प्रेरणा दायक कविता – यह राह नहीं है फूलों की

प्रेरणा दायक कविता

प्रेरणा दायक कविता – यह राह नहीं है फूलों की


यह राह नहीं है फूलों की, काँटे ही इस पर मिलते हैं।
लेकर के दर्द जमाने का, बस हिम्मत वाले चलते हैं। यह राह…


कब किसने कहा था ईसा से, तुम सूली के सोपान चढ़ो।
किसने सुकरात को समझाया, विष के प्याले की ओर बढ़ो॥
जिसने असली आवाज सुनी, उसने मंजिल भी खुद ही चुनी।
युग पहरी के उर के स्वर ही, बनकर तूफान मचलते हैं। यह राह.


थी कौन कमी उस गौतम को, जिसने वह वैभव था छोड़ा।
मंसूर ने बनकर दीवाना, किस हुस्न से नाता था जोड़ा।
थी रात अँधेरी फिर भी चले, आघात सहे पथ भी बदले।
इन दर्द भरे पद चिन्हों पर, पूजा के सरसिज खिलते॥ यह राह…


आजाद, भगत सिंह, बिस्मिल ने भी, राह यही अपनाई थी।
इससे ही गांधी बापू ने, सीने पे गोली खाई थी।
कुछ और भले मत मानो तुम, पर कीमत अपनी पहचानो।

बलिदान के साँचे में सच्चे इन्सान के सिक्के ढलते हैं। यह राह…
जीने को जिया करते हैं, पशु, पक्षी कीट, पतंग सभी।
इतिहास के गुलशन में लेकिन, आता वासन्ती रंग तभी।
जब ऐसा माली आता है, जो जीते जी गल जाता है।
बरसों तपती है जो माटी, उसमें से रत्न निकलते हैं । यह राह…

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