कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

Maa Durga photo

मैया की लाली है सिंगार/केवरा यदु “मीरा

हिंदी कविता

“मीरा की कविता ‘मैया की लाली है सिंगार’ में माता के प्रति भक्ति और प्रेम का गहरा भाव है। इस रचना में मीरा अपनी माँ की सुन्दरता और भक्ति को बयां करती हैं, जो भावनाओं और आस्था से भरपूर है। यह कविता मातृ प्रेम और भारतीय संस्कृति की अद्भुत परंपरा को दर्शाती है।” मैया की […]

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आज का नेता पर कविता

हिंदी कविता

आज का नेता पर कविता जहाँ बहरी सियासत है, जहाँ कानून है अंधा।करें किसपे भरोसा तब, जहाँ पे झूठ है धँधा।विचारों पे लगा पहरा,बड़ा ये ज़ख्म है गहरा,भला क्या देश का होगा,सियासी रंग है गन्दा।। मुनाफ़े का बड़ा धंधा, कभी होता नहीं मंदा।सियासी वस्त्र है ऐसा, कभी होता नहीं गंदा।सफेदी में छिपा लेता, सभी गुनाह

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जीवन का शाश्वत सत्य

प्रकृति और पर्यावरण

जीवन का शाश्वत सत्य भोर की बेला हुई, दिनकर की पलकें खुली।इंतज़ार ख़त्म हुआ, सौगात लेकर आई नयी सुबह।।धीरे धीरे आँखे खोल रहा,स्वर्ण किरणें बिखेर रहा।नयी सुबह प्रारंभ हुई, रात्रि निशा विभोर हुई।। कल जो जा रहा पश्चिम में था,आज फिर पूरब में है।नयी रोशनी नयी किरण आज हमारे जीवन में है।।दे रहा संकेत हमें,

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बैताली छंद के कविता

हिंदी कविता

बैताली छंद के कविता      काम  क्रोध ,  लोभ  छोड़  दे ।राम   संग ,  प्रीत   जोड़   दे ।।एक   राम ,   सत्य   है   यहाँ ।हो   अचेत , सो  रहा   कहाँ ।। स्वार्थ   हेतु ,   प्रीत  को  रचे ।खो  प्रपंच , ग्यान   से   बचे ।।चार   रात ,   चाँदनी     सजे ।अंत   छोड़ ,  आग  में  तजे ।। हाड़   मांस

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शीत ऋतु पर ताँका

हिंदी कविता

शीत ऋतु पर ताँका {01}ऋतु हेमंत नहला गई ओसधरा का मनतन बदन गीलेहाड़ों में ठिठुरन । {02}लाए हेमंत दांतों में किटकिटहाड़ों में कंपसर्द सजी सुबह कोहरा भरी शाम । {03}हेमंत साथकिटकिटाए दाँत झुग्गी में रात ढूँढ रहे अलाव काँपते हुए हाथ । □ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

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मन पर कविता

हिंदी कविता

मन पर कविता सोचा कुछहो जाता कुछ हैमन के ही सब सोचमन को बांध सका न कोईमन खोजे सब कोय।।⭕हल्के मन से काम करो तोसफल रहे वो कामबाधा अगर कोई आ जायेबाधित हो हर काम।।⭕मन गिरे तन मुरझायेवैद्य काम नही आयेगाँठे मन गर कोई खोलेसच्चा गुरु वो कहाये।।⭕मन के ही उद्गम स्रोत सेउपजे सुख व

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तोता पर कविता

हिंदी कविता

तोता पर कविता ना पंख है ना पिंजरे में कैद,फिर भी है तोता ।खाता है पीता है,रहता है स्वतंत्र,हमेशा एक गीत है गाता नेता जी की जय हो। कर लिया बसेराबगल की कुर्सी पर,खाने को जो है मिलतामुफ्त का भोजन,टूट पड़ता है बेझिझकगजब का तोता। मानक छत्तीसगढ़िया

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हाइकु

अवि के हाइकु

हिंदी कविता

अवि के हाइकु जीवन पथप्रेम और संघर्षदुलारा बेटा मनमोहनबलिहारि जाँऊ मैंतेरी मुस्कान मां हूँ मैंलड़ूंगी भूख से मैंये अग्निपथ समर्पित हैतुझ पे ये जीवनराज दुलारा ©अविअविनाश तिवारीजांजगीर चाम्पा

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संतोषी है मधुशाला

हिंदी कविता

संतोषी है मधुशाला संतोषी अँगूर लता है,संतोषी साकी बाला।संतोषी  पीने  वाला हैसंतोषी है मधुशाला।बस्ती -बस्ती चौराहे पर,अपनी दुकान खोलने वाले। विज्ञापन  के राम  भरोसे,अपनी दुकान चलाने वाले।जंगल उपवन बाग बगीचे,संतोष  दिखाई  देता है।डगर अकेली सन्नाटे मे,भीड़ जुटाती मधुशाला। संतोष  समाई  हाला मे,राजा  है  पीने  वाला।बस्ती बस्ती डगर डगर काशुभचिन्तक है मतवाला।दुनिया वाले रोज झगड़ते,संसद ,

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doha sangrah

द्रोपदी चीर प्रसंग पर दोहे/ पुष्पा शर्मा”कुसुम”

हिंदी कविता

द्रोपदी चीर प्रसंग पर दोहे पासे फेंके कपट केशकुनि रहा हर्षायदाव द्रोपदी लग गईरहे पाण्डव शर्माय सभा मध्य में द्रोपदीकरती करुण पुकारचीर दुशासन खींचतानहीं बचावन हार भीष्म बली कुरुराज ने  साध लिया है मौनपांचों पति बोले नहींबचा सके अब कौन गोविंद तुम करुणा करोअबला करी गुहारतुम बिन अब कोई नहींलाज बचावन हार नाम लेत  ही

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shri Krishna

श्रीकृष्ण पर दोहे

हिंदी कविता

श्रीकृष्ण पर दोहे सुभग सलोने सांवरेनटवर दीन दयालनिरख मनोहर श्याम छविनैना हुए निहाल छवि मोहन की माधुरीनैना लीन्ह बसायजित देखों वो ही दिखेऔर ना कछु लखाय गावत गुण गोपाल केदही मथानी हाथब्रज जीवन निर्भय भयोश्याम तुम्हारे साथ पुष्पा शर्मा “कुसुम”

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अविनाश तिवारी के दोहे

हिंदी कविता

अविनाश तिवारी के दोहे घड़ी घड़ी घड़ी का फेर है,    मन में राखो धीर।राजा रंक बन जात है,   बदल जात तकदीर।। प्रेम प्रेम न सौदा मानिये,    आतम  सुने पुकार।हरि मिलत हैं प्रीत भजेमति समझो व्यापार।। दान देवन तो करतार है,  मत कर रे अभिमान।दान करत ही धन बढ़ी,   व्यरथ पदारथ जान।। व्यवहार कटुता कभू न

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