कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

mera bharat mahan

भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं

हिंदी कविता

भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं मिलकर आओ जग में हम सब,                    भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं।….माँ भारती के सब भारतवासी ,                     सदा सदा गुण गाते हैं।।जब आजादी की अलख जगी,                   वीरों ने प्राण गवाये थे।यह मातृभूमि की रक्षा को,                  वे बलिदानी कहलाये थे।।पावन गणतंत्र यह अपना,                 कर्तव्यों को भी निभाते हैं।…….भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं…भारत […]

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चंदा मामा दूर हैं

हिंदी कविता

चंदा मामा दूर हैं चंदा मामा दूर हैं ,  पर हम तो मजबूर है।  कैसे आए पास में,  हम लगे हैं यह ही प्रयास में हम जब भी आगे बढ़ते हैं,तुम आगे बढ़ जाते हो।रुककर देखें जब भी तुमको,तुम ऊपर चढ़ जाते हो।कभी तुम दिखते तुन्नक से, कभी तुम दिखते भरपूर हो।घटती-बढ़ती कलाओं में,अपने में रहते चूर हो।चंदा

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तुम्हें श्रद्धा सुमन चढ़ाऊं

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तुम्हें श्रद्धा सुमन चढ़ाऊं तुम्हें श्रद्धा सुमन चढ़ाऊं नैनों से नीर बहाऊंवीर शहीदों तुमको मैं शत-शत शीश नवाऊं|तुम्हें श्रद्धा सुमन….. धन्य है वो माता जिसने तुमको जन्म दियाधन्य पिता वो जिसने बेटा बलिदान कियाऐसे मात पिताओं पे मैं नित बलि- बलि जाऊं|तुम्हें श्रद्धा सुमन….. मातृभूमि की सेवा में दे दी तुमने जानतुम हो देश सच्चे

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मौत पर कविता

हिंदी कविता

मौत पर कविता जिस दिन पैदा हुआउसी दिनलिख दिया गया थातेरे माथे पर मेरा नाम ।दिन, तिथि ,जगह सब तय थाउसी दिन।हर कदम बढ़ रहा था तेरामेरी तरफ।पल पल ,हर पल ।।तेरी निश्छल हँसीतेरा प्यारा बचपन देखकरतरस आता था मगरसत्य से दूरतू भागता ही गयाज्यों ज्यों तू करीब आ रहा था मेरेतेरी निश्छल हँसी को

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अनेकों भाव हिय मेरे

हिंदी कविता

अनेकों भाव हिय मेरे अनेकों भाव मन मेरे, सदा से ही मचलते हैं।उठाता हूँ कलम जब भी, तभी ये गीत ढलते हैं।पिरोये भाव कर गुम्फित, बनी है गीत की मालाकई अहसास सुख-दुख के, करीने से सजा डाला।समेटे बिंब खुशियों के, सुरों में यत्न कर ढाला।सुहाने भाव अंतस में, मचलते अरु पनपते हैं।1अनेकों भाव हिय मेरे…

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तुमने पत्थर जो मारा

हिंदी कविता

तुमने पत्थर जो मारा चलो तुमने पत्थर जो मारा वो ठीक था।पर लहर जो क्षरण करती उसका क्या? पीर छूपाये फिरता है खलल बनकर तू,विराने में आह्ह गुनगुनाये उसका क्या? बेकार…कहना था तो नज़र ताने क्यों?गौर मुझ पे टकटकी लगाए उसका क्या? मेरी इज्जत…,मेरी आबरू क्या कम है?तो जो खुलकर बोली लगाए उसका क्या? मै

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वतन को नमन करता हूँ

हिंदी कविता

वतन को नमन करता हूँ भारत माँ की चरण धूलि,चंदन माथे धरता हूँ ।सपूत हूँ नाम वतन के ,जीवन अर्पण करता हूँ । बहता शोणित यूँ रगों में,जलते अंगारों सासिंधु प्रलय सा उठती लहरें,उर में ललकारों कासिंहनाद हूँकारें भरकर,शत्रुओं से नित लड़ता हूँ। माँ की कोख निहाल होतीमाटी का कर्ज चुकाता हूँअस्मिता की रक्षा खातिरप्राणोत्सर्जन

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नव सुर-दात्री

हिंदी कविता

नव सुर-दात्री,नव लय-दात्रीनव – गान मयी,नव तान – मयी।        देवी मैं हूँ  अति अज्ञानी       नहीं है जग में   तुमसा  दानी        माँ! दान दो नव अक्षरो  का       माँ दान दो नवलय  स्वरो का जग- सृष्टा की मानस – कन्याबुद्धि दाता  न तुझसी अन्या।।          शारदे! वागेश-  वीणा – धारणी          भारती! भारत- सुतों की तारणी          नव

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जय जय वरदानी

हिंदी कविता

जय जय वरदानी जयति मातु जय जय वरदानी।सब जग पूजे मुनि जन ज्ञानी।।नित नित ध्यान करूँ मैं माता।तुम सब जन की भाग्य विधाता।। मातु ज्ञान की तुम हो सागर।जगत ज्ञान से करो उजागर।।सदा मातु बसना तुम वाणी।जय जय वंदन वीणापाणी।।           …..भुवन बिष्ट

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भारत माँ का सपूत

हिंदी कविता, ,

23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में

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भारत माँ के सपूत

हिंदी कविता

भारत माँ के सपूत – घनाक्षरी चाहे ठंड का कहरआधी रात का पहरतिलभर न हिलते,खड़े , सीना तान के। डरते न तूफान सेडटे हैं बड़ी शान सेभूख ,प्यास ,नींद छोड़,रखवारे मान के। समर्पित हैं देश कोमातृ -भू जगदीश कोतन, मन ,धन सब,सुर -लय गान के। लगे सब देव दूतभारत माँ के सपूतबचाये त्रासदी से वो,निज

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