कविता बहार

चन्द्रयान 2 पर कविता -डी.राज सेठिया

हिंदी कविता

चन्द्रयान 2 पर कविता काबिलियत है,पर मार्ग कठिन बहुत है।हासिल कुछ नही ,पर पाया बहुत है। हाँ नींद भी बेची थी,पर सकून बहुत पाया था।हाँ चैन भी बेची थी,पर गर्व बहुत पाया था।। दुआएं थी सवा सौ करोड़ लोगों की,वह क्या कम था। इसरो मैं भी भावुक हुँ,क्योंकि मैंने भी दुआ मांगा था।। जीवन के […]

चन्द्रयान 2 पर कविता -डी.राज सेठिया Read More »

विघ्न हरो गणराज-सुधा शर्मा

हिंदी कविता

विघ्न हरो गणराज हे गौरी नंदन हे गणपति,प्रथम पूज्य  महराज। कृपा करो हे नाथ हमारे,विघ्न हरें गण राज।। घना तिमिर है छाया जग में, भटक रहा इंसान।   भूल गया जीवन मूल्यों को ,बना हुआ शैतान।।  हे दुख भँजन आनंददाता,करिए  पूरी आस। रोग दोष सकल दूर करके,हरिए क्लेशविषाद ।। प्रथम पूजनीय हो प्रभू जी,पूजे सब संसार। 

विघ्न हरो गणराज-सुधा शर्मा Read More »

वे है मेरे गुरु जी-रोहित शर्मा ‘राही’

हिंदी कविता

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

वे है मेरे गुरु जी-रोहित शर्मा ‘राही’ Read More »

गुरू ने ज्ञान का दीप जलाया -सुन्दर लाल डडसेना मधुर

हिंदी कविता

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

गुरू ने ज्ञान का दीप जलाया -सुन्दर लाल डडसेना मधुर Read More »

तीजा तिहार पर आधारित लोकगीत -माधुरी डडसेना

Uncategorized

तीजा तिहार पर आधारित लोकगीत  ठेठरी खुरमी धर के दीदी,तीजा मनाये बर आहे जी।गंहू के गुलगुल भजिया धरके,डोकरी दाई बर लाथे जी।।  दाई ददा के मयारू ह,   बेटी बनके आहे जी।बालपन के संगी जहूंरिया,  डेरउठी म रद्दा निहारे जी।।  बारा बजे गिंजर गिंजर के,  करुभात झेलावत है जी।होत बिहिनिया सजसंवर के,लुगरा ले बर जावत हे

तीजा तिहार पर आधारित लोकगीत -माधुरी डडसेना Read More »

गणपति स्वागत है- माधुरी डडसेना

Uncategorized

गणपति स्वागत है पधारिये गिरजाशिव नन्दन, गणपति स्वागत है। बुद्धि प्रदाता हे दुख भंजन  सदा शुभागत है।। मुसक वाहन प्रखर प्रणेता,जग के नायक हो। प्रथम पुज्य तुम हो अग्रेता,  सुख के दायक हो विश्वासों का दीप जलाये,    हम शरणागत है। पधारिये गिरजा शिव नन्दन,   गणपति स्वागत है ।।  मात पिता में ब्रह्मण्ड बसा,   बतलाया जग

गणपति स्वागत है- माधुरी डडसेना Read More »

mera bharat mahan

आगे परब झंडा के -बोधन राम निषादराज विनायक

हिंदी कविता

आगे परब झंडा के आगे परब झंडा के,दिन अगस्त मास म। चलो झंडा  लहराबो ,खुल्ला अगास म।। आगे परब झंडा के…………………. रंग केसरिया हे ,तियाग के  पहिचान के। खून घलो खौलिस हे,देश के जवान के।। आजादी मनावत हन,उंखरे परयास  म। आगे परब झंडा के,………………… चलो झंडा लहराबो…………………. सादा रंग शांति अउ,सुरक्छा बतावत हे। मया भरे

आगे परब झंडा के -बोधन राम निषादराज विनायक Read More »

बासुदेव अग्रवाल नमन – गणेश वंदना

हिंदी कविता

गणेश वंदना  मात पिता शिव पार्वती, कार्तिकेय गुरु भ्राता।पुत्र रत्न शुभ लाभ हैं, वैभव सकल प्रदाता।। रिद्धि सिद्धि के नाथ ये, गज-कर से मुख सोहे।काया बड़ी विशाल जो, भक्त जनों को मोहे।।  भाद्र शुक्ल की चौथ को, गणपति पूजे जाते।आशु बुद्धि संपन्न ये, मोदक प्रिय कहलाते।। अधिपति हैं जल-तत्त्व के, पीत वस्त्र के धारी।रक्त-पुष्प से सोहते, भव-भय

बासुदेव अग्रवाल नमन – गणेश वंदना Read More »

jivan doha

जीवन के दोहों का संकलन

समाज और यथार्थ

जीवन के दोहों का संकलन 1- है मलीन चादर चढ़ी, अंतः चेतन अंग। समझे तब कैसे भला, हूँ मैं कौन मलंग।। 2- प्रतिसंवेदक कॄष्ण हैं, लिया पार्थ संज्ञान। साध्य विषय समझे तभी, हुआ विजय अभियान।। 3- मैं अनुनादी उम्र भर, अविचारी थे काज। जिस दिन प्रज्ञा लौ जली, समझे तब यह राज।। (मैं – अहंकार)

जीवन के दोहों का संकलन Read More »

धारा तीन सौ सत्तर पैतींस ए -डाँ. आदेश कुमार पंकज

हिंदी कविता

 धारा तीन सौ सत्तर पैतींस ए  सत्तर सालों में अब कोई नया उजाला लाया है । छप्पन इंची के सीने ने ही साहस दिखलाया है ।। बच्चों को बंदूकें देकर जहर घोलते फिरते थे । केसर की क्यारी जो जन आग लगाते फिरते थे ।। ऐसे सब गद्दारों को उनके घर में दफनाया है ।

धारा तीन सौ सत्तर पैतींस ए -डाँ. आदेश कुमार पंकज Read More »

atal bihari bajpei

अटल जी की स्मृति में कविता – बाके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

अटल जी की स्मृति में कविता  नाम अटल था, काम अटल था,,जीवन भर विश्वास अटल था, साथ अटल सामर्थ्य अटल था,,,जीवन का सिद्धांत अटल था,,याद करे उस महामानव को,,आज हुई नम आँख हमारी,,नाम था जिनका अटल बिहारी ।।नाम था जिनका,,,,,,,,,,,समर अटल श्मशान अटल था ,,उनका हल अरमान अटल था,,भेष अटल था,द्वेष अटल था,,शांति का संदेश अटल

अटल जी की स्मृति में कविता – बाके बिहारी बरबीगहीया Read More »

mera bharat mahan

भारत वतन मिले -केवरा यदु”मीरा”

Uncategorized

भारत वतन मिले हे प्रभू धरा पर  जब जब जनम मिले।भारत वतन मिले भारत वतन मिले। राम कृष्ण गौतम गांधी का है देश।घर घर में हो रामायण गीता का  हो संदेश।सूर मीरा तुलसी  कबीरा   मिले।       भारत वतन—— गूँजे वेद की   श्रृचाएं मंदिर  की घंटियाँ।उतुंग  हिमालय   की  है ऊँची  चोटियाँ।गंगा यमुना  गोदावरी की संगम

भारत वतन मिले -केवरा यदु”मीरा” Read More »

Scroll to Top