कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

डूबे हो या खोए हुए?

हिंदी कविता

डूबना या खो जाना (अतुकांत कविता) जब सार्थक में डूबते हो,तो फालतू बातेंदरवाज़े पर दस्तक देती हैं,पर भीतर कोई नहीं मिलता—वे लौट जाती हैं,अपमानित, उपेक्षित। सार्थक डूबानमन को इतना भर देता हैकि रिक्तता को जगह नहीं मिलती।ध्यान इतना गहरा होता हैकि तुच्छ आकर्षणकेवल मच्छर-सी भनभनाहट बनकर रह जाते हैं। पर सावधान!हर डूबना साधना नहीं होता।कुछ

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जीवन के योग्य कर्म

हिंदी कविता

जीवन के योग्य कर्म किसी काम के लिए जियोजिसके लिएमरने का साहसरख सको। यहीतुम्हारा पेशा हो। क्योंकिकामसिर्फ़ रोज़ी नहीं,वहतुम्हारे जीवन कासबसे बड़ा हिस्सा है। जागते समय काअधिकांश भागतुमउसी मेंखपा दोगे। तो पूछो—इस एक जीवन केइतने समय के साथक्या करनासार्थक है? अधिकांश लोगगलत कारणों सेकाम चुन लेते हैं—सुरक्षा,परंपरा,दबाव,संयोग। फिरऊब,कड़वाहट,चिड़चिड़ापनउनका स्वभावबन जाता है। काम की गुणवत्तातनख़्वाह से

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लड़ने योग्य युद्ध

हिंदी कविता

लड़ने योग्य युद्ध सच मानो—ज़िंदगी का बड़ा हिस्साहमनेफालतू लड़ाइयों मेंगँवा दिया। ऐसी चीज़ों परजिन्हें हारने काकोई अर्थ नहीं था,और जीतने काकोई मूल्य नहीं। इसलिएन साहस जगा,न संकल्प,न भीतर कीकोई शक्ति। फिरअचानकएक असली युद्ध सामने आता है—भारी,अर्थपूर्ण,डराने वाला। यहीअनुग्रह है। अनुग्रहआराम बनकर नहीं आता,वहचुनौती बनकर आता है। पुराना तुमकमज़ोर है,भागना चाहता है—“क्यों मुसीबत मोल लूँ?”“क्यों यह

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असंभव ही निमंत्रण है

हिंदी कविता

असंभव ही निमंत्रण है जब करने योग्य मेंपूरा डूबे हो,तोनिराशा के लिएजगह कहाँ बचती है? अगर हर रेशाइस क्षण की माँग मेंलगा है,तोदुख रचने कासमय किसे है? स्थिति जितनीभारी होती है,उतनी हीनाटकीयता कीगुंजाइशघट जाती है। जब शत्रुदो हज़ार गुना हों,तो क्याकोने में बैठकररोने कीफुर्सत मिलती है? कुचली हुई परिस्थितिशोक का निमंत्रण नहीं—वहकर्म का आदेश है।

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सही कर्म का आनंद

हिंदी कविता

सही कर्म का आनंद सही विकल्प चुनो,सही निर्णय लो,सही युद्ध लड़ो—अबजीत-हारमहत्वहीन है। क्योंकिजहाँ तुम्हें खड़ा होना था,तुमवहीं खड़े हो। विजयबाहर की ट्रॉफी नहीं,वहभीतर की स्पष्टता है—अपने सबसे सचेतस्वरूप सेमेल। जब निर्णय स्वच्छ हो,जब चयनअंदर से न्यायपूर्ण हो,तो परिणामकेंद्र में नहीं रहता। महत्व बस इतना है—तुमनेपीठ नहीं फेरी। पूरी ताक़त सेजो क्षण माँगे,उसे दो।कुछ बचाकर मत

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रोज़ की जीत

हिंदी कविता

रोज़ की जीत महान होनाअतिमानव होना नहीं है।महान होनाअपनी सीमा सेएक क़दम आगे जाना है। जीनायुद्ध में होना है—हर दिन,हर पल। अंतिम विजय परमत अटको।अगर वह आई,तो वहउपहार होगी—लक्ष्य नहीं। असल मायने रखते हैंआज के युद्ध—छोटे,शांत,अदृश्य। रात को सोओयोद्धा बनकर।सुबह उठोयुद्ध जानते हुए। बिना लड़ेकभी मत थको।ईमानदार संघर्ष कीथकान—यही जीत है। दुनिया की तालियाँज़रूरी नहीं।अपनी

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डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति

हिंदी कविता

डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति जिस दिनतुम सच में परिपक्व हो जाओगे,डेडलाइनखुद गिर जाएगी।काम होगा—क्योंकि होना है। पर जब तकवह दिन नहीं आया,डेडलाइन सेनफ़रत मत करो।उसे अपनाओ। डेडलाइनदंड नहीं है—आईना है।वह बताती है:अभी भीतरस्पष्टता पूरी नहीं है। ईमानदारी से कहो—“अगर प्रेम होता,तो आदेश की ज़रूरत नहीं पड़ती।” डेडलाइन इसलिए हैक्योंकिबिना उसकेहम टालते हैं,भागते हैं,सोते

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पहले से ही घर

हिंदी कविता

पहले से ही घर कुछ लोगकिसी मंज़िल के लिएचलते हैं। और कुछमंज़िल से हीचलना शुरू करते हैं। दूसरेपहुँचें या न पहुँचें—वेपहले सेघर में होते हैं। जो मानते हैंकि दुनिया मेंकुछ हासिल करने लायकअंतिम चीज़ है,वेआशा मेंभटकते हैं। और कुछखिलाड़ी की तरहपूरी ताक़त से खेलते हैं—यह जानते हुएकि यहएक खेल है। वेडर से नहीं,असुरक्षा से नहीं—स्वतंत्रता

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देह मुक्ति पर वीटो लगाएगी

हिंदी कविता

देह मुक्ति पर वीटो लगाएगी जैसा हैवैसा मत छोड़ दो।धारा के साथ मत बहो। समयतुम्हें नहीं बदलेगा।अनुभवतुम्हें नहीं जगाएगा। चालीस हज़ार साल भीजी लो—तो भीकुछ अपने आपनहीं बदलेगा। हमसुख के इच्छुक हैं,परिश्रम से बचने वाले। किसी को काम कराना होतोइनाम देना पड़ता है।काम न कराना होतोकुछ मत करो। जड़ताहमारीस्वाभाविक सुविधा है। मुक्तिसबसे ऊँची उपलब्धि है—औरसबसे

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खून बहती नाक बेहतर है, खून बहता दिल नहीं

हिंदी कविता

*खून बहती नाक बेहतर है, खून बहता दिल नहीं** सबसे पहलेलक्ष्य चुनो—और वहयोग्य होना चाहिए। योग्य लक्ष्यआरामदेह नहीं होते।उन्हेंसुविधा देखकरनहीं चुना जाता। डर के बीचसच कहना,कड़वाहट के बीचदयालु बने रहना,शोरगुल मेंभीतरी स्पष्टताढूँढना— इनमें सेकुछ भीआसान नहीं है। जहाँ लक्ष्ययोग्य होगा,वहाँहारें भी होंगी।छोटी-छोटी।बार-बार। उन्हेंज़्यादा अर्थ मत दो। अगरहर छोटी हारतुम्हें तोड़ दे,तोतुम टिक नहीं पाओगे। लज्जा

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क्या जीवन सच में शुरू भी हुआ है?

हिंदी कविता

क्या जीवन सच में शुरू भी हुआ है? यदि तुमघड़ी के बोझ तले दबे हो,घंटों के गुलाम हो—तो यहतुम्हारे उद्देश्य परआरोप है। जिस काम कासही कारण होता है—जो बाहर से नहीं,भीतर की स्पष्टता सेजन्म लेता है—उसमेंसमय गिना नहीं जाता। पढ़ते हुए,काम करते हुए,यहाँ तक किसाँस लेते हुए भी—घड़ीचुप हो जाती है। और यदि तुम युवा

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मैं तृप्त हूँ या नहीं—किसे परवाह है!

हिंदी कविता

मैं तृप्त हूँ या नहीं—किसे परवाह है! अशांति है—अशांति है—अशांति है। फिरएक दिनसाहस करकेमैंनेअशांति को देखा। वहाँकुछ महान नहीं था।बसछोटी-छोटी माँगें,नाज़ुक इच्छाएँ,अहम् कीथकी हुई पुकार। और उसी क्षणअशांति कीसेवा करने कीज़रूरत खत्म हो गई। जबखुद की बेचैनीकेंद्र नहीं रहती,तोकुछ बड़ाजगह लेने लगता है। कोई कारण,कोई काम,कोई सत्य—जोइतना ध्यान माँगता हैकिअपने बारे मेंसोचने काअवकाश ही नहीं

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