कविता बहार

moon

चाँद पर कविता

हिंदी कविता

चाँद, पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है, जो रात के आकाश में एक चमकदार और मोहक वस्तु के रूप में चमकता है। इसकी सतह पर बहुत सारे गड्ढे, पर्वत और समतल क्षेत्र हैं, जो इसे एक अद्वितीय और सुंदर दृश्य प्रदान करते हैं। चाँद की उपस्थिति पर विभिन्न संस्कृतियों में गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ […]

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सरसी छंद में कैसे लिखें

हिंदी कविता

सरसी छंद को समझने से पहले आइए हम छंद विधान को समझते हैं । अक्षरों की संख्या और क्रम , मात्रा, गणना और यति गति से संबंद्ध विशिष्ट नियमों से नियोजित पद्य रचना को छंद की संज्ञा दी गई है। मात्रिक छंद की परिभाषा छंद के भेद में ऐसा छंद जो मात्रा की गणना पर

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कलम पर कवितायें

हिंदी कविता

हाय! कलम क्यों थककर बैठी? ध्येय अधूरा है फिर भी तुम, कैसे करती हो विश्राम?हाय! कलम क्यों थककर बैठी? भूल गई क्या अपना काम? नहीं मरी भूखमरी भू की, विपन्नता भी हुई न दूर।शिक्षा से वंचित हैं बच्चे, धन अर्जन को हैं मजबूर।।रहें अभावों में जीते सब, संसाधन भी हुए अनाम।हाय! कलम क्यों थककर बैठी?

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वर्तमान परिस्थितियों पर कविता

हिंदी कविता

हो रहा कटु द्वेष का आयात है अब न जीवन में रही वह बात है,दिन नहीं उजला न उजली रात है। क्या कहें सम्बन्ध के सम्बन्ध में,यह परस्पर स्वार्थ का अनुपात है। दीप बुझने हैं लगे जनतंत्र के,देश में दुर्दम्य झंझावात है। शांति का संदेश देने के लिए,वह कराने लग गया उत्पात है। जागरण है

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हिन्दी वर्णमाला पर कविता

हिंदी कविता

 हिन्दी वर्णमाला विचार अ से अनार , का फल है ताजा ।आ से आम , फलों में राजा । इ से इमली , वो खट्टी-खट्टी ।ई से ई ईख , वो उतनी ही मीठी । उ से उल्लू , रात को आए ।ऊ से ऊन का, ठंड में भाए । ऋ से ऋषि है ,

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इसरो चन्द्रयान पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

इसरो चन्द्रयान पर कविता : भारत की चन्द्रक्रान्ति में इसरो के अंतरिक्ष में बढ़ते कदमों पर हर इसरोजन को नमन और एक भारतीय के रूप में गौरव के पल है . नमन तुम्हें है इसरोजन देश गर्व से देख रहा है,आज चमकते चांद की ओर ।दुनिया में अपना नाम बना हैं ,छूकर इसका तलीय छोर।

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किसान खेत जोतते हुए

सावन पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

सावन-सुरंगा सरस-सपन-सावन सरसाया ।तन-मन उमंग और आनंद छाया ।‘अवनि ‘ ने ओढ़ी हरियाली ,‘नभ’ रिमझिम वर्षा ले आया । पुरवाई की शीतल ठंडक ,सूर्यताप की तेजी, मंदक । पवन सरसती सुर में गाती ,सुर-सावन-मल्हार सुनाती । बागों में बहारों का मेला ,पतझड़ बाद मौसम अलबेला । ‘शिव-भोले’ की भक्ति भूषित ,कावड़ यात्रा चली प्रफुल्लित ।

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निर्लज्ज कामदेव

हिंदी कविता

निर्लज्ज कामदेव   ओ निर्लज्ज कामदेवतू न अवसर देखता है,न परिस्थितियाँन जाति देखता है, न आयुन सामाजिक स्तरयहाँ तक कि, कभी कभीतो रिश्ता भी नहीं देखतादेशों की सीमाएं ,तेरे लियेकोई मायने नहीं रखतीं. तेरे कारण हीन जाने कितने घर टूटेआज भी टूट रहे हैं,न जाने कितनी हत्याएं हुईंआज भी हो रही हैंकितने कारागार भर गयेनये कारागार

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हाइकु

सुधा राठौर जी के हाइकु

हिंदी कविता

सुधा राठौर जी के हाइकु छलक गयापूरबी के हाथों सेकनक घट★बहने लगींसुनहरी रश्मियाँविहान-पथ★चुग रहे हैंहवाओं के पखेरूधूप की उष्मा★झूलने लगींशाख़ों के झूलों परस्वर्ण किरणें★नभ में गूँजेपखेरुओं के स्वरप्रभात गान सुधा राठौर

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हाइकु

निमाई प्रधान’क्षितिज’ के हाइकु

प्रकृति और पर्यावरण

निमाई प्रधान’क्षितिज’ के हाइकु *[1]* *हे रघुवीर!**मन में रावण है* *करो संहार ।* *[2]**सदियाँ बीतीं* *वहीं की वहीं टिकीं* *विद्रूपताएँ ।* *[3]**जाति-जंजाल**पैठा अंदर तक**करो विमर्श ।* *[4]**दुःखी किसान* *सूखे खेत हैं सारे* *चिंता-वितान* *[5]**कृषक रुष्ट* *बचा आख़िरी रास्ता* *क्रांति का रुख़* *[6]**प्रकृति-मित्र!**सब भूले तुमको**बड़ा विचित्र!!* *[7]* *अथक श्रम* *जाड़ा-घाम-बारिश* *नहीं विश्राम* *[8]**बंजर भूमि**फसल कहाँ से

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मन की लालसा किसे कहे

हिंदी कविता

मन की लालसा किसे कहे सच कहुं तो कोई लालसा रखी नहींमन की ललक किसी से कही नहीं क्यों कि     जीवन है मुट्ठी में रेत    धीरे धीरे फिसल रहा   खुशियां, हर्ष, गम प्रेम   इसी से मन बहल रहा। बचपन की राहे उबड़ खाबड़,फिर भी आगे बढ़ते रहे,भेद भाव ना बैर मन मेंनिश्छल ही चलते

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कुछ चिन्ह छोड़ दें -गीता द्विवेदी

हिंदी कविता

कुछ चिन्ह छोड़ दें -गीता द्विवेदी मृत्यु आती है ,सदियों से अकेले ही ,बार – बार , हजार बारलाखों , करोड़ों , अरबों बार ।पर अकेले जाती नहीं ,ले जाती है अपने साथ ,उन्हें , जिन्हें ले जाना चाहती है । एक , दो या हजारकुछ भयभीत रहते हैं ,उसके नाम से , उसकी छाया

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