कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

भगत सिंह पर रचना – संगीता तिवारी

हिंदी कविता

भगत सिंह पर रचना – संगीता तिवारी वर्षों पूर्व भारतवर्ष में,। जन्मा था वीर क्रांतिकारी।। साहस ऐसा गजब अनोखा,। दुश्मन पर पड़ जाता भारी।। बन क्रांतिकारी लड़ा आजीवन,। हिम्मत उसने कभी ना हारी।। सुनो आज तुमको मैं सुनाऊं,। शहिद भगत सिंह कि गाथा।। बलिदानों कि गणना है भव्य।। अनुमान नहीं लगाया जाता।। देश के महान […]

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जिंदगी पर हरिगितिका छंद

हिंदी कविता

Submit : 16 Sep 2022, 10:56 AMEmail : doojramsahu0@gmail.com ये जिंदगी फोकट गवाँ झन , बिरथा नहीं जान दे ।आँखी अभी मा खोल तयँ हा, आघू डहर ध्यान दे ।तन फूलका पानी सही हे , बनय हाड़ा माँस के ।अनमोल जिंदगी कर लेवव, भरोसा नइ साँस के ।। दूजराम साहू अनन्य🙏🙏🙏

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विश्वकर्मा भगवान पर कविता -विनोद कुमार चौहान जोगी

हिंदी कविता

विश्वकर्मा भगवान पर कविता (अमृत ध्वनि छंद) सुन्दर सर्जनकार हैं, भौमन है शुभ नाम।गढ़ना नित ही नव्य कृति, प्रभुवर पावन काम।।प्रभुवर पावन, काम सुहावन, गढ़ें अटारी।अस्त्र बनाते, शस्त्र सजाते, महिमा न्यारी।।हैं अभियंता, गढ़ते जंता, गढ़ें ककुंदर।पूज्य प्रजापति, तुम्हीं रूपपति, श्री वर सुन्दर।। गढ़ते इस संसार को, लेकर कर औजार।ईश विश्वकर्मा हमें, देना भव से तार।।देना

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अभिलाषा पर दोहे – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

अभिलाषा पर दोहे मेरा मुझमें कुछ नहीं ,सब कुछ तेरा प्यार। तू तेरा ही जान कर ,सब होते भव पार।। क्षमादया तेरी कृपा,कण-कण में चहुँ ओर।अर्पण है तेरा तुझे ,क्या लागत है मोर।। सांस-सांस में रम रहा ,तू है जीवन डोर।माया मय पामर पतित ,मै हूँ पापी घोर।। तार करूणा कर मुझे ,हे दीनों के

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नारी के अधिकार पर कविता – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी के अधिकार पर कविता – बाबूराम सिंह नारी है नारायणी जननी जगत जीव की ,सबहीं की गुरु सारी सृष्टि की श्रृंगार है ।जननीकी जननीभी नारीकी विशेषता है ,महिमा नारी की सदा अगम अपार है ।जननी बहिन बहु -बेटी धर्मपत्नी बन ,सुखद बनाती सदा घर परिवार है।आदर सत्कार मान”कवि बाबूराम “कर ,औरत के बिना सही

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हिंदी की है अद्भुत महिमा – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

हिंदी की है अद्भुत महिमा हिंदी की है अद्भुत महिमा गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट जिसको जीवन में अपनाया, उसपर हम होते बलिहारीहिंदी की है अद्भुत महिमा, यह हमको प्राणों से प्यारी। हिंदी का गुणगान करें हम, हिंदी के गीतों को गाएँहिंदी की मीठी बोली से, सबके मन को अब हम भाएँ सदा फले- फूले यह भाषा,

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अनमोल मानव जीवन पर कविता

हिंदी कविता

अनमोल मानव जीवन पर कविता पकड़ प्यार सत्य धर्म की डोर ,बढ़ सर्वदा प्रकाश की ओर।मधुर वचन सबहिं से बोल,मानव जीवन है अनमोल। औरों से सद्गुण सम्भाल,निजका अवगुण दोष निकाल।सत्य वचन से कभी ना डोल,मानव जीवन है अनमोल। वैर- विरोध का नाम मिटाओ,आपस में सद्भाव बढा़ओ।मन कि गाँठें ज्ञान से खोल,मानव जीवन है अनमोल। पर

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मन हो रहा हताश – बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

मन हो रहा हताश . ✨✨१✨✨हम ही दुश्मन मीत, अपनी भाषा के बने।बस बड़ बोले गीत, सोच फिरंगी मन वही।।. ✨✨२✨✨बदलें फिर संसार, निज की सोच सुधार लें।दें शिशु हित संस्कार,अंग्रेजी की कार तज।। . ✨✨३✨✨चलें धरातल जान, उड़ना छोड़ें पंख बिन।तब ही हो पहचान, हिन्दी हिन्दुस्तान की।।. ✨✨४✨✨ज्ञान मरघटी तात, नशा उतरता शीघ्र ही।वही

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हिंदी छा जाए दुनिया में – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

हिंदी छा जाए दुनिया में गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट जिससे हैं हम जुड़े जन्म से, वही हमारी प्यारी भाषा,हिंदी छा जाए दुनिया में, पूरी हो अपनी अभिलाषा। अपनी भाषा के हित में हम, अपना जीवन करें समर्पितजितनी उन्नति होगी इसकी, उतने ही हम होंगे गर्वित बच्चे हिंदी पढ़ें-लिखें जब, बदले जीवन की परिभाषाहिंदी छा जाए दुनिया

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संवाद पर कविता – सुकमोती चौहान रुचि

हिंदी कविता

संवाद पर कविता तुमसे कर संवाद, सुकूं मन को मिलता है |मधुर लगे हर भाष्य, सुमन मन में खिलता है |कर्णप्रिय हर बात, प्रेरणा देती हरदम | करके जिसको याद, दूर हो जाती है गम ||उत्प्रेरक संवाद सब, नित्य सँजोया तुम करो |कठिन समय में याद कर, सत्य राह नित तुम वरो || करके नित

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माता है अनमोल रतन – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

माता है अनमोल रतन स्वांस-स्वांस में माँहै समाई,सदगुरुओं की माँ गुरूताई।श्रध्दा भाव से करो जतन,माता है अनमोल रतन।। अमृत है माता की वानी, माँ आशीश है सोना -चानी।माँ से बडा़ ना कोई धन, माता है अनमोल रतन।। माँका मान बढा़ओ जग में,सेवा से सब पाओ जग में।मणि माणिक माता कंचन,माता है अनमोल रतन।। सुख शान्ति

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इस वसुधा पर इन्सान वहीं – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना

कविता इस वसुधा पर इन्सान वहीं —————————————- धन,वैभव,पदविद्या आदिका जिसको हैअभियाननहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। सत्य धर्म फैलाने आला, विषय पीकर मुस्काने वाला, अबला अनाथ उठाने वाला, प्यार, स्नेह लुटाने वाला परहित में मर जाने वाला।अपना और परायाका जिसकेउर अंदर भान नहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। पर

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