कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

mahatma gandhi

नमन आपको बापू नमन हैैं बारम्बार

हिंदी कविता,

नमन आपको बापू नमन हैैं बारम्बार नमन आपको बापू,  नमन हैैं बारम्बार।सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया,  अत्याचार के आप प्रतिकार।। खादी को किया था आपने प्यार, स्वदेशी अपनाया।सत्य, अहिंसा के हथियार से गौरों को खूब छकाया।।आजादी के परवाने थे,सत्याग्रह के आप रहे प्रतीक।नमक छोडो आंदोलन की भी चले आप लीक।। साबरमती आश्रम में जीवन गुजारा,पोरबंदर के पूत ।सादा […]

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परिवार की शान होती है बेटियां

हिंदी कविता

परिवार की शान होती है बेटियां माँ के रूप में ममता हैं बेटियां,ओस की बूंद सी होती है बेटियां,पिता की ताकत होती है बेटियां,परिवार की शान होती है बेटियां । स्वभाव से शर्मिली होती है बेटियांकक्षाओ में प्रथम आती है बेटियांपरिवार को जोडे रखती है बेटियांभाई की कलाई की शान है बेटियां देश की धरोहर

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मोम की गुड़िया-बेटियां

हिंदी कविता

मोम की गुड़िया-बेटियां मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियांमाता पिता के दुलार में पलती है बेटियांअनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियांखुदा की सौगात ,जमा पूंजी का ब्याज सी होती है बेटियां दिन का चैन और रातों की नीद भी उड जाती हैजब जवान हो जाती

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सरस्वती -वन्दना

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सरस्वती -वन्दना जनप्रिय माँ जनोपकारणीजग जननी, जल जीवधारणी।स्वर्णिम ,श्वेत, धवल साडी़ मेंचंचल, चपल,चकोर चक्षुचारणी। ज्ञानवान सारा जग करती माँअंधकार, अज्ञान सदैव हारणीविद्या से करती,जग जगमगगुह्यज्ञान,गेय,गीत,  गायनी। सर्व सुसज्जित श्रेष्ठ साधना सुन्दरहर्षित, हंस-वाहिनी,वीणा वादिनीकर कृपा,करूणा, कृपाल,कब कैसे,पल में हीरक—रूप– प्रदायिनी। मूर्त ममतामय,ममगात मालती,जब भटके,तम में माँ तुम्ही संवारिणी,कितने कठिन, कष्ट कलुषित झेले माँ,मार्ग प्रकाशित करदे माँ,मोक्षदायिनी।

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जिन्दगी पर कविता

हिंदी कविता

जिन्दगी पर कविता जिन्दगी है,  ऐसी कली।जो बीच काँटों के पली।पल्लवों संग झूल झूले,महकी सुमन बनके खिली। जिन्दगी  राहें अनजानी।किसकी रही ये पहचानी।कहीं राजपथ,पुष्पसज्जित,कहीं पगडण्डियाँ पुरानी। जिन्दगी सुख का सागर ।जिन्दगी नेह की गागर।किसी की आँखों का नूर ,धन्य विश्वास को पाकर। जब डगमगाती जिन्दगी।गमगीन होती जिन्दगी ।मिले  हौंसलों के पंख तबनभ में उड़ती है

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यादों के झरोखे से

हिंदी कविता

यादों के झरोखे से ख़तमिल गयातुम्हारा कोरा देखा, पढ़ा, चूमाऔरकलेजे से लगाकररख लिया अनकही थी जो बातसब खुल गयीकालिमा भरी थी मन मेंसब धुल गयी हृदय की वीणा बज उठीछेड़ दी सरगमचाहते थे तुम कितनामगर वक़्त था कम और तुमनेकुछ नहीं लिखकर भीजैसेसब कुछ लिख दिया मैंनेदेखा, पढ़ा, चूमाफिरकलेजे से लगाकररख लिया राजेश पाण्डेय*अब्र*  अम्बिकापुर

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प्रभात हो गया

हिंदी कविता

प्रभात हो गया उठोप्रात हो गयाआँखें खोलोमन की गठानें खोलो आदित्य सर चढ़करबोल रहा हैऊर्जा संग मिश्रीघोल रहा है नवल ध्वज लेकरअब तुम्हेंजन मन धन के निमित्तलक्ष्य की ओरजाना हैगंतव्य के छोर परपताका फहराना है असीम शक्ति तरंगेंतुम्हारे इंतज़ार में हैं उठो !मेघनाद की तरहहुंकार भरोघन गर्जन करो बढो!हासिल करोविजयी बनोइतिहास रचोसमर तुम्हारा है भाग्य

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doha sangrah

दोहा पंचक

हिंदी कविता

दोहा पंचक -रामनाथ साहू ननकी किन्नर  खूब  मचा  रहे ,  रेलयान  में   लूट ।कैसी है  ये  मान्यता , दी  है किसने  छूट ।। जल थल नीले गगन पर ,, मानव का आतंक ।दोहन जो  करता  मिले , सागर को ही पंक ।। हिंसा  हुई  बढ़ोतरी , होत   अहिंसा    छोट ।सबके  मन  को भा  गई ,

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ये है मेरा वतन

नारी जीवन और संवेदना

ये है मेरा वतन ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमन ।ये देश है गौतम गांधी काये देश है नेहरू शास्त्री कायहाँ तिरंगा प्यारा है।यहाँ गंग यमुन की धारा है ।ये मेरा तन मन मेरा जीवन । ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमनयहाँ तुलसी और कबीर हैयहाँ प्रीत का रंग अबीर हैयहाँ राम और

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हे मां शारदे रोशनी दे ज्ञान की

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हे मां शारदे रोशनी दे ज्ञान की हे मां शारदेरोशनी  दे ज्ञान कीतू  तो ज्ञान का भंडार हैहाथों में वीणा पुस्तकहंस वाहनी ,कमल धारणीओ ममतामयी मांइतनी कृपा मुझ पर करनामैं सदाचारी बनूंसत्य पथ पर ही चलूंविरोध क्यूं अन्याय कामुस्किलों में भी न घबराओ हे मां शारदेदूर कर अज्ञानताउर में दया का वास होज्योति से भर दे

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mahatma gandhi

बापू जी तुम्हें नही भूले

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बापू जी तुम्हें नही भूले हम भूल गये रे हर बात,बापू जी तुम्हें नही भूले।सब कुछ किया देश के नामतुम्हारे सब काम नही भूले।।हम भूल गये रे……………। संघर्ष करके जीना सिखाया,अपनें वतन को बचाया।सब कुछ हमनें पाया मगर,तेरे साथ ना झूला कभी झूले।।हम भूल गये रे……………..। उठाके अपनें गोद में हमकोसबको गले से लगाया।खेलें हैं

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देखो न मुझे बुखार है

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देखो न मुझे बुखार है देखो न मुझे बुखार हैया ये तेरा ही खुमार हैदिल को तेरा रोग लग गयादिल बेचारा बीमार है धड़कने बढ़ें और कभी थमेदेखूँ जो तुम्हें तो बोलो क्या हुआ हमेंहर जगह ही तुम दिखते हो मुझेदिल मेरा पुकारता है हर घड़ी तुझेक्या ये सच है या है ये भरमक्या तुझे

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