March 2020

संस्कृति पर कविता

हिंदी कविता

संस्कृति पर कविता अपनी संस्कृति अपनाओ,अपना अभिवादन अपनाओ!जब भी मिले दूसरो से ,हाथ जोड़ मुस्कुराओ !!हाथ जोड़ मुस्कुराओ,कोरोना दूर भगाओ!हाथ धोये साबुन सेथोड़ा न घबराओ !!कहे दूजराम पुकार के ,सावधानी अपनाओ!खांसते मास्क लगाओकोरोना दूर भगाओ !! दूजराम साहूनिवास -भरदाकलातहसील -खैरागढ़जिला- राजनांदगाँव (छ.ग. )

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दादाजी पर कविता (एक अद्भुत मित्र)

हिंदी कविता

दादाजी पर कविता आज सुनाता हूँ मैं मेरे जीवन का वो प्रसंगजो है मेरे जीवन का एक अद्भुत अमिट अंग॥हुई कृपा उस ईश्वर की जो मुझे यहाँ पर भेजा हैसौंप दिया उस शख्श को मुझे जिसका मृदुल कलेजा है॥ईश्वर दे सभी को ऐसा जैसा मेरे भाग्य में सौंप दियाना डरता था मैं उनसे ऐसे बस

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कैसे जाल बिछाया है कोरोना

हिंदी कविता

कैसे जाल बिछाया है कोरोना कैसे जाल बिछाया है ?तूने रे कोरोना!हाहाकार मचा दिया है,हो रही है रोना !!कोरोना बोला सुन रे मानव,छोड़ दिया तूने अपनी संस्कृति,संस्कार भी भुला दिया !हाय हलो कर हाथ मिलाकर,रोगो को फैला दिया !!खान पान सादगी भुला ,माँसाहार अपना लिया !सत्य अहिंसा दयाभाव,दिलो से दफना दिया !!इसी कारण सून रे

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डॉग लवर पर पत्रकारिता

हिंदी कविता

डॉग लवर पर पत्रकारिता ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ किया करते थे।

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ख़यालों पर कविता

हिंदी कविता

ख़यालों पर कविता तुम मेरे ख़यालों में होते होमैं ख़ुशनसीब होता हूँबात चलती है तुम्हारी जहाँमैं ज़िक्र में होता हूँ . पलकें बंद होती नहीं रातों कोयादों को तुम्हारी आदत हैरातों की सियाही कटती नहींमैं फ़िक़्र में होता हूँ. क़तरा – क़तरा सुकूँ ज़िन्दगी मेंजमा होता है, यक-ब-यक नहींलुट जाता है ये सब अचानकमैं हिज़्र

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mera bharat mahan

शृंगार छंद विधान

हिंदी कविता

शृंगार छंद विधान श्रेष्ठ हो मेरा हिन्दुस्तान आरती चाह रही है मात।भारती अंक मोद विज्ञात।सैनिको करो प्रतिज्ञा आज।शस्त्र लो संग युद्ध के साज। विश्व मानवता हित में कर्म।सत्य है यही हमारा धर्म।आज आतंक मिटाना मीत।विश्व की सबसे भारी जीत। पाक को पाठ पढाओ वीर।धारणा में बस रखना धीर।भावना देश हितैषी पाल।कूदना बन दुश्मन का काल।

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साजन पर कविता

हिंदी कविता

साजन पर कविता मंद हवा तरु पात हिले,नचि लागत फागुन में सजनी।लाल महावर हाथ हिना,पद पायल साजत है बजनी।आय समीर बजे पतरा,झट पाँव बढ़े सजनी धरनी।बात कहूँ सजनी सपने,नित आवत साजन हैं रजनी। फूल खिले भँवरा भ्रमरे,तब आय बसे सजना चित में।तीतर मोर पपीह सबै,जब बोलत बोल पिया हित में।फागुन आवन की कहते,पिव बाट निहार

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सौ प्यास कैसे बुझे पर कविता

हिंदी कविता

सौ प्यास कैसे बुझे पर कविता मुझे कुछ ना सुझेभला एक बूंद मेंसौ प्यास कैसे बुझे ?तू मेरी ना सोच ,जा किसी चोंचअमृत बन .मेरी यही नियति हैकि तड़प मरूँअति महत्वाकांक्षा में.अब जान पाया हूंकि उचित हैसफर करना शून्य से शिखर तक.जीवन की ढलानहोती है भयानकऔर उससे भी कटुमेरी ये अकड़जो झुके तो भी ना

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ख्वाहिश पर कविता

हिंदी कविता

ख्वाहिश पर कविता मिट्टी से बना हूं मैं , मिट्टी में मिल जाऊंगा।जब तक हूँ अस्तित्व में ,रौशनी कर जाऊंगा।। तम छाया है हर तरफ,सात्विकता बढ़ाऊंगा।विवेक को जगा कर मैं,रोशनी कर जाऊंगा।। विनय रूपी भरूँ तेल ,धैर्य की बाती बनाऊंगा।सतत ज्ञान बढ़ाकर मैं ,रौशनी कर जाऊंगा।। उत्साह है मेरे अंदर, सभी में भर जाऊंगा।ख्वाहिश बस

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सत्य पर कविता

हिंदी कविता

सत्य पर कविता मैं कल भी अकेला थाआज भी अकेला हूंऔर संघर्ष पथ परहमेशा अकेला ही रहूंगा मैं किसी धर्म का नहींमैं किसी दल का नहींसम्मुख आने से मेरेभयभीत होते सभी जानते हैं सब मुझकोपरंतु स्वीकार करना चाहते नहींमैं तो सबका हूंकिंतु कोई मेरा नहीं फिर भी मैं किसी से डरता नहींना कभी झुकता हूंना

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holika-dahan

होली चालीसा – बाबू लाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

होली चालीसा :-चालीसा हिंदू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा के लिए गायी जाने वाली प्रार्थना होती है। ये प्रार्थनाएँ विशेष रूप से उन देवी-देवताओं को समर्पित की जाती हैं जिन्हें मान्यता है कि उनकी शक्ति और कृपा से भक्तों की समस्त मांग पूरी होती है। चालीसा के पाठ के माध्यम से भक्त अपने मनोकामनाओं

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बंधन पर कविता

हिंदी कविता

बंधन पर कविता बंधन बांधो ईश से, और सभी बेकार।केवल ब्रह्म सत्य है,पूरा जगत असार।। बंधन केवल प्यार का,होता बड़ा अनूप।स्वार्थ भावना से रहित,होता इसका रूप।। कर्मों का बंधन हमे,बांधे इस संसार।कर्म करें निष्काम तो,होते भव से पार।। मर्यादा में जो बंधे,वह सच्चा इंसान।जो मर्यादा रहित है,पाय नही सम्मान।। मर्यादा में थे बँधे, पुरुषोत्तम श्रीराम।चले

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