संबंध से पहले संपूर्ण बनो
किसी का
योग्य साथी बनने से पहले
क्या
योग्य मनुष्य
बनना आवश्यक नहीं?
अकेलापन
सीखो।
दूसरों से
जुड़ने से पहले
अपने साथ
रहना सीखो—
आसानी से,
सहजता से,
खुशी से।
यदि
तुम स्वयं के साथ
बैठ नहीं सकते,
तो
कृपया
किसी और पर
भार मत बनो।
जो
अपने भीतर
ठीक नहीं है,
वह
दूसरे पर
सवार क्यों हो?
अक्सर
हम
दूसरे के पास
इसीलिए जाते हैं
क्योंकि
हम
अपने पास
रुक नहीं पाते।
यह भी सत्य है—
हमें
संबंधों में
जीना है।
हम
द्वीप नहीं बन सकते।
पर
संबंध
स्वस्थ हो।
ऐसा न हो
कि
तुम
अपनी बीमारी
दूसरे को
सौंप दो।
पढ़ो—
अकेले।
यात्रा करो—
अकेले।
फिल्म देखो,
खेलो—
अकेले।
बहुत कुछ है
जो
सिर्फ
अकेलेपन में
संभव है।
यही
तुम्हें
भीतर से
मज़बूत बनाता है।
पूर्ण।
संतुष्ट।
तब
तुम
किसी के पास
भिखारी बनकर
नहीं जाओगे।
और
यदि जाओगे भी,
तो
देने के लिए
कुछ होगा।
तब
संबंध
आनंद का होगा,
स्वास्थ्य का होगा—
न कि
निर्भरता का,
न कि
हताशा का।
पहले
संपूर्ण बनो।
फिर
संबंध
अपने आप
सुंदर हो जाएगा।





