(मरने से पहले जागो)

Wake Up before You Die
(मरने से पहले जागो)
(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, अतुकांत कविता)

हर साँस के साथ
कुछ जोड़ो मत—
कुछ गिराओ।

दिन बीतें
तो बोझ बढ़े नहीं,
हल्कापन गहरा हो।

जीवन का उद्देश्य
संग्रह नहीं है,
समझ है।

जानकारी नहीं,
दृष्टि बढ़नी चाहिए।
संपत्ति नहीं,
स्वतंत्रता।

सच्ची वृद्धि
पाने में नहीं,
छोड़ने में है।

भ्रम छोड़ो,
उधार के सपने छोड़ो,
उस झूठे “मैं” को छोड़ो
जिसे तुम
खुद समझ बैठे हो।

तुम
अज्ञान के साथ जन्मे थे—
यह स्वाभाविक था।
पर
उसी अज्ञान के साथ मर जाना
त्रासदी है।

तुम
वृत्तियों के साथ आए थे—
पर
उन्हें क़ब्र तक ले जाना
असफलता है।

मृत्यु
अधूरी यात्रा का
अचानक अंत न बने।

वह
एक शिखर हो,
जहाँ पहुँचकर
अब कुछ बाँधता न हो।

एक गाँठ खुले,
कोई प्रश्न शेष न रहे।

सही ढंग से मरना
सही ढंग से जीने का
परिणाम है।

बिना बोझ,
बिना बंधन,
बिना शिकायत।

यही सफलता है—
जो तुमने कमाया,
उसमें नहीं।

बल्कि
जो तुमने
घुला दिया,
छोड़ दिया,
पार कर लिया—
उसी में।

मरने से पहले
जागो—
क्योंकि
जो जागकर जीता है,
वह
मृत्यु से
डरता नहीं।
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