संयुक्त राष्ट्र पर कविता- दूजराम साहू
विज्ञान, तकनीक और भविष्यसंयुक्त राष्ट्र पर कविता आसमान छूने की है तमन्ना, अंधाधुंध हो रहे अविष्कार! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार! ! विज्ञान वरदान ही नहीं, अभिशाप भी है, कहीं नेकी करता तो कहीं पाप भी है! उन्नति में लग जाए तोकर दे भव से पार ! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार ! ! निर्माण के इस पावन युग
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