कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

पिया जी देखो वसंत आ गया

प्रकृति और पर्यावरण

पिया जी देखो वसंत आ गया पेड़ो के झुरमुट से आतीकोयल की मीठी बोलीफूलों की हर कली पर देखोमतवाले भवरों की टोलीआम वृक्ष मंजरी व टिकोरो से लदबद गया ।पिया जी देखो वसंत आ गया ।। बेल वृक्ष पर आये नए फूलपौधो की अनुपम हरियालीनव पल्लव का पालना डालेप्रकृति नभी लाई खुशहालीटेसू के दहकते फूल […]

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एक कविता हूँ

हिंदी कविता

एक कविता हूँ! उंगलियों में कलम थामेसोचता हूँ…कि कहींहै वह ध्वनिजो उसे ध्वनित करे…!मैं अंतरिक्ष में तैरता..कल्पनाओं मेंछांटता हूँशब्दमीठे -मीठेकोई शब्द मिलता नहीं मुझेजो इंगित करे उसेबस….उंगलियों से ही उसे –उकेरता हूँ …मिटाता हूँ ।उंगलियों में कलम थामे…मैं सोचता हूँ ।।उसकी खूबसूरतीवो भोलापनतो मुझपे क़यामत ढाईन कोई उपमा सूझीन अतिशयोक्ति ही काम आईजब भी लिखना

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विश्वास टूटने पर कविता

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विश्वास टूटने पर कविता खण्डित जब से विश्वास हुआ है ,                     मनवा सिहर गया है।जीना         दूभर     लगता    जाने                 क्या क्या गुज़र गया है।तिनका तिनका    जोड़   घरौंदा              मिल जुल सकल बनाया।ख्वाबों ,अरमानों   ने    मिल के             पूरा         महल   सजाया ।वज्रपात जब हुआ   नियति   का            जीवन बिखर गया    है ।जीना दूभर  लगता  ,        जाने           क्या क्या गुज़र गया  

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मधुमासी चौपाइयाँ

प्रकृति और पर्यावरण

मधुमासी चौपाइयाँ शरद शिशिर ऋतु कब के बीते, हाथ प्रकृति के रहे न रीते।दिनकर चले मकर के आगे, ठंडक सूर्य ताप से भागे।1बासंती मधुमास महीना, सर्व सुगन्धित भीना- भीना।घिरा कुहासा झीना-झीना, धरा सजी ज्यों एक नगीना।2कलियों पर हैं भ्रमर घूमते, ऋतु बसंत को सभी पूजते।मादकता वन उपवन छाई, आतुरता हर हृदय समाई।3नये पात आये तरुओं

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बेचकर देखों मुझे जरा

समाज और यथार्थ

बेचकर देखों मुझे जरा पूछने से पहले जवाब बना लिये।यार  सवाल तो गजब़ बना लिये। किसी ने पूछा ही नहीं मैं जिंदा हूँ,मगर तुम हसीन ख्वाब बना लिये। और और,और कहते रहे गम को,लो आशुओं का हिसाब बना लिये। मेरी मिलकियत न रहीं वजूद मेरा,समाज से कहों कसाब बना लिये। सौ-सौ सवाल गोजे पे रसीद

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नाराच ( पंच चामर ) छंद

हिंदी कविता

नाराच ( पंच चामर ) छंद  :       24 मात्रा,   ज र ज र ज गुरु । महान  देश  की  ध्वजा  पुनीत  राष्ट्र  गान  है ।उठे  सदा  झुके  नहीं  अतीत  गर्व  प्राण   है ।।खड़े   रहे  डटे   रहे   मिसाल   दे  जवान  है ।अनंत  कर्मयोग  को  सिखा  रहा  किसान है ।।दिशा  सभी  पुकारते  निशा  प्रभा  बिखेरती ।सनेह  

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doha sangrah

मन में जो तू ठान ले /  रामनाथ साहू  ” ननकी “

हिंदी कविता

मन में जो तू ठान ले /  रामनाथ साहू  ” ननकी “ मन में जो तू ठान ले ,कुछ भी करले मीत ।हौसला  गिराना नहीं , होगी निश्चित जीत ।।चरण  स्पर्श है बंदगी , कृपा  करे  सब  संत ।मन के कल्मष मेट दे, करे सकल दुख अंत ।।लोगों यह तन कुंभ है ,भरा हुआ  जल

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उठो सपूत

हिंदी कविता

उठो सपूत ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला उठो सपूत राष्ट्र के,  जगा रही तुम्हें  धरा।पुनः महान देश हो, विचार ये करो जरा।1प्रबुद्ध देशवासियों, न ढील दो लगाम को।बिना किसी विराम के, करो नवीन काम को।2एकाग्र हो यकीन

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जीवन की डगर

हिंदी कविता

जीवन की डगर कुछ तुम चलो,कुछ हम चलें,जीवन की डगर पर साथ चले।लक्ष्य को पाना है एक दिन,निशदिन समय के साथ चलें।सुख दु:ख के हम सब साथी,अपनत्व प्यार बाँटते चलें।अटल विश्वास हमारा मन में,मंज़िल की ओर हम बढ़ चलें।हिम्मत,परिश्रम और लगन से,अनेक बाधाओं के पार चलें।मोह माया के इस भँवर जाल से,भक्ति की नैया से

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सुख दुख पर कविता

हिंदी कविता

सुख दुख पर कविता सुख का सागर भरे हिलोरे।जब मनवा दुख सहता भारी।सुख अरु दुख दोनों ही मिलकर।जीवन की पतवार सँभारी।दुखदायी सूरज की किरणें।झाड़न छाँव लगे तब प्यारी।भूख बढ़े अरु कलपै काया।रूखी सूखी पर बलिहारी।पातन सेज लगे सुखदायक।कर्म करे मानव तब भारी।लेय कुदाल खेत कूँ खोदे।स्वेद बूँद टपके हदभारी।मानुष तन कू सार यही है।सुख दुख

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सरस्वती वंदना

हिंदी कविता

सरस्वती वंदना माँ सरस्वती शारदेबुद्धि प्रदायिनी ज्ञानदायिनीपद्मासना श्वेत वस्त्रा माँअज्ञानता हर ज्ञान दे माँ हंसवाहिनी।तेरे चरणों की पावन रज कणललाट पर मेरे सुशोभित रहे माँविस्तार हो मेरे ज्ञान का असीमितकलम मेरी वरदहस्त रहे माँ।धूप दीप नैवेद्य शुभ अर्चन वंदनकष्ट पीर विपत्ति हर दे माँ मेरेज्ञानचक्षु का दिव्य प्रकाश दे माँविशाल शब्द शक्ति हो माँ पास

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स्वीकारो प्रणाम माँ नर्मदे

हिंदी कविता

स्वीकारो प्रणाम माँ नर्मदे प्रणाम  है  अहो  प्रणाम ,  जयति माँ नर्मदे ।पतित पावनी  अभिराम ,  जयति माँ नर्मदे ।।हे कलि कलुष निवारिणी , जयति माँ नर्मदे ।अखण्डित  तपश्चारिणी , जयति माँ नर्मदे ।।मेकल  सुता  सिद्धिप्रदा , तुमको  प्रणाम है ।दीनों  पर  करती  कृपा , तुमको  प्रणाम है ।।सप्तमी  मकर  दिवाकर , तुम  अवतार धरे

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