एक अग्नि से अगली अग्नि तक
सूची पूरी करने वाले लक्ष्य
देह को चाहिए—
टिक लग सके,
इनाम मिले,
नाम चमके।
पर चेतना
कुछ और खोजती है—
इतना विशाल,
इतना उज्ज्वल,
कि जीवन भर दौड़ो
फिर भी
पूरा न हो।
इसलिए
वही चुनो
जिससे प्रेम करना
टालना असंभव हो।
या ऐसा काम चुनो
जो इतना बड़ा हो
कि प्रेम
अपने आप
जन्म ले।
पूछो खुद से—
क्या है
जो मैं बिना दाम के भी कर सकूँ?
क्या है
जिसे करते हुए
थकान नहीं,
आग जलती है?
अंतिम लक्ष्य
बाहर नहीं है—
अंधकार का क्षय,
बंधन का अंत
अंदर घटता है।
पर भीतर की लड़ाई
सीधे नहीं लड़ी जाती।
इसलिए
बाहर के मोर्चे चुनो—
कठिन,
साहसी,
माँग करने वाले—
ताकि
अज्ञान
धीरे-धीरे
गलता जाए।
हर काम
शुरू होगा,
खत्म होगा।
एक शिखर के बाद
रुकने का लोभ आएगा—
मत रुको।
काम कभी पूरा नहीं होता।
हर जीत
अगली चुनौती की ओर
इशारा करती है।
असली सफलता
एक उपलब्धि नहीं—
ठहरने से इंकार है।
और अगर तुम
आराम के बजाय
सबसे कठिन प्रेम चुनते हो,
अंदर की ओर
बार-बार मुड़ते हो—
तो जान लो,
तुम पहले से
विजयी हो।
एक अग्नि से
अगली अग्नि तक—
यही जीवन है।





