चाहत को तुम पलकों में छुपाया न करो
हिंदी कविताचाहत को तुम पलकों में छुपाया न करो सुनो न सुनो न ऐसे तड़पाया न करोपास बुला के दूर को हटाया न करोआख़िर इतना क्यों इतराते रहते होकितनी बार कहा है भाव खाया न करो गैरों से हंस हंस के तुम क्यों बातें करते होइस तरह से मुझको तुम जलाया न करोकभी कभी चलता है […]
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