न आंसू न आहें न कोई गिला है-नीतू ठाकुर
हिंदी कवितान आंसू न आहें न कोई गिला है न आंसू ,न आहें,न कोई गिला है,लिखा भाग्य में जो वही तो मिला है,पुकारूँ किसे पूछती है हथेली,कभी जो दिया था उसी का सिला है। उजाड़ा गया बाग ऐसे हमारा,कभी जो बना था सभी का सहारा,सता के मुझे मुस्कुराए जमाना,कभी जो खिला ना वही तो खिला है।
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