हे गणनायक – विनोद कुमार चौहान

गणपति
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हे गणनायक (सार छंद)

हे गणनायक हे लम्बोदर, गजमुख गौरी नंदन।
लोपोन्मुख थाली से होते, अक्षत-रोली-चंदन।।

हे शशिवर्णम शुभगुणकानन, छाई है लाचारी।
बढ़ती मँहगाई से अब तो, हारी जनता सारी।।

हे यज्ञकाय हे योगाधिप, भोग लगाऊँ कैसे।
मोदक की कीमत तो बप्पा, बढ़े कनक के जैसे।।

हे उमापुत्र हे प्रथमेश्वर, मँहगे हैं अब ईंधन।
मूषक वाहन ही अच्छा है, रहे न जिसमें इंजन।।

हे एकदंत हे बुद्धिनाथ, हो गुरुवर तुम ज्ञानी।
शिक्षा को बेमोल समझता, करे मनुज नादानी।।

वक्रतुंड हे सिद्धिविनायक, काज सिद्ध हो सारे।
लौट न जाए खाली कोई, जो भी आए द्वारे।।

हे विघ्नेश्वर संकट हरना, भव से तरना तारक।
मँहगाई से त्राण करो नित, रिपुओं के संहारक।।

विनोद कुमार चौहान “जोगी”
जोगीडीपा सरायपाली
मो. नं. 9669360722

बहार
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