थूकना और चाटना पर कविता
हिंदी कविताथूकना और चाटना पर कविता उसके मुँह के सारे थूंकअब सूख चुके हैं ढूंढ-ढूंढकर वहपहले थूंके हुए जगहों पर जाकरउन थूंको को चाटकरफिर से गीला कर रहा है अपना मुँह उन्हें अपने किए ग़लतीका एहसास हो चुका है अब बेहद पछतावा है उसेकि आखिर बात-बात परक्यूं थूंका करता था ? आख़िर उसे ही अबअपना ही […]
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