कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कारगिल विजय दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

कारगिल विजय दिवस कारगिल विजय दिवस है,जीत का त्यौहार है ।उन  शहीदों  को  नमन  है,वंदन  बार-बार है ।। वीर तुम बढे चले थे,चल रही थी गोलियाँ ।बर्फ  की  चादरों   पे दुश्मनों की टोलीयाँ ।।मगर तुम रुके  नहीं,   इंच भी डिगे नहीं ।सर्द  थी   घाटियाँ    पर  लहुँ में  गर्मियाँ ।।हाथ में तिरंगा और जय हिंद की […]

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किसान खेत जोतते हुए

किसान पर हाइकु

हिंदी कविता

किसान पर हाइकु मेघ बरसेअनचाही बारिशटूटती आस खड़ी फसलहो रही है बर्बादरोता किसान खेत हैं सूखेभूख कौन मिटायेंबंजर धरा। रस्सी के फंदेशाहकारों का कर्जलम्बी गर्दन। कर्ज से मुक्तिशासन से राहतकृषक हंसा। अविनाश तिवारी

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हाइकु

राख विषय पर हाइकु -रमेश कुमार सोनी

हिंदी कविता

राख विषय पर हाइकु- रमेश कुमार सोनी 1 मोक्ष ढूंढने चला – चली की बेला राख हो चला ।। 2 राख का डर जिंदगी ना रुकती मौत है सखी ।। 3 पानी जिंदगी अग्नि , राख की सखी नहीं निभती ।। 4 राख बैठे हैं भूखे – प्यासे बेचारेशमशान गाँव ।। 5 राख तौलते सब

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उन बातों को मत छेड़िये

हिंदी कविता

उन बातों को मत छेड़िये सारी बातें बीत गई उन बातों को मत छेड़िये,जो तुम बिन गुजरी उन रातों को मत छेड़िये। तुम मिलो न मिलो हमसे रूबरू होकर कभी,लाखो शिकायते हैं उन हालातों को मत छेड़िये। एक नजर भर देखा था हमने  तुमको यूँही कही,छूकर जो तुम्हें उठे उन ख्यालातों को मत छेड़िये। अकेले

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जुल्मी-अगहन

नारी जीवन और संवेदना

जुल्मी-अगहन जुलुम ढाये री सखी,अलबेला अगहन!शीत लहर की कर के सवारी,इतराये चौदहों भुवन!!धुंध की ओढ़नी ओढ़ के धरती,कुसुमन सेज सजाती।ओस बूंद नहा किरणें उषा की,दिवस मिलन सकुचाती। विश्मय सखी शरमाये रवि- वर,बहियां गहे न धरा दुल्हन!!जुलूम…..सूझे न मारग क्षितिज व्योम-पथ,लथपथ पड़े कुहासा। प्रकृति के लब कांपे-न बूझे,वाणी की परिभाषा।मन घबराये दुर्योग न हो कोई-  मनुज

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चेहरे पर कविता

हिंदी कविता

चेहरे पर कविता सुनोकुछ चेहरोंके भावों को पढ़नाचाहती हूॅपर नाकाम रहती हूॅ शायदखिलखिलाती धूप सीहॅसी उनकीझुर्रियों की सुन्दरताबढ़ते हैंपढ़ना चाहती हूॅउस सुन्दरता के पीछेएक किताबजिसमें कितनेगमों के अफसाने लिखे हैंना जाने कितने अरमान दबे हैंना जाने कितने फाँके लिखे हैं चेहरा जो अनुभव के तेजसे प्रकाशित सा दिखता हैउस तेज के पीछे छिपीरोजी के पीछे

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इन्तजार पर कविता

समाज और यथार्थ

इन्तजार पर कविता विसंगति छाई संसृति मेंकरदे समता का संचार।मुझे ,उन सबका इन्तजार…। जीवन की माँ ही है, रक्षकफिर कैसे बन जाती भक्षक ?फिर हत्या, हो कन्या भ्रूण की या कन्या नवजात की ।रक्षा करने अपनी संतान कीजो भरे माँ दुर्गा सा हुँकारमुझे, उस माँ का इन्तजार….। गली गली और मोड़ मोड़ परहोता शोषण छोर

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संस्कार पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

संस्कार पर कविता अहो,युधिष्ठिर हार गया है,दयूत् क्रीड़ा में नारी को,दुःसाशन भी खींच रहा है,संस्कारों की हर साड़ी को। अपनी लाज बचाने जनता,सिंहासन से भीड़ जाओ तुम,भीख नही अधिकार मांगने,कली काल से लड़ जाओ तुम,विपरित काल घोर कलयुग है,ना याद करो गिरधारी को। अहो,युधिष्ठिर….सदियों को संस्कार सिखाकर,हम अब तक सीना ताने हैं।अपनाओ न पाश्चात्य सभ्यता,रिश्ते

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क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो

हिंदी कविता

क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो क्यूँ  झूठा  प्यार  दिखाते  हो ….दिल  रह  रह  कर  तड़पाते  हो .. गैरों  से  हंसकर  मिलते  होबस  हम  से  ही  इतराते  हो घायल  करते  हो  जलवों  से …नज़रों  के  तीर  चलाते  हो … जब  प्यार  नहीं  इज़हार  नहीं …फिर  हम  को  क्यूँ  अज़माते  हो .. आ  जाओ हमारी  बांहों  में

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भारत का लाज बन जायें

हिंदी कविता

भारत का लाज बन जायें भारत का लाज बन जायें।मुल्क की नाज बन जायें।युग – युग अमर कहानेभारत का लाल बन जायें। प्रण करें करबद्ध चित,नित प्रतिदिन करते नमन।सदैव ही मेरे वतन का,इस धरा पर मैं लूँ जनम। प्रेम के हम राग बन जायें।मुल्क की नाज बन जायें। रक्षक बन तत्पर भीड़ पड़े,शत्रु के जब

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फरियादी हो (बेटी पर कविता)

नारी जीवन और संवेदना

फरियादी हो (बेटी पर कविता) आज कोख की बेटी ही,अब पूछे बन फरियादी हो। बिना दोष क्यों बना दिया है,मुझको ही अपराधी हो। ईश विधान जन्म मेरा फिर,तुम क्यों पाप कमाते हो।सुख दुःख का अनुमान लगा,हत्यारे बन जाते हो।आज कोख……। घर बगिया की  कोमल कलिका , मुझसे ही घर शोभित हो।अँगना में किलकारी मेरी,रिमझिम ध्वनि पग

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लबों पे है तेरा नाम

हिंदी कविता

लबों पे है तेरा नाम लब  पे नाम  तेरा सुमिरूँ मैं सुबह शाम मोहन  मेरे  श्याम । आँखों  में तुम बसे होसाँसों की माला  में ओ मोहन  बस तेरा ही  नाम । तुम जगत  नियंता भक्तों को प्यारे ।हे गोविन्द  मेरे यसुदा के  हो दुलारे । मैने  रचाई मेंहदी मोहना  तेरे  नाम । लबों पे है

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