदाचारी को ,न

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छत्तीसगढ़ कविता

छेरछेरा / राजकुमार ‘मसखरे’

हिंदी कविता

छेरछेरा / राजकुमार ‘मसखरे’ छेरिक छेरा छेर मरकनिन छेरछेरामाई कोठी के धान ल हेर हेरा. आगे पुस पुन्नी जेखर रिहिस हे बड़ अगोराअन्नदान के हवै तिहार,करे हन संगी जोरा…छेरछेराय बर हम सब जाबोधर के लाबो जी भर के बोरा…..! आजा चैतू,आजा जेठू आ जा ओ मनटोराजम्मों जाबो,मजा पाबो,चलौ बनाथन घेरा……छत्तीसगढ़ हे धान के सीघये हमर

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Happy Republic day

गणतंत्र दिवस अमर रहे / डॉ मनोरमा चंद्रा ‘ रमा ‘

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

गणतंत्र दिवस अमर रहे,सब के मुख में नारा है।मातृभूमि पर शीश नवा लें,हिंदुस्तान हमारा है।। धरती से अंबर है पुलकित, वीरों के योगदान से। कदम-कदम पर हुए न्यौछावर, अपने शौर्य अभिमान से।। हुआ लागू संविधान जब,स्वप्न हुआ साकार है।महापुरुषों के प्रयास से,मिला निज अधिकार है।। वीर शहादत दे चले, अपने वतन के आन में। विजय

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छत्तीसगढ़ कविता

नोहर होगे / डॉ विजय कन्नौजे

हिंदी कविता

नोहर होगे / डॉ विजय कन्नौजे नोहर होगे बटकी मा बासीबारा में राहय नुन।तिवरा के बटकर, बेलि नारके राहय सुघ्घर मुंग।। तिवरा नि बाचिस संगीगरवा के चरई मा।नेवता हावय तुमन लामोर गांव के मड़ई मा।। घातेच सुघ्घर लागथेमोर गांव के मड़ई।अड़बड़ मजा आथे संगीराऊत‌ मन के लड़ई। दोहा पारथे लाठी चालथेझुमर झुमर के नाच।जुरमिल के

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