भोर का दिनकर
हिंदी कविता” भोर का दिनकर “ पश्चिम के सूर्य की तरहदुनियाँ भी ….मुझे झूठी लगीमानवता काएक भी पदचिन्हअब तो दिखाई नहीं देताजागती आँखों केसपनों की तरहअन्तःस्थल कीभावनाएँ भीखण्डित होती हैंतब ..जीवन काकोई मधुर गानसुनाई नहीं देताफिर भी ….सफेदपोश चेहरों कोबेनकाब करते हुएएक नई उम्मीद कादमखम भरते हुएसुनहले फसलों कोप्राणदान देते हुएइस विश्वरूपी भुवन की ओरधीमे कदमों […]

