अगला कदम ही पर्याप्त है

अगला कदम ही पर्याप्त है
(The Next Step Is Enough)

सच्चा कर्म
महत्त्वाकांक्षा से नहीं,
स्पष्टता से जन्म लेता है।
उसे नक्शों की ज़रूरत नहीं—
बस
एक सही अगला कदम।

हम खुद से धोखा करते हैं।
सुविधा पर फिसलते हैं,
बहानों में टिक जाते हैं,
और मान लेते हैं
कि हम बहुत कोशिश कर रहे हैं।

सच यह है—
हम खुद को पर्याप्त नहीं खींचते।
सीमा तक नहीं जाते।
अपने थोड़े से समय और ऊर्जा को
पूरी सख़्ती से नहीं बरतते।

फिर बैठकर
किसी चमत्कार की प्रतीक्षा करते हैं।
किसी ऊपर से उतरती सहायता की।
वह नहीं आने वाली।

और यही सबसे मुक्त करने वाली खबर है—
क्योंकि किसी मदद की ज़रूरत ही नहीं।

भ्रम में भी,
डर में भी,
तुम्हारे पास
अगला कदम उठाने के लिए
पर्याप्त है।

तुम असहाय नहीं हो।
तुम बस
अपनी ज़िम्मेदारी
किसी और को सौंप रहे हो।

रास्ता ढका हुआ है।
चोटी दिखाई नहीं देती।
मोड़ के आगे क्या है,
कोई नहीं जानता।
और कभी जानता भी नहीं।

किसी को पूरा नक्शा नहीं मिलता।
हमेशा
सिर्फ़ एक चीज़ मिलती है—
अगला सही कदम।

उसे
पूरे मन से उठाओ।
तीव्रता के साथ।
जीवन पूर्णता नहीं माँगता,
सर्वज्ञता नहीं माँगता—
बस
अज्ञात की ओर
एक ईमानदार क़दम।

उसके बाद क्या?
वह तुम्हारा काम नहीं।

सत्य
न आलसी सोचने वाले को मिलता है,
न घबराए हुए योजनाकार को।
वह प्रकट होता है
उसके लिए
जो बिना गारंटी
चल पड़ता है।

सत्य कोई मंज़िल नहीं,
अक्सर वह
एक बोझ से मुक्ति होता है।

अपने लक्ष्य भूल जाओ।
वे अक्सर
अहंकार की शर्तबद्ध इच्छाएँ होते हैं।

इसके बजाय पूछो—
इस क्षण
सही कर्म क्या है?

इस प्रश्न को
अपने भीतर चीरने दो।
इसे ही
अपना कम्पास बनने दो।

तुम्हें
और समय नहीं चाहिए।
और संसाधन नहीं चाहिए।
तुम्हें
और ईमानदारी चाहिए।

अगला कदम उठाओ।
बस वही
तुम्हारी मुक्ति है।

उसके बाद क्या?
हम कह चुके—
वह पूछना
हमारा विषय नहीं।
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