बीते समय पर कविता
समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविताबीते समय पर कविता हम रहो के राही हैभटक जाए इतना आसान नहींइतना रहो में गुमार नहीहम से टकरा जाए इतना हकूमत में साहस नहीहो जाता हैचिर हरण जैसे जब अपने घर ही ताक नहीअपने बच्चे ही हाथ नहीदुनिया में खूब कमाई दौलतपर करता रहा में कोई राम राम नहीचलना आता हैपर करता है जमाना

