झूठ के लिए चमकने से बेहतर है सत्य के लिए लहूलुहान होना
हार
असफलता नहीं होती।
सबसे बड़ी हार है—
यह जानकर भी
कि युद्ध योग्य है,
पीठ फेर लेना।
उत्कृष्ट बनने से पहले
पूछो—
किसमें?
तेज़ चलने से पहले
पूछो—
किस दिशा में?
गति बाद में आती है।
दिशा पहले।
गलत राह पर उड़ने से बेहतर है
सही रास्ते पर
रेंगना।
सही चुनाव करना
सही चुनाव में
परफेक्ट होने से
ज़्यादा ज़रूरी है।
युद्ध चुनो—
भले ही
तुम लड़ना
अभी न जानते हो।
कार्य चुनो—
भले ही
तुम उसमें
कमज़ोर हो।
तुम गिरोगे।
सीखोगे।
और यदि कारण सत्य है,
तो उठोगे।
साहस
कुशल होने का नाम नहीं।
साहस है—
वह करना
जो करना ही होगा,
चाहे वह
तुम्हें तोड़ दे।
जिस युद्ध से
तुम भागते हो,
अक्सर वही
तुम्हारे जन्म का कारण होता है।
तुम गिरकर नहीं हारते।
तुम
मैदान छोड़कर
हारते हो।
सत्य
यह नहीं पूछता
कि तुम तैयार हो या नहीं।
वह पूछता है—
क्या तुम ईमानदार हो?
पर समाज
तुम्हारी दिशा-सूई
बिगाड़ चुका है।
देह फुसफुसाती है—
जो आता है वही चुनो।
जो सफल करे वही चुनो।
यह बुद्धि नहीं।
यह डर है—
रणनीति का मुखौटा पहने।
असली निर्णय
एक प्रश्न से शुरू होता है—
क्या करना अनिवार्य है,
मेरी वर्तमान क्षमता से परे?
क्षमता
समय से आती है।
और सही राह पर चलने की क्षमता
सिर्फ चलने से आती है।
क्षमता की प्रतीक्षा
अनंत हो सकती है।
इसलिए
अहंकार को सजाने वाला नहीं,
उसे शुद्ध करने वाला चुनो—
भले ही
तुम्हें खून बहाना पड़े।
क्योंकि
झूठ के लिए चमकना
धीमी आत्महत्या है।
यदि कारण झूठा है,
तो तुम्हारी प्रतिभा भी
विश्वासघात है।
और यदि कारण सत्य है—
तो
तुम्हारी हार भी
प्रगति है।





