अपनी कमजोरियों का बचाव बंद करो
हिंदी कविताअपनी कमजोरियों का बचाव बंद करो कोई कमजोर नहीं है।हम बस नाटक करते हैं। सुविधा के लिए टूटते हैं।रीढ़ बेचते हैं।और कहते हैं—“ठीक है, मैं ऐसा ही हूँ।” हम सजाते हैं अपनी कमजोरी।तर्क बनाते हैं।सद्गुणों में बदल देते हैं। पर सच यही है—जिसे तुम सहते रहो,वह बढ़ता है। कमजोर स्व को तिरस्कार दो।उसे पालना बंद
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