आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे

आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे

kavita



आओ खेले खेल भइया आओ खेले खेल।
खेल खेल में हो जाता है संस्कृतियों का मेल।
खेल में होता दिमाग चुस्त शरीर स्वस्थ निरोगी।
जीवन में आए संयम अनुशासन मन बन जाए योगी।
आओ खेलें खेल – – – – – – – –

अपनी दिनचर्या में हम खेलों को ऐसे करें शामिल।
जैसे खाना , पीना , सोना , जगना है हर दिन।
आओ खेले खेल – – – – – – – –

ओलंपिक से राष्ट्रीय खेल में 8 स्वर्ण हम लाए।
अब ऐसा क्या हो गया कि हम हॉकी के जादूगर को भूल जाएं।
आओ खेलें खेल—-
खेलों में हमने कितने ही बनाए कीर्तिमान।
जिससे बढ़ता देश का सम्मान और होता गुणगान।
आओ खेलें खेल—-
41 वर्ष बाद हम फिर ले आए सोना।
नीरज चोपड़ा ने भाला फेंका पुलकित हो गया कोना कोना।
आओ खेलें खेल—–‘
भावनाओं से खेलना छोड़ हम दिमाग का खेल दिखाएंI
हर घर में हो एक खिलाड़ी हम अव्वल हो जाएं।
आओ खेलें खेल—-
अच्छे खेल से बढ़ेगा हमारा विश्व पटल पर मान।
विश्व बंधुत्व की बढ़ेगी भावना खेलों में है वह जान।
आओ खेलें खेल भइया आओ खेलें खेल।

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