कर्तव्य-बोध-रामनरेश त्रिपाठी
हिंदी कविताकर्तव्य-बोध -रामनरेश त्रिपाठी जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है।जिसका खाकर अन्न सुधा सम नीर समीर पिया है। जिस पर खड़े हुए, खेले, घर बना बसे, सुख पाए।जिसका रूप विलोक तुम्हारे दृग, मन, प्राण जुड़ाए॥ वह स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है।उसके प्रति कर्त्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है।हाथ पकड़कर […]
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