कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

भोर का दिनकर

हिंदी कविता

” भोर का दिनकर “ पश्चिम के सूर्य की तरहदुनियाँ भी ….मुझे झूठी लगीमानवता काएक भी पदचिन्हअब तो दिखाई नहीं देताजागती आँखों केसपनों की तरहअन्तःस्थल कीभावनाएँ भीखण्डित होती हैंतब ..जीवन काकोई मधुर गानसुनाई नहीं देताफिर भी ….सफेदपोश चेहरों कोबेनकाब करते हुएएक नई उम्मीद कादमखम भरते हुएसुनहले फसलों कोप्राणदान देते हुएइस विश्वरूपी भुवन की ओरधीमे कदमों […]

भोर का दिनकर Read More »

लकड़ियों पर कविता

हिंदी कविता

लकड़ियों पर कविता              चिता की लकड़ियाँ,ठहाके लगा रही थीं,शक्तिशाली मानव को,निःशब्द जला रही थीं!मैं सिसकती रही,जब तू सताता था,कुल्हाड़ी लिए हाथ में,ताकत पर इतराता था!भूल जाता बचपन में,खिलौना बन रिझाती रही,थक जाता जब खेलकर,पालने में झुलाती रही!देख समय का चक्र,कैसे बदलता है,जो जलाता है वो,कभी खुद जलता है!मेरी चेतावनी है,अब मुझे पलने दे,पुष्पित,पल्लवित,होकर फलने

लकड़ियों पर कविता Read More »

बोल रहे पाषाण

हिंदी कविता

बोल रहे पाषाण बोल रहे पाषाण अबव्यक्ति खड़ा मौन है,छोड़ा खुद को तराशनापत्थरों पर ही जोर है।कभी घर की दीवारेंकभी आँगन-गलियारे,रखना खुद को सजाकररंग -रौगन का दौर है।घर के महंगे शो पीसबुलाते चारों ओर हैं  ,मनुज को समय नहींअब चुप्पी का दौर है।दिखावे की है दुनियाकलाकारी सब ओर है,असली चेहरा छुपा लेनाअब मुखौटों का दौर

बोल रहे पाषाण Read More »

आया बसंत

हिंदी कविता

“आया बसंत” नव पल्लव नव रंग लिए,नव नवल पुष्प का गंध लिए।सरसों की पीली चुनरी ओढ़े, टेशू के सुन्दर रंग लिए। खेतों और खलिहानों में, बागों और कछारों में। जंगल और पहाड़ों में, रंग बसंती संग लिए। उलट-पुलट चल रही बयारें, दिशा दिशा सब झूम रहे।नव चेतन का गुँजार लिए, चहुंओर निराली सी लगती।नभ में उज्जवल

आया बसंत Read More »

doha sangrah

दोहा सप्तक

हिंदी कविता

दोहा सप्तक                          *जो तू तोड़े फूल को , किया बड़ा क्या काम ।फूलों को  मुरदा  करे , खुश हो  कैसे  राम ।।                         *जीवन  के सौन्दर्य से , जब  होगी पहचान ।पायेगा  तब ही  मजा , सचमुच  में इंसान ।।        .                 *समय लगे न चित्र रचे , झटपट रचना होय ।एक चरित्र  निर्माण में ,

दोहा सप्तक Read More »

जिन्दगी पर कविता

हिंदी कविता

जिन्दगी पर कविता जिन्दगी तो प्रेम की एक गाथा है,जिन्दगी भावुक प्रणय की छाँव है,जिन्दगी है वेदना की वीथिका सीजिन्दगी तो कल्पना की छुवन भर है। जिन्दगी है चन्द सपनों की कहानी,जिन्दगी विश्वास के प्रति सावधानी,जिन्दगी इतिहास है निर्मम् समय का जिन्दगी तो आँसुओं की राजधानी। जिन्दगी तो लहलहाती फसल सी हैजिन्दगी कल्पनाओं के सुनहरे

जिन्दगी पर कविता Read More »

मिला जो आशियाना

हिंदी कविता

मिला जो आशियाना मिला जो आशियानावह सर्द रातों में ठिठुरताआसरा ढूंढता पेड़ो के नीचेपेड़ भी तो टपक रहे हैंचीथड़े खोजता अपने लिएजिससे ढक सकेकम्पित बदन कोमसृण पात…बैरी बनेएक बूंद ….एक शीतल बूंदसिहरन पैदा करती अंतर तकश्वान से सटकरहल्की गर्माहट महसूस करताघुटने भी सिकुड़कर ,छू रहे चिबुक कोसांसो की भाप से तपाता,हस्त,नेत्रों कोनींद तो कहाँ?गुजर जाये

मिला जो आशियाना Read More »

मुरली पर कविता

Uncategorized

मुरली पर कविता मुरली रे मुरली तूने ऐसा कौन सा काम किया है ।खुस होकर कान्हा ने तुझे अधरों पे थाम लिया  है।मुरली  बोलो न  मुरली बोलो नतेरी  किस्मत सबसे निराली कान्हा ने अपनाया ।कान्हा के अधरों पे सजी है कोई  समझ न पाया ।कान्हा की प्यारी हो——-कान्हा की प्यारी बन कर तूने जग में 

मुरली पर कविता Read More »

विजय पर कविता

हिंदी कविता

विजय पर कविता जिस जीवन में संघर्ष न होविजय उसे नहीं मिल सकतीतेजस्वी वीर पुरुष के आगेअरिसेना नहीं टिक सकती।ललकार दो शत्रु को ऐसी तुमपर्वत का सीना टकराएसाहस हृदय में प्रबल रखोरिपु का मस्तक भी झुक जाए।सरहद पर दुश्मन बार-बारमाँ को आहत कर जाते हैंदुश्मन की ईंट बजाकर लालविजय पताका फहराते हैं।नित जूझते हैं संघर्षों

विजय पर कविता Read More »

विश्वास अपेक्षा महत्व पर कविता

हिंदी कविता

विश्वास अपेक्षा महत्व पर कविता १.विश्वास सफल रिश्ते का साँस है विश्वासविश्वास की नींव परसंसार टिका है साहबकर विश्वास हर शख्स पर,पर खुद से ज्यादान करो कभी किसी पर विश्वास। २.अपेक्षा अपेक्षा रखते हैं बहुत हमकितने लोगों से किस हद तकअपेक्षाएं रिश्तों को बाँधती हैंपर जरुरत से ज्यादान रखो किसी से अपेक्षा। ३.महत्व तुच्छ से

विश्वास अपेक्षा महत्व पर कविता Read More »

आया है मधुमास- कुण्डलियाँ

हिंदी कविता

आया है मधुमास *भँवरे गुंजन कर रहे, आया है मधुमास।**उपवन की शोभा बनें, टेसू और पलाश।**टेसू और पलाश, संग में चंपा बेला।**गेंदा और गुलाब, सजा रंगों का मेला।**फुलवारी अरु बाग, बसंती रँग में सँवरे।**पी कर नव मकरंद, गुँजाते बगिया भँवरे।।1* *पी कर जब मकरंद को, भ्रमर बैठते फूल।**वह पराग को  छोड़ते, मौसम के अनुकूल।**मौसम के

आया है मधुमास- कुण्डलियाँ Read More »

भँवरा

हिंदी कविता

भँवरा मधु का अभिलाषी भँवराकरे मधुऋतु का इंतजारभर गई नव मुकुल गागरीचहुँ ओर चली है मंद बयार।पुष्प-पुष्प पर भ्रमर मंडराएगीत नव मिलन गुनगुनाएमकरंद भरी मंजरी हृदय परचिरंतन सुख मधुप को भाए।यौवन छा गया कुसुमों परमहकी कोंपल पुष्पों की डालीरसपान करे  मदमत्त हो भंवराकोकिल हो उठी है मतवाली।चिरप्रतीक्षित मकरंद पिपासातृप्त भ्रमर नवजीवन पायामधुरस के असीम आनंद

भँवरा Read More »

Scroll to Top