जीत मनुज की
हिंदी कविताजीत मनुज की . (१६,१६) काल चाल कितनी भी खेले,आखिर होगी जीत मनुज कीइतिहास लिखित पन्ने पलटो,हार हुई है सदा दनुज की।। विश्व पटल पर काल चक्र ने,वक्र तेग जब भी दिखलाया।प्रति उत्तर में तब तब मानव,और निखर नव उर्जा लाया।बहुत डराये सदा यामिनी,हुई रोशनी अरुणानुज की।काल चाल कितनी भी खेले,आखिर,………………….।। त्रेता में तम बहुत

