कर्ज पर कविता
हिंदी कविताकर्ज पर कविता कर्ज था कर्ज थाकर्ज हीउस किसान कामर्ज थाकह गया अलविदाजहान को कर्ज थाकर्ज हीउस पूंजीपति कामर्ज थाकह गया अलविदाभारत को कर्ज थाकर्ज हीउस बैंक कामर्ज थाकह गया अलविदाअस्तित्व को -विनोद सिल्ला©
कर्ज पर कविता कर्ज था कर्ज थाकर्ज हीउस किसान कामर्ज थाकह गया अलविदाजहान को कर्ज थाकर्ज हीउस पूंजीपति कामर्ज थाकह गया अलविदाभारत को कर्ज थाकर्ज हीउस बैंक कामर्ज थाकह गया अलविदाअस्तित्व को -विनोद सिल्ला©
याराना पर कविता साहिल पर आना मेरे यार मुझे तेरी याद सताती हैतेरी बातें मुझे बीते कल की याद दिलाती हैंसाहिल पर आना मेरे यार मुझे तेरी याद सताती है।1)जब तू मुझे कभी बुलाता हैयादों की सेज पर सुलाता हैवो प्रेम भरी शय्या मुझको जल्दी सुलाती हैसाहिल पर आना———————-॥ 2)जब तू मुझे कभी भी मिलता
मेरा परिचय पर कविता -विनोद सिल्ला चौबीस मई तारीख भई,उन्नीस सौ सत्ततर सन।सन्तरो देवी की कोख सेविनोद सिल्ला हुआ उत्पन्न।। माणक राम दादा का लाडला,उमेद सिंह सिल्ला का पूत।भाटोल जाटान में पैदा हुआ,क्रियाकलाप नाम अनुरूप।। सन् उन्नीस सौ बानवे में ,हो गया दसवीं पास।सादा भोला स्वभाव है,उन्नति करने की आस।। कक्षा बारहवीं पास कर,जे०बी०टी० में
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मुलाकात पर कविता मैं जब भीफरोलता हूँअलमारी में रखेअपने जरूरी कागजाततो सामने आ ही जाती हैएक चिट्ठीजो भेजी थीवर्षों पहलेमेरे दिल केमहरम नेभले ही उससेमुलाकात हुएहो गए वर्षोंपर चिट्ठीकरा देती है अहसासएक नई मुलाकात का -विनोद सिल्ला©
जन अदालत लघु कथा बचाओ बचाओ बचाओ की आवाज सुन दद्दू झोपडी से बाहर झाँका तो सन्न रह गया।गाँव के पटवारी को वर्दीधारी नक्सली घसीटते हुए ले जा रहे थे।दद्दू को समझते देर न लगी आज फिर हत्या कर दी जाएगी।फिर कानो में आवाज सुनाई दी,”गाँव वालो घर से बाहर निकलो जनअदालत है।”छत्तीसगढ़ के घूर
चटनी पर कविता चटनी लहसुन पीसना,लेना इसका स्वाद।डाल टमाटर मिर्च को,धनिया रखना याद।। अदरक चटनी रोज ले,भागे दूर जुकाम।खाँसी सत्यानाश हो,करते रहना काम।। चटनी खाना आम की,मिलकर के परिवार।उँगली अपनी चाट ले,मुँह में आवे लार।। चंद करेला पीसकर,खाना इसको शूर।गुणकारी यह पेट का,रोग रहे सब दूर।। इमली चटनी भात में,खाते मानव लोग।दूर करे यह कब्ज
कोरोना पर दोहे विद्यालय सब बंद है,कोरोना का घात।नर नारी सब मास्क पर,कहते डर की बात।। हाथ विचारे देख के,रहते हैं चुपचाप।नहीं बताते कुछ हमें,कोरोना पर आप।। कोरोना के काट का,खोज करो सब आज।मरे नहीं कोई यहाँ,होवे खूब इलाज।। आवत रोगी देख के,काँपे सबके हाथ।डॉक्टर परिजन सब डरे,असली रिश्ते साथ।। धोते रहना हाथ को,मास्क रहे
कवि पर कविता साहित्य के चूल्हे परशब्दों का तवा चढ़ावैचारिकता की लकड़ी मेंभावनाओं की आग जलाकरकलम की चिमटी सेमैं कविताओं की रोटियां सेंकता हूँहाँ! मैं कवि हूँ। ©तिलसमानी_KYS
कांशीराम पर कविता हाथी जैसा चाल,और शेर का दहाड़ था।हरि सिंह का लाडला,ओ साहब कांशीराम था।बिसन कौर के लाल,रूपनगर में जन्मे।डील डौल बालक, बचपन से होनहार था। सफर किये वैज्ञानिक तक,ऐसा विद्वान था।मान्यवर कांशीराम जी, देश का महान था।आदर्श रहे उनके, बाबा साहब अम्बेडकर।हमारे ओ मसीहा, दलितों का भगवान था। नीला झंडा वाला,बहुजनों का नायक
बहुजनों का नायक साहब कांशीराम पर कविता Read More »
साहब कांसीराम पर कविता वो साईकिल चलाने वालासाहब कांसीराम था। वंचित को हक दिलाने वालासाहब कांसीराम था। बामसेफ को बनाने वालासाहब कांसीराम था। नीला झंडा उठाने वालासाहब कांसीराम था। खून में उबाल लाने वालासाहब कांसीराम था। शुद्र मन पर छाने वालासाहब कांसीराम था। भीम की याद दिलाने वालासाहब कांसीराम था। हमें हुक्मरान बनाने वालासाहब कांसीराम
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मित्रता पर कविता मित्रो के विवाद में संवाद करना चाहिए।मित्रो की मित्रता में अमृत रस बना चाहिए। मित्र ज्ञानी हो ना हो, सचा होना चाहिए।मित्रो में कपट ना हो, प्रेम होना चाहिए। समस्या में मित्रो का आसरा लेना चाहिए।भूख में मित्र भोजन बनना चाहिए। बुद्धि हो ना हो मित्र में परन्तु छल नहीं होना चाहिए।कृष्ण,
घर मंदिर पर कविता त्याग और सहयोग जहाँ होघर वो ही कहलाता है।इक दूजे में प्यार बहुत होघर मंदिर बन जाता है।।1।। आँगन में किलकारी गूँजेघर बच्चों से भरा रहे।नारी का सम्मान जहाँ होप्रेम और सहयोग रहे।।2।। बड़े दिखाए स्वयं बड़प्पनछोटे आज्ञाकारी हो।आपस में सहयोग भाव होजहाँ नही लाचारी हो।।3।। संस्कारो का मान जहाँ होमिलजुलकर