वही डूबना तैरना है / मनीभाई नवरत्न

वही डूबना तैरना है

जो सच में सार्थक है,
उसमें जब तुम डूबते हो,
तो फालतू बातें
दरवाज़े पर आकर भी
अंदर नहीं आ पातीं।

वे दस्तक देती हैं,
पर भीतर कोई खाली नहीं मिलता—
मन किसी सच्ची उपस्थिति से
भरा हुआ होता है।

पर सावधान।
हर डूबना मुक्ति नहीं होता।

कुछ डूबना
बेहोशी की तरह होता है—
जहाँ चिंता इसलिए नहीं मिटती
कि हल मिल गया,
बल्कि इसलिए
कि चेतना सुन्न हो गई।

काम बहुत होता है,
पर अर्थ शून्य।
दिन भर की व्यस्तता
एक नशे की तरह
दर्द को दबा देती है—
पर सच को भी।

ऐसी व्यस्तता
सुकून देती है,
पर स्वास्थ्य नहीं।
वह तुम्हें
खुद से काट देती है।

सही डूबना
इसका उल्टा है।
वह सुलाता नहीं,
जगाता है।
संवेदनाएँ कुंद नहीं करता,
तेज़ करता है।

जहाँ होश बढ़े,
जहाँ भीतर उजाला हो—
वही डूबना
असल में
तैरना है।

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