March 2020

थूकना और चाटना पर कविता

हिंदी कविता

थूकना और चाटना पर कविता उसके मुँह के सारे थूंकअब सूख चुके हैं ढूंढ-ढूंढकर वहपहले थूंके हुए जगहों पर जाकरउन थूंको को चाटकरफिर से गीला कर रहा है अपना मुँह उन्हें अपने किए ग़लतीका एहसास हो चुका है अब बेहद पछतावा है उसेकि आखिर बात-बात परक्यूं थूंका करता था ? आख़िर उसे ही अबअपना ही […]

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कितना कुछ बदल गया इन दिनों…

समाज और यथार्थ

कितना कुछ बदल गया इन दिनों… देशभक्ति कभी इतनी आसान न थीसीमा पर लड़ने की जरूरत नहींघर की चार दीवारी सीमा मेंबाहर जाने से ख़ुद को रोके रहना देशभक्ति हो गई ऑफिस जाने की जरूरत नहींबिना काम घर में बैठे रहना हीआपकी कर्तव्यनिष्ठा,त्याग और समर्पण का प्रमाण हो गया मलूकदास जीबड़े ही मर्मज्ञ और दूरदर्शी संत

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हाइकु

हाइकु तृतीय शतक

हिंदी कविता

हाइकु शतक १बुलकड़ियाँरिक्त गौशाला द्वारसूखा गोबर।२चैत्र प्रभातविधवा का शृंगारदूर्वा टोकरी।३फाग पूर्णिमाडंडे पर जौ बालीबालक दौड़ा।४होली दहनचूल्हे पे हंसती माँगेहूँ बालियाँ।५मदिरालयकुतिया को पकोड़ेनाली में वृद्ध।६औषधालयचारपाई पे वृद्धनीम निम्बोली।७कैर साँगरीबाजरी की रोटियाँहाथ खरोंच।८चंग का स्वरमातृ गोद बालिकाआँख में आंसू।९निम्बू का रसरंगे हाथ बालिकामेंहदी तीली।१०भंग की गोलीसिल बट्टे पे पिस्ताबादाम गिरी।११अजवायनअरबी की पत्तियाँबेसन लेप।१२प्याज की क्यारीकिसान की बेटियाँछाछ

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जिंदाबाद पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जिंदाबाद पर कविता लाईलाज घातकवायरस के आगमन परदेवालय, खुदालय व गोडालयया अन्य धर्मस्थलसब बंद हैंआरती, अजान व प्रार्थनाअनिश्चित काल के लिएटाल दीं गईं हैंअनुष्ठान निलंबित हैंटोने-टोटकेजादू-मंत्रसब निष्प्रभावी हैंखुले हैंऔषधालय, दवालय व जांचालयचिकित्सक जिंदाबादबहुउद्देशीय स्वास्थ्य-कर्मी जिंदाबादविज्ञान जिंदाबादमास्क बनाने वालेजिंदाबादमास्क बांटने वालेजिंदाबाद -विनोद सिल्ला©

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वक्त पर कविता

हिंदी कविता

वक्त पर कविता दुनिया कितनी सुंदर व प्यारी है।भारत उन सबमें नूतन न्यारी है।दुनिया के इस समय की घटना सुनाते हैं।चलो आज घर में वक्त बिताते हैं।1.सभी तरफ कोहराम मचा है।जान बचाना हो गया भारी।मनुष्य चाँद पर जा पहुंचा।पर एक वायरस से कैसी लाचारी।इस विपदा की घड़ी में अपना कर्तव्य निभाते हैं।चलो आज घर में

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जल पर कविता

हिंदी कविता

जल पर कविता जल जीवन का सार है।जल जीने का आधार है।जल प्यासे की पुकार है।जल जीवन का करतार है।जल है तो कल है।जल बिना जीवन विकल है।बूँद बूँद का संचय कर मधुर।तब ही होगा तेरा जीवन सफल है।जल ही जीवन है।इसे व्यर्थ में न बहाएँ।जल संचय कर मधुर।अपना कर्तव्य निभाएँ।जल जीवन की पहचान है।जल

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घर-बेघर पर कविता

हिंदी कविता

घर-बेघर पर कविता सरकार का आदेश हैआज मुझेऔर बाकी सब को भीघर पर रहना हैमैं और बाकी सबहर संभव प्रयास करकेघर पर ही रहेंगेलेकिन सरकारयह बताना भूल गईकहाँ रहेंगेनगरों-महानगरों के बेघरजिनका धरती बिछौनाआसमान ओढ़ना हैजो करते हैं विचरणसरकारों केमुख्यालयों की नाक के नीचेकहाँ रहेंगे वे खानाबदोशजो स्वयं केव पशुओं केभोजन की तलाश मेंघूमते हैंएक गांव

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निर्भया न्याय दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ

निर्भया न्याय दिवस पर कविता सन् दो हजार बीस,बीस मार्च रहा अनुपम।स्वर्णिम दिन है आज,शांत मन तन है शुद्धम।हुई न्याय की जीत,निर्भया तेरी जय हो।दुराचार का अंत,सजा देना अब तय हो।सात साल के बाद में,फाँसी में झूले सभी।अब हो नहीं समाज में, फिर ऐसी घटना कभी। सुकमोती चौहान रुचिबिछिया ,महासमुन्द,छ.ग.

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फेसबुक प्यार पर कहानी

हिंदी कविता

फेसबुक प्यार पर कहानी सॉफ्टवेयर डेवलपर इंडिया निवासी नीलकमल फेसबुक चला रहा था,एक खूबसूरत युवती “हनी में”जो थाईलैंड में लोहा प्लास्टिक कम्पनी में मशीन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थी,को फ्रेंडरिक्वेस्ट भेज दिया।जवाब भी कन्फर्म हो गया,नीलकमल बहुत खुश था,सॉफ्टवेयर डेवलप करने का यूट्यूब वीडियो नीलकमल कमल ने शेयर किया हनी में ने लाइक किया।और

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विश्व कविता दिवस – सुन्दर लाल डडसेना

समाज और यथार्थ

विश्व कविता दिवस (अंग्रेजी: World Poetry Day) प्रतिवर्ष २१ मार्च[1] को मनाया जाता है। यूनेस्को ने इस दिन को विश्व कविता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा वर्ष 1999[2] में की थी जिसका उद्देश्य को कवियों और कविता की सृजनात्मक महिमा को सम्मान देने के लिए था। कविता क्या है? हे प्रिये! कविता क्या है?कविता मधुर की मुस्कान है।भावों

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खादीधारी पर कविता

हिंदी कविता

खादीधारी पर कविता समय-समय परपनप जाते हैंनए-नए नाम सेनए-नए वायरसजो करते हैं संक्रमितइंसानों कोबिना जाति-धर्म काभेदभाव किएढूंढ़ा जाता है उपचारइन वायरस का संसद-विधानसभाओं मेंचौकड़ी मारे बैठे वायरसजाति-धर्म के नाम परकरते हैं संक्रमितमानवता कोनहीं हुआ आज तककोई अनुसंधानइनके उपचार के लिएसर्वाधिक खतरनाक हैंये खादीधारी वायरसदिन प्रतिदिन इनका प्रकोपबढ़ता ही जा रहा है -विनोद सिल्ला©

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कोरोना वायरस को दूर भगाएंगे

हिंदी कविता

कोरोना वायरस को दूर भगाएंगे भीड़ भाड़ में न जाएंगे,हाथ किसी से न मिलाएंगे।सबको यह बताएंगे,कोरोना वायरस को दूर भगाएंगे। कच्चा मांस न खाएंगे,खूब उसे पकाएंगे।सबको यह बताएंगे ,कोरोना वायरस को दूर भगाएंगे। कोरोना लक्षण दिखे तो,तुरंत जांच कराएंगे ।सबको यह बताएंगे ,कोरोना वायरस को दूर भगाएंगे। साबुन से हाथ धोएंगे,मास्क हम लगाएंगे।सबको यह बताएंगे,कोरोना

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