कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

हर पल उत्सव सा मनालें

हिंदी कविता

हर पल उत्सव सा मनालें – केवरा यदु “मीरा “ जिंदगी चार दिन की  चलो गीत गालें ।हँस लें हम खुद औरों  को भी हँसालें ।चाहें तो जिन्दगी को हम इस तरह सजालें ।हर दिन दिवाली होली उत्सव मनालें । न बेरंग जीवन  हो संग मिलकर संवारें ।रहें हरपल मगन छूटे हँसी के फव्वारें।न हो […]

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सच में लिपटा झूठ

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सच में लिपटा झूठ सच में लिपटा झूठ,सरासर बिकते देखा!कलुषित कर्म को, धवल सूट में सजते देखा!लीपापोती सब जग होती,कुलटा नार हाथ ले ज्योती!खसम मार वो निज हाथों से’सती सावित्री बनते देखा!सचमें लिपटा झूठ,सरासर  बिकते देखा!!…..(१)बाजारों का हाल बुरा है।हाट हाट में ये पसरा है।मीठी बातों से जनता को,व्यापारी से ठगते देखा!सचमें लिपटा झूठ,सरासर  बिकते

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भावना और भगवान

हिंदी कविता

भावना और भगवान .              यदि सच्ची हो भावना,मिल जाते भगवान।जग में सच्चे बहुत हैं,अच्छे दिल इंसान।।देश हमारे हैं बहुत, दाता अरु धन वान।संसकारों संग भरा,प्यारा  हिंदुस्तान।।मुझे गर्व है शान है,मेरा देश महान।,जल,थल संग वायु चले,आज हमारे यान।।जिसमें बैठे गगन को, छू जाए संतान।नव पीढी को मैं भले, देऊँ ऐसा ज्ञान।।पारस्परिक विचार को,करते सदा प्रणाम।उन्नत नित

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राष्ट्रवाद पर कविता

हिंदी कविता

राष्ट्रवाद पर कविता बाँध पाया कौन अब तक सिंधु के उद्गार को।अब न बैरी सह सकेगा सैन्य शक्ति प्रहार को।1तोड़ डालें सर्व बंधन जब करे गुस्ताखियाँ।झेल पायेगा पड़ोसी शूरता के ज्वार को।2कांपता अंतःकरण से यद्यपि बघारे शेखियाँ।छोड़ रण को भागने खोजा करे अब द्वार को।3मानसिकता में कलुष है छल प्रपंचों में जुटा।कूटनीतिक योग्यता से अवसर

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बसंत  की  बहार में

समाज और यथार्थ

बसंत  की  बहार में बसंत दूत कोकिला, विनीत मिष्ठ बोलती।बखान रीत गीत से, बसंत गात  डोलती। बसंत  की  बहार में, उमा महेश साथ  में।बजाय कान्ह बाँसुरी,विशेष चाल हाथ में। दिनेश  छाँव  ढूँढते , सुरेश  स्वर्ग  वासते।सुरंग  पेड़  धारते, प्रसून  काम    सालते। कली खिले बने प्रसून, भृंग संग  सोम से।खिले विशेष  चंद्रिका  मही रात व्योम से।

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अभयदान

हिंदी कविता

अभयदान शांति कपोत,लहूलुहान।वो जलायेंगे,खलिहान।युद्ध व्यापार,आलीशान।मानवता झेलती,घमासान।दानवता करे,अभिमान।सभ्यता विलोपन,अभियान।कैसे मिलेगा,अभयदान???भावुककविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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वो स्काउट कैम्प है मेरा

प्रकृति और पर्यावरण

वो स्काउट कैम्प है मेरा जहाँ प्रकृति की सुंदर गोदी में स्काउट करता है बसेरावो स्काउट कैम्प है मेराजहाँ सत्य सेवा और निष्ठा का हर पल लगता है फेरावो स्काउट कैम्प है मेरायह धरती जहाँं रोज फहरता,नीला झण्डा हमाराजहाँ जंगल में मंगल करता है,स्काउट वीर हमाराजहाँ शिविर संचालक सबसे पहले डाले तम्बू डेरावो स्काउट कैम्प

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बुढ़ापे से लाभ

हिंदी कविता

बुढ़ापे से लाभ जब मिले बुढ़ापा , खो मत आपा ,ईश्वर  को  धन्यवाद  दे ।उसकी है  करुणा , आया पहुना ,            प्रसन्नता  का  प्रसाद  दे ।।सूक्ष्म  है   संदेश ,  श्वेत  ये  केश ,             पवित्रता  का  पालन  हो ।इंद्रिय शिथिल हो, मन  सविकल हो ,ध्यान का नित्य साधन हो ।।जब न दिखे दुनिया , नैन पुतरिया               निहारना तू निज

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बूढ़ी हो गई हैं स्वेटर

नारी जीवन और संवेदना

बूढ़ी हो गई हैं स्वेटर समय के साथबूढ़ी हो गई हैं स्वेटर…यकायक आज..संदूक से निकालकर… आलमारी में सजाते समयधर्मपत्नी बोल उठी थी..आधुनिक समय में कद्र कहाँ है …?दिन रात…आंखें चुंधिया गई थी..बूढ़ी आंखें….लेकिन स्नेह से भरपूर…मशीनों में स्नेह थोड़े ही होता है…?नदारद..कितना मोलभाव किया था..पसंद की पषम…आज तो दुकानें भी मिलती हैं सहज..दुर्लभ है ढूंढना…आधुनिकीकरण

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छत्तीसगढ़ महतारी /पुनीत राम सूर्यवंशी

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ महतारी/ पुनीत राम सूर्यवंशी               सुघ्घर हाबय छत्तीसगढ़ महतारी,एला कइथे भईया धान के कटोरा,आवव मयारू मितान संगवारी मन,नवा छत्तीसगढ़ राज बनाय बर हे।   बोली-भाखा,जात-पात, छुआ-छुत ल,छोड़ के कहव हमन हाबन एखर संतान,महानदी, अरपा, पइरी, इंन्द्रावती नदी म,बांध बंधवा के खेत म पानी पहुंचाय बर हे।जम्मो कमाईया मन ल काम-बुता मिलय,देवभोग अऊ सोनाखान के खनिज

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जो भारत विरोधी नारा लगाते

हिंदी कविता

जो भारत विरोधी नारा लगाते “जो भारत विरोधी नारा लगाते”अपनी भारत माता डरी हुई ,वो कुछ भी नही कह पाती है ।अपने कुछ गद्दारों के कारण,मन ही मन वो शर्माती है ।।पाल पोस कर बडा किया,इसकी आँगन मे ही खेले ।वो पिला रही थी दूध जिन्हें,पर निकले वही हैं जहरीले ।।इन्हीं जयचंदों के कारण ,मुगलों

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हकीकत तब पता चलता है

समाज और यथार्थ

हकीकत तब पता चलता है हकीकत तब पता चलता है                  कौन अपना है ,कौन पराया है ,                                 ये तो वक़्त बताता है ।हकीकत तब पता चलता है जीवन में,                    जब बुरा वक़्त आता है ।।01।।न कोई दोस्त है यहां,                                 ना कोई यार है ।यह दुनियाँ भी यारों ,                       मतलब का संसार है ।।02।।बुरे वक़्त में

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