कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

निःशब्द तो नहीं

समाज और यथार्थ

निःशब्द तो नहीं [१]निःशब्द तो नहीं !किंचित् भी नहीं !!बस…नहीं हैं आजशहद या गुलाबी इत्र मेंडुबोयेसुंदर-सुकोमल-सुगंधित शब्दनहीं हैं आजकर्णप्रिय,रसीले,बांसुरी के तानों संगगुनगुनाते अल्फाज़…सब जल गये !भस्म हो गयेसारे के सारेअंतरिक्ष में विचरतेछंदटूट-फूटकरबिखर गये सारे अलंकारनिस्सार हो गयींसारी व्यंजनाएँलक्षणा भी हो गयीं सारीमहत्त्वहीन..अबबचे हैं तो केवलउबड़-खाबड़कंटकाकीर्णक्षिति पर पांव जमाते……कुछ शब्दजो टटोलते हैंपैरों से अपना ज़मीनपैरों के […]

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आक्रोश पर कविता

हिंदी कविता

आक्रोश पर कविता                           ये आज्ञा अब है मिली ,खुल के लो प्रतिशोध चुन- चुन के रिपु मारिये, हो गलती  का बोध ।।                           *कोई अब बातें नहीं , करो सिर्फ आघात ।दुष्ट दमन करते चलो , एक बराबर  सात ।।  .                        *जय भारत जय हिंद से , गूँज  उठे  संसार ।माँ भारती तिलक करो ,

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जय जय वीणाधारी

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जय जय वीणाधारी जय जय वंदन वीणाधारी।सुन लो माता विनय हमारी ।।          सच राह सदा साहस पाऊँ।           नित नित माता के गुण गाऊँ।।मातु ज्ञान की तुम हो सागर।ज्ञान जगत में करो उजागर।।            सदा विराजे माता वाणी।            सब जन पूजे वीणापाणी।।मातु  शारदे  तुम  वरदानी।सब जग पूजे मुनि जन ज्ञानी।।            …….भुवन बिष्ट कविता बहार से जुड़ने

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जय हिंद जय भारत

हिंदी कविता, ,

23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में

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शहीदों की कुर्बानी पर कविता -मनोरमा जैन पाखी

हिंदी कविता

शहीदों की कुर्बानी पर कविता -मनोरमा जैन पाखी पवन वेग से उड रे चेतक ,जहाँ दुश्मन यह आया है ।रखा रुप विकराल दुष्ट ने ,ताँडव  वहाँ  मचाया  है। रक्तरंजित हो गयी धरा ,निर्दोषो के खून से।जाने न पाये दुष्ट नराधमरंग दे भू उस खून से । रही सिसकती आज वसुंधरादेखे अपना दामन लाल।न जाने कितनी

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ताटंक छंद

हिंदी कविता

ताटंक छंद           ——  1——दिलों से नफ़रत को मिटाकर,               सबको गले लगाना है |हमें देश की खातिर अपने,               जीना है मर जाना है |आपस में हो भाईचारा,               प्रेम भाव उपजाना है |हरे भरे अपने गुलशन को,               खुशबू से मँहकाना है |                ——–2——–दीन दुखी की सेवा कर के,             खुद को धन्य बनाना है |अपने सदकर्मो से

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खामोशी पर कविता

हिंदी कविता

खामोशी पर कविता मैं ,चुप ही रहती हूं ,जाने कबसे ,मुझे पता भी ,नहीं चला ,खामोशी कब,मेरी मीत बन गई,और तुमने समझा,मैं सुधर गई,क्योंकि ,नहीं पूछती देर से आने की वजह ।नहीं कहती क्या अच्छा हैक्या बुरा ?नहीं लाती हल्के रंग की शर्ट।नहीं कहती तुम पर फबेगा।शायद ,हमारे रिश्ते के रंगहल्के हो गए हैं ,काश

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मेरी मातृभूमि

हिंदी कविता

मेरी मातृभूमि स्वर्ग  से   सुंदर   भू   भारती ।भानु शशि नित्य करे आरती ।।गौरव   गान  श्रुति  वेद करते ।प्रातः नमन ऋषि हृदय भरते ।।उर्वर  भूमि  सजी  इठलाती ।श्रम बिन्दु से प्यास  बुझाती ।।सौंधी  सुगंध  पवन  मचलते ।मंजु मधुक मधु कंठ विहरते ।।देवभूमि    हे  दिव्य  रसोमय ।साधक जीवन करती निर्भय ।।प्राची   हिमाद्रि   उतंग  श्रेणी ।प्रगटी जहाँ सुरसरि

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doha sangrah

नैन पर दोहे

हिंदी कविता

  नैन पर दोहे दुनिया    के   सबसे   बड़े, , जादूगर  ये  नैन।इनके बिन मिलता कहाँ ,भला किसी को चैन?कमल-नयन   श्रीराम  हैं , त्रिलोचन  महादेव।सृजन  प्रलय  के  हेतु   हैं  ,ये  देवों  के  देव।नयन   समंदर   झील हैं   ,नैन  तीर  तलवार।नैन   जिसे  ले   डूबते,  अलग  कहाँ  उद्धार।नील-गगन  भी  नयन  हैं , जिन  में तारे मौन।मन -पंछी  उड़ते  यहाँ 

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लाल तुम कहाँ गये

हिंदी कविता

लाल तुम कहाँ गये * मेरे आँगन  का उजियारा थामाँ बाप के आँख का तारा थासीमा पर तुझको भेजा थापत्थर  का बना  कलेजा थापर मैने यह नहीं   सोचा  था।तू मुझे छोड़  कर जायेगा माँ बाप को  रुलवायेगा ।क्यों पुलवामा  में सो गये ।लाल तुम कहाँ गये । कहता था ब्याह रचाऊँगाप्यारी सी बहू   मैं  लाऊँगाफिर झूले

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हिम्मत न हार

हिंदी कविता

हिम्मत न हार आज  नहीं  तो  ये  कल  होगा ।प्रश्न  यहीं  का   है  हल  होगा ।।जीवन  जीये  जा   मत   रोना ।यार   हताशा   में  मत   होना ।।मान   पहेली   तू   लग   पीछे ।हिम्मत  को बांधो  कस भींचे ।।जीत  चलो  बाजी  उलझा  है ।बंधन  तोड़़ा  जो  निकला  है ।।तू  इतिहासों  कोे  लिखता जा ।कर्ज अभी  से ही  गिनता

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मनीभाई की तांका

हिंदी कविता

मनीभाई की तांका नंद के लालाब्रज का तू गोपालाहै भोला भालाभाये बांसुरी तेरीछाये प्रेम घनेरी।। -मनीभाई ●●●●●●●●●●नाचते देखादेव विसर्जन मेंलोगों कोलिए फूहड़पनडीजे केे तरानों में।●●●●●●●●●●मैं नहीं एकमेरे रूप अनेकमैं ही ना जानूँ मेरी हकीकत कोमुझसे मिला दे तू।●●●●●●●●●●मनीभाई ‘नवरत्न’ मनीभाई की ताकाँ आता न कलमहाकाल विजेताकर तो शुरूअपना अभियानलाना गर तूफान।

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