कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

समय पर कविता -डॉ. पुष्पा सिंह’प्रेरणा

प्रेरणा और सकारात्मकता

समय पर कविता तेरे पाँवों की जंजीरों को,पाजेब बना दूँ !हथकड़ियाँ तोड़ हथेलियों में,मेहंदी रचा दूँ !नाजुक कलाइयों में रंगीन,चूड़ियाँ खनका दूँ!माथे की शिकन पर,झिलमिल बिंदिया सजा दूँ ! हे कर्मशील स्त्री आ तुझे,वनिता बना दूँ!न घबरा,भयभीत न हो,न भूल अपनी शक्ति को,न खामोशी से सहती रह,जोर जबरदस्ती को! आ चल साथ मेरे,तुझसे तेरी पहचान

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गिरिराज हिमालय

हिंदी कविता

गिरिराज हिमालय      भारत का हिमगिरि प्रहरी हैरजतमयी  अनमोल  ताज।युग- युग तक  कृतज्ञ  रहेगा,भरतखण्ड का  महा राज।अहो भाग्य है  इस भारत के,जहां हिमालय अडिग खडा।शीश  उठाये गिरवर निर्भय,स्वाभिमामान से धीर लडा़।गंगा  उद् गम गिरिवर से है,मूल दिव्य  औषधियों का।इसके अंक में पुरी विशाला,आराध्य देव है मुनियों का।अभेघ्य दुर्ग  है महा हिमाल़य,सदियों  से  रक्षा     करता।कोई दुश्मन 

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Maa Durga photo

सिंगार भजन /केवरा यदु “मीरा “

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। सिंगार भजन /केवरा यदु “मीरा “ सिंगार भजन सिंगार माता दुर्गा करन लागे हो

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दीपक की ख्वाहिश

हिंदी कविता

दीपक की ख्वाहिश दीपक की ख्वाहिशमिट्टी से बना हूँ मैं तो,मिट्टी में मिल जाऊँगा।जब तक हूँ अस्तित्व में,रौशनी कर जाऊँगा ।।तमस छाया हर तरफ,सात्विकता  बढ़ाऊंगा।विवेक को जगाकर मैं,रौशनी कर जाऊँगा ।।धैर्य की बाती लगाकर,विनय से तेल बनाऊंगा।सतत ज्ञान बढ़ाकर मैं,रौशनी कर जाऊँगा ।।उत्साह मेरे है अंदर,सभी में भर जाऊँगा।ख्वाहिश एक ही बस,रौशनी कर जाऊँगा ।।मधु

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अब तो खुलकर बोल

हिंदी कविता

अब तो खुलकर बोल* शर्मिलापन दूर भगाकर,घूँघट के पट खोल!बोल बावरी कलम कामिनी,अब तो खुल कर बोल!!जीवन की अल्हड़ता देखी,खुशियाँ थी अनमोल!दुख को देखा इन नैनों से,तर्क तराजू तोल!ऊंच नीच की गलियाँ देखी,अक्षर अक्षर बोल!बोल बावरी कलम कामिनी,अब तो खुलकर बोल!!…………..(१) राजनिती में दल दल देखा,नेताओं का शौर!डाकू बनगये आज धुरंधर,सच्चे नेता चोर!गिरेबाँन गँदा है

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पुलवामा की घटना

हिंदी कविता

पुलवामा की घटना पुलवामा की घटना देख,                              देश बड़ा शर्मिंदा है।धिक्कार हमारे भुजबल पर ,                      अब तक कातिल जिन्दा है।वो बार -बार हमला करते ,                          हम शांति वार्ता करते है।दुश्मन इस गफलत में है,                        शायद हम उससे डरते है।गीदड की औकाद ही क्या ,                      जो हमको आँख दिखायेगा।पीठ पर घाव दिया है ,                          तो छाती

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अब तो बस प्रतिकार चाहिए

हिंदी कविता

अब तो बस प्रतिकार चाहिए आज लेखनी तड़प उठी हैभीषण नरसंहार देखकर।क्रोध प्रकट कर रही है अपनाज्वालामुखी अंगार उगलकर।दवात फोड़कर निकली स्याहीतलवारों पर धार दे रही।कलम सुभटिनी खड्ग खप्पर लेरण चण्डी सम हुँकार दे रही।जीभ प्यास से लटक रहीवैरी का शोणित पीने को।भाला बनकर आज भेद दूँआतंकी के सीने को।अबकी होली में आतंकीको होलिका बनाउंगी।फिर

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शारदे आयी हो मेरे अंगना

हिंदी कविता

शारदे आयी हो मेरे अंगना हे माँ शारदे, महाश्वेता आयी हो मेरे अंगना ।पूजूँगा तुम्हें हे शतरूपा, वीणापाणि माँ चंद्रवदना ।। बसंत ऋतु के पाँचवे दिवस पर हंस पे चढ़ कर आती हो।हे मालिनी इसलिए तुम हंसवाहिनी कहलाती हो।।माता तुम हो पुस्तक-धारिणी पुस्तक चढ़े तेरे चरणों में।ज्ञान का वर दो हे महामाया आया हूँ तेरी

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पिया जी देखो वसंत आ गया

प्रकृति और पर्यावरण

पिया जी देखो वसंत आ गया पेड़ो के झुरमुट से आतीकोयल की मीठी बोलीफूलों की हर कली पर देखोमतवाले भवरों की टोलीआम वृक्ष मंजरी व टिकोरो से लदबद गया ।पिया जी देखो वसंत आ गया ।। बेल वृक्ष पर आये नए फूलपौधो की अनुपम हरियालीनव पल्लव का पालना डालेप्रकृति नभी लाई खुशहालीटेसू के दहकते फूल

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एक कविता हूँ

हिंदी कविता

एक कविता हूँ! उंगलियों में कलम थामेसोचता हूँ…कि कहींहै वह ध्वनिजो उसे ध्वनित करे…!मैं अंतरिक्ष में तैरता..कल्पनाओं मेंछांटता हूँशब्दमीठे -मीठेकोई शब्द मिलता नहीं मुझेजो इंगित करे उसेबस….उंगलियों से ही उसे –उकेरता हूँ …मिटाता हूँ ।उंगलियों में कलम थामे…मैं सोचता हूँ ।।उसकी खूबसूरतीवो भोलापनतो मुझपे क़यामत ढाईन कोई उपमा सूझीन अतिशयोक्ति ही काम आईजब भी लिखना

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विश्वास टूटने पर कविता

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विश्वास टूटने पर कविता खण्डित जब से विश्वास हुआ है ,                     मनवा सिहर गया है।जीना         दूभर     लगता    जाने                 क्या क्या गुज़र गया है।तिनका तिनका    जोड़   घरौंदा              मिल जुल सकल बनाया।ख्वाबों ,अरमानों   ने    मिल के             पूरा         महल   सजाया ।वज्रपात जब हुआ   नियति   का            जीवन बिखर गया    है ।जीना दूभर  लगता  ,        जाने           क्या क्या गुज़र गया  

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