स्पष्टता के बिना साहस उन्माद है
(Courage without Clarity Is Hysteria)
(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता)
साहस की बात नहीं है,
बात
स्पष्टता की है।
साहस
अक्सर सस्ता मिल जाता है—
थोड़ी लालच,
थोड़ा नशा,
थोड़ा हार्मोनल उफान,
और डर
गायब हो जाता है।
भीड़ में
हीरो पैदा हो जाते हैं,
धुंध में
मृत्यु से भी
लड़ लेने का दावा।
तीन जाम के बाद
अहंकार
सात मंज़िल कूदने को
तैयार हो जाता है—
इसे साहस मत कहो,
यह उन्माद है।
असल गुण
साहस नहीं,
स्पष्टता है।
डरपोक और बहादुर—
दोनों में
मैं बड़ा अंतर नहीं देखता।
दोनों
अज्ञान के
एक ही केंद्र से चलते हैं।
परिस्थिति बदली,
तो
डर डींग बन गया,
और डींग
डर में बदल गई।
झूला वही है—
बस दिशा बदलती है।
वास्तविक विभाजन
डर और साहस में नहीं,
देखने और न देखने में है।
जो देखता है,
वह भीड़ नहीं खोजता।
उसका साहस
नारे नहीं माँगता।
स्पष्टता
ऐसा साहस है
जिसे तालियों की
ज़रूरत नहीं।
वह
उत्साह में नहीं जलता,
नशे में नहीं उछलता।
वह
शांत है,
सटीक है,
अकेला भी
पूर्ण है।
जहाँ स्पष्टता है,
वहाँ साहस
स्वतः उपस्थित है—
बिना शोर,
बिना उन्माद।
और जहाँ स्पष्टता नहीं,
वहाँ
हर साहस
सिर्फ
हिस्टीरिया है।





